scorecardresearch
 

कोई भी केदारनाथ जाए, पहले रास्ते में लगे खंभों का सीक्रेट जरूर जान लीजिए

केदारनाथ यात्रा के दौरान रास्ते में दिखाई देने वाले नंबर वाले खंभे यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए हैं. किसी दुर्घटना, तबीयत खराब होने या रास्ता भटकने की स्थिति में यात्री खंभे का नंबर बताकर अपनी सटीक लोकेशन शेयर कर सकता है, जिससे रेस्क्यू टीम जल्दी मदद पहुंचा सके.

Advertisement
X
2013 की आपदा के बाद इस सिस्टम को और मजबूत बनाया गया था. ( Photo: ITG)
2013 की आपदा के बाद इस सिस्टम को और मजबूत बनाया गया था. ( Photo: ITG)

हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा केदारनाथ मंदिर के दर्शन के लिए केदारनाथ पहुंचते हैं. गौरीकुंड से केदारनाथ तक का पैदल रास्ता करीब 16 से 18 किलोमीटर लंबा है. इस पूरे रूट पर चलते समय आपको जगह-जगह बड़े-बड़े खंभे दिखाई देंगे. कई लोग इन्हें देखकर सोचते हैं कि शायद ये सिर्फ बिजली या नेटवर्क के लिए लगाए गए हैं, लेकिन इन खंभों का एक खास काम भी होता है, जो यात्रियों की सेफ्टी से जुड़ा है.

आखिर क्या है इन खंभों का काम?
दरअसल, केदारनाथ यात्रा मार्ग पर लगे इन खंभों पर नंबर लिखे होते हैं. ये नंबर सिर्फ पहचान के लिए नहीं होते, बल्कि इमरजेंसी के समय बहुत काम आते हैं. अगर किसी यात्री की तबीयत खराब हो जाए, कोई हादसा हो जाए या कोई व्यक्ति रास्ता भटक जाए, तो वह अपने पास वाले खंभे का नंबर हेल्पलाइन या रेस्क्यू टीम को बता सकता है. इससे टीम को उसकी एग्जैक्ट लोकेशन पता चल जाती है और मदद जल्दी पहुंचाई जा सकती है.

2013 की आपदा के बाद बढ़ी जरूरत
साल 2013 में केदारनाथ में आई भयानक बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद यात्रा रूट को ज्यादा सुरक्षित बनाने पर खास ध्यान दिया गया. इसी दौरान कई जगहों पर ऐसे नंबर वाले खंभे लगाए गए. इनका मकसद यह था कि किसी भी इमरजेंसी में लोगों की लोकेशन आसानी से ट्रैक की जा सके और रेस्क्यू ऑपरेशन में समय बर्बाद न हो.

Advertisement

खराब मौसम में बनते हैं सहारा
पहाड़ों में अक्सर मौसम अचानक बदल जाता है. कभी तेज बारिश शुरू हो जाती है तो कभी घना कोहरा छा जाता है. ऐसे में कई बार यात्रियों को समझ नहीं आता कि वे किस जगह पर हैं. मोबाइल नेटवर्क भी हर जगह सही तरीके से काम नहीं करता. ऐसी स्थिति में ये खंभे एक तरह के लोकेशन मार्कर का काम करते हैं. यात्री सिर्फ खंभे का नंबर बताकर अपनी जगह की जानकारी दे सकता है.

रेस्क्यू टीम को मिलती है सटीक लोकेशन
यात्रा मार्ग पर तैनात पुलिस, एसडीआरएफ और दूसरी रेस्क्यू एजेंसियां भी इन्हीं नंबरों की मदद से काम करती हैं. अगर किसी जगह से मदद की कॉल आती है और सामने वाला व्यक्ति खंभे का नंबर बता देता है, तो रेस्क्यू टीम सीधे उसी जगह पहुंचने की कोशिश करती है. इससे समय बचता है और जरूरतमंद लोगों को जल्दी सहायता मिल पाती है.

दूरी और दिशा की जानकारी भी देते हैं
कुछ खंभों पर दूरी और दिशा से जुड़ी जानकारी भी लिखी होती है. इससे यात्रियों को पता चलता रहता है कि केदारनाथ धाम अभी कितनी दूर है या वे किस पॉइंट पर मौजूद हैं. लंबी पैदल यात्रा के दौरान यह जानकारी काफी काम की साबित होती है. खासकर उन लोगों के लिए जो पहली बार केदारनाथ यात्रा पर जा रहे होते हैं.

Advertisement

यात्रा पर जाएं तो इन नंबरों पर जरूर रखें नजर
बहुत से लोग केदारनाथ जाते समय इन खंभों के पास से गुजर तो जाते हैं, लेकिन इनके असली काम के बारे में नहीं जानते. वास्तव में ये खंभे हजारों यात्रियों की सेफ्टी के लिए बनाए गए एक महत्वपूर्ण सिस्टम का हिस्सा हैं. यही वजह है कि प्रशासन समय-समय पर इनकी निगरानी और मेंटेनेंस भी करता है.

अगर आप भी भविष्य में केदारनाथ यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं, तो रास्ते में दिखने वाले इन खंभों के नंबर पर ध्यान जरूर दें. हो सकता है कि कभी जरूरत पड़ने पर यही छोटी-सी जानकारी आपके या किसी दूसरे यात्री के बहुत काम आ जाए. आस्था की इस कठिन यात्रा में ये खंभे चुपचाप यात्रियों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement