13 मार्च 1781 को एस्ट्रोनॉमर विलियम हर्शेल ने यूरेनस की खोज की थी. हर्शले ने एक शक्तिशाली दूरबीन का इस्तेमाल से इसे खोजा था. यह सूर्य का सातवां ग्रह था. इससे पहले के खगोलशास्त्री यूरेनस को एक तारा मानते थे. हर्शले ने यह बताया कि यूरेनस एक तारा नहीं ग्रह है जो सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाता है.
हर्शेल को बाद में उनकी ऐतिहासिक खोज के लिए नाइट की उपाधि से सम्मानित किया गया. 1600 के दशक की शुरुआत में दूरबीन का आविष्कार हुआ था. इसके बाद यूरेनस और नेपच्यून नामक दो अन्य ग्रहों की खोज हुई. खगोलशास्त्री विलियम हर्शेल ने 1781 में दूरबीन से ही यूरेनस की खोज की. वहीं सूर्य से सबसे दूर स्थित ग्रह नेप्च्यून (जो हर 165 वर्षों में एक सौर परिक्रमा पूरी करता है) को पहली बार 1846 में जर्मन खगोलशास्त्री जोहान गॉटफ्रीड गैले ने दूरबीन से ही देखा था.
चूंकि, यूरेनस की खोज का श्रेय हर्शले को दिया जाता है. इसलिए अन्य खगोलशास्त्री इस ग्रह का नाम हर्शेल रखना चाहते थे. वहीं हर्शले खुद इस ग्रह का नाम इंग्लैंड के राजा जॉर्ज तृतीय के सम्मान में जॉर्जियम सिडस या 'जॉर्जियाई ग्रह' रखा था. जबकि, जर्मन खगोलशास्त्री जोहान बोडे ने यूरेनस नाम सुझाया, जो आकाश के ग्रीक देवता, उरानोस का लैटिन रूप है. यूरेनस, प्राचीन यूनानी आकाश के देवता, ओलंपियन देवताओं के पूर्वज थे.
हालांकि, यूरेनस नाम को 1800 के दशक के मध्य तक पूरी तरह से स्वीकृति नहीं मिली. 19वीं शताब्दी के मध्य तक, यह सूर्य के सातवें ग्रह का सर्वमान्य नाम बन गया था. यूरेनस ग्रह बृहस्पति और शनि की तरह एक गैस का विशालकाय ग्रह है और हाइड्रोजन, हीलियम और मीथेन से बना है.
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तीसरा सबसे बड़ा ग्रह, यूरेनस हर 84 पृथ्वी वर्षों में एक बार सूर्य की परिक्रमा करता है और यह एकमात्र ऐसा ग्रह है जो अपने सौर कक्षीय तल के लंबवत घूमता है. जनवरी 1986 में, मानवरहित अमेरिकी अंतरिक्ष यान वॉयजर-2 ने इस ग्रह का भ्रमण किया और पहले से ज्ञात पांच चंद्रमाओं के अलावा 10 अतिरिक्त चंद्रमाओं की खोज की. साथ ही इस गैस के विशालकाय ग्रह के चारों ओर धुंधले छल्लों की एक प्रणाली भी देखी.