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जल रहा मिडिल ईस्ट... खार्ग से साउथ पार्स तक तेल-गैस के कुएं बने वॉर में 'प्राइम टारगेट'

मिडिल ईस्ट की जंग अब एनर्जी साइट्स की ओर बढ़ गई है. अब ईरान, इजरायल और अमेरिका एक दूसरे के देशों की एनर्जी साइट्स पर अटैक कर रहे हैं.

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मिडिल ईस्ट की जंग में अब तेलऔर गैस के भंडार को निशाना बनाया जा रहा है. (Photo-AP)
मिडिल ईस्ट की जंग में अब तेलऔर गैस के भंडार को निशाना बनाया जा रहा है. (Photo-AP)

मिडिल ईस्ट की जंग को 20  दिन हो गए हैं. मिलिट्री बेस और नेताओं पर अटैक के साथ शुरू हुई इस जंग में अब टारगेट एनर्जी फील्ड बन गए हैं. अब वॉर में तेल-गैस के कुएं 'प्राइम टारगेट' बन गए हैं. पहले ईरान के खर्ग द्वीप पर अटैक और अब साउथ पार्स गैस फील्ड पर बड़ा हमला बता रहा है कि अमेरिका और इजरायल ईरान को आर्थिक रूप से चौपट करने की ओर कदम रख चुके हैं. जवाबी कार्रवाई में अब ईरान भी एनर्जी साइट को निशाना बना रहा है. ऐसे में जानते हैं कि कैसे ये जंग अब एनर्जी साइट्स की ओर बढ़ गई है और अभी तक कितने एनर्जी फील्ड को निशाना बनाया गया है. 

ईरान की जंग में सबसे पहले पावर स्ट्रक्चर को फोकस किया गया और सीधे सैन्य ठिकानों और नेताओं का निशाना बनाया गया. इसके बाद जंग का दायरा समुद्र तक पहुंचा, जहां टॉरपीडो हमलों और जहाजों को उड़ाने जैसी घटनाओं से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रास्ते असुरक्षित बन गए. लेकिन, अब यह टकराव एक और खतरनाक मोड़ ले चुका है. जहां सीधे देशों की एनर्जी लाइफलाइन पर हमला हो रहा है. यानी जंग अब सिर्फ सैन्य ताकत की नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्च पर नुकसान पहुंचाने की हो रही है. हालांकि, इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. 

इजरायल के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले के बाद ईरान ने कतर के LNG गैस फैसिलिटी को निशाना बनाया. इससे पहले भी 7-8 मार्च की रात को इजरायल ने तेहरान के तेल डिपो पर एयरस्ट्राइक किया था. शहरान तेल डिपो और करज में भी बड़ी तबाही हुई थी. 

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खर्ग द्वीप (ईरान)- अमेरिका ने अटैक किया

इस जंग में खर्ग द्वीप पर हमले से ही एनर्जी फील्ड पर अटैक का सिलसिला तेज हुआ था.  दरअसल, शनिवार को ईरान की लाइफलाइन कहे जाने वाले खर्ग द्वीप पर अमेरिका ने हमला किया था. ये खर्ग द्वीप ईरान के तट से करीब 30 किलोमीटर दूर है और यहां से देश का लगभग 90% कच्चा तेल एक्सपोर्ट होता है. डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक करता है, तो इस द्वीप के ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जाएगा. 

साउथ पार्स गैस फील्ड (ईरान)- इजरायल ने अटैक किया

इसके बाद इजरायल की ओर से ईरान के सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाया गया. यह फील्ड कतर के नॉर्थ डोम के साथ मिलकर दुनिया का सबसे बड़ा गैस भंडार है. ईरान की करीब 70 फीसदी घरेलू गैस सप्लाई यहीं से आती है. हमले के बाद यहां आग लग गई, जिसकी पुष्टि ईरान के सरकारी टीवी ने की. इस हमले की आलोचना कतर और यूएई जैसे खाड़ी देशों ने की, क्योंकि उनके एनर्जी ठिकानों पर भी लगातार हमले हो रहे हैं.

लेकिन, यहां अटैक को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह हमला इजरायल ने किया और अमेरिका को इसके बारे में पता नहीं था. इसके साथ अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान कतर पर हमला करता है तो वो ईरान के साउथ पार्स को तबाह कर देगा. 

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रास लाफान (कतर)- ईरान ने निशाना बनाया

इजरायल के हमलों का जवाब देते हुए ईरान ने कतर के रास लाफान को निशाना बनाया. ये दुनिया  का सबसे बड़ा एलएनजी हब है, जो कतर में है. जंग शुरू होने के बाद से इस पर बार-बार ईरान की तरफ से हमले किए गए हैं. बताया जा रहा है कि ईरान को यहां काफी नुकसान हुआ है और कई प्लांट्स प्रभावित होने की खबर है. गुरुवार सुबह यहां कई जगहों पर बड़ी आग लगने की खबर आई. कतर दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडार को ईरान के साथ शेयर करता है. कतर एनर्जी की रिपोर्ट के अनुसार, कतर के हिस्से में ही दुनिया की करीब 10% गैस रिजर्व मौजूद है. बता दें कि कतर ने फ्रांस, भारत समेत की देशों की कंपनियों से एलएनजी समझौते किए हुए हैं. 

रुवैस रिफाइनरी (अबू धाबी)- ईरान ने हमला किया

ईरान ने जवाबी कार्रवाई में अबू धाबी में मौजूद रुवैस रिफाइनरी को निशाना बनाया है, जो दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सिंगल-साइट रिफाइनरी है. इस महीने की शुरुआत में ड्रोन हमले के बाद एहतियात के तौर पर यहां काम रोक दिया गया था. हालांकि यह साफ नहीं है कि रिफाइनरी को सीधा नुकसान हुआ या नहीं और इसका संचलान करने वाले ADNOC ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया. 

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रास तनुरा (सऊदी अरब)- ईरान का हमला किया

रास तनुरा रिफाइनरी सऊदी अरब में है. ये मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है. ये सऊदी अरब के लिए काफी अहम है.  इसकी क्षमता करीब 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन है. जंग के दौरान इस पर भी कई बार हमले हुए, जिसमें एक ड्रोन अटैक के बाद आग लगी और आंशिक रूप से काम बंद करना पड़ा. 

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