इतिहास में एक बड़ा और अहम बदलाव देखने को मिला है, जिसने सदियों पुरानी परंपराओं को बदलने का काम किया है. इंग्लैंड के चर्च के 1400 साल लंबे इतिहास में पहली बार एक महिला को सबसे बड़े धार्मिक पद पर नियुक्त किया गया है. सारा मुल्लाली का कैंटरबरी की आर्कबिशप बनना सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि समाज में बदलती सोच और महिलाओं की बढ़ती भूमिका का प्रतीक है. यह घटना न केवल धार्मिक दुनिया में, बल्कि पूरे समाज में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है, जहां अब महिलाएं भी उन ऊंचाइयों तक पहुंच रही हैं, जिन्हें पहले केवल पुरुषों के लिए माना जाता था.
चर्च ऑफ इंग्लैंड क्या है?
Church of England ब्रिटेन का राजकीय चर्च है. इसका इतिहास बहुत पुराना है. 1500 के दशक में Henry VIII ने रोमन कैथोलिक चर्च से अलग होकर इसे स्थापित किया था. आज भी ब्रिटेन का राजा (इस समय Charles III) इसका सर्वोच्च प्रमुख माना जाता है. वहीं, कैंटरबरी का आर्कबिशप दुनिया भर के एंग्लिकन ईसाइयों का आध्यात्मिक नेता होता है.

सारा मुल्लाली कौन हैं?
सारा मुल्लाली का जीवन काफी प्रेरणादायक रहा है. वह शुरू से धार्मिक नेता नहीं थीं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में नर्स थी. उन्होंने कैंसर के मरीजों की देखभाल की. इसके बाद में एक बड़े अस्पताल में नर्सिंग डायरेक्टर बनीं. 37 साल की उम्र में वह इंग्लैंड की सबसे युवा चीफ नर्सिंग ऑफिसर बनीं. लेकिन इसके बावजूद उनके मन में हमेशा धर्म की ओर जाने की इच्छा थी. साल 2001 में उन्होंने पुजारी (priest) बनने का फैसला किया. 2004 में उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी. उन्होंने खुद कहा है कि यह उनके जीवन का सबसे बड़ा और सही फैसला था.

कैसे बनी इतिहास का हिस्सा?
धीरे-धीरे चर्च में काम करते हुए सारा मुल्लाली आगे बढ़ती गईं और अब वह इतनी बड़ी जिम्मेदारी तक पहुंच गईं. उनका आर्कबिशप बनना सिर्फ एक पद हासिल करना नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. इससे यह साबित होता है कि अब महिलाएं भी बड़े धार्मिक पदों पर पहुंच सकती हैं.
समारोह में कौन-कौन शामिल हुआ?
इस खास मौके पर करीब 2000 लोग मौजूद थे. इसमें कई बड़े नाम शामिल थे, जैसे- Prince William, Catherine, Princess of Wales Keir Starmer.

प्रिंस विलियम यहां अपने पिता राजा चार्ल्स III की तरफ से आए थे. इस दौरान कैथरीन (केट मिडलटन) ने एक बहुत सुंदर काले-सफेद रंग का ड्रेस पहना था, जिससे समारोह और भी खास और आकर्षक बन गया.

क्यों खास है यह घटना?
सारा मुल्लाली का आर्कबिशप बनना कई मायनों में महत्वपूर्ण है. यह महिलाओं के लिए बड़ी उपलब्धि है. अब महिलाएं भी धार्मिक नेतृत्व में आगे बढ़ सकती हैं. इससे समाज में बदलाव का संकेत देखने को मिल रहा है. यह दिखाता है कि पुरानी सोच बदल रही है.

नर्स से लेकर आर्कबिशप बनने तक का उनका सफर बहुत प्रेरणादायक है. सारा मुल्लाली की कहानी हमें यह सिखाती है कि अगर इंसान मेहनत करे और अपने दिल की सुने, तो वह किसी भी ऊंचाई तक पहुंच सकता है. 1400 साल पुरानी परंपरा को तोड़कर उन्होंने इतिहास रच दिया और यह साबित कर दिया कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. उनका यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गया है.