ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ मंदिर का खजाना खोला जा रहा है, जो इन दिनों चर्चा में है. करीब 48 बाद इस मंदिर का रत्न भंडार खोला जाएगा. इतने सालों में इस स्टोर में काफी सोना-चांदी और अलग-अलग तरह के रत्न जमा हो गए हैं. इससे पहले 13 मई 1978 में इस रत्न भंडार को खोला गया था.
उस वक्त भंडार में जमा सोनो-चांदी के आभूषणों और रत्नों की गिनती और जांच की गई थी. इस बार भी भंडार खुलने पर सभी जेवरों, सोने-चांदी की वस्तुएं, उन पर लगे महंगे रत्न और हीरे, पन्ने, मोतियों की गिनती होगी. साथ ही इसकी जांच भी की जाएगी. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इन रत्नों की जांच कौन करता है और कैसे पता चलता है कि कौन से रत्न असली हैं और कौन से नकली?
जयपुर के जाने-माने जेमोलॉजिस्ट तुषार सोनी ने इस बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जब ऐसे मंदिरों के रत्न भंडार खोले जाते हैं, तो वहां पर एक्सपर्ट और जेमोलोजिस्ट की एक टीम होती है. सभी एक्सपर्ट बाकायदा रत्नों की पहचान करने और उसे जांचने में विशेषज्ञता रखते हैं और उनके पास इसके सार्टिफिकेट होते हैं. ऐसे कोई भी आम आदमी रत्नों की पहचान नहीं कर सकता है.
मंदिर में बुलाई जाती है विशेषज्ञों की टीम
तुषार ने बताया कि एक बार वो खुद भी शिरडी साई मंदिर के रत्न भंडार में निकले मंहगे रत्नों की जांच के लिए विशेषज्ञ के तौर पर गए थे. उन्होंने बताया कि कोई भी रत्न असली है या नकली यह सिर्फ जेम्स टेस्टिंग लेबोरेट्री में जांच के बाद ही पता लगाया जा सकता है. जेमोलॉजी का कोर्स करने के बाद जिसके पास इस क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल हो जाती है, सिर्फ वही रत्नों की टेस्टिंग कर सकता है. ऐसे में जब कहीं बड़ी मात्रा में रत्नों की जांच की जाती है, तो वहां कई सारे एक्सपर्ट मौजूद होते हैं और उनके पास अलग-अलग रत्नों को जांचने के अलग-अलग उपकरण भी होते हैं.
तुषार ने बताया कि रत्नों को जांचने के बहुत से तरीके और उपकरण हैं, लेकिन कोई भी आम आदमी असली और नकली का फर्क नहीं कर सकता. रत्नों के असली और नकली का फर्क सिर्फ मान्यता प्राप्त सरकारी जेम लैब में ही हो सकता है. वहीं मौजूद विषेशज्ञ ही रत्नों की जांच कर उसके असली और नकली होने की पुष्टि कर सकते हैं. अब सवाल उठता है कि आखिर असली और नकली रत्न होते क्या हैं और इन्हें जांचने और परखने के तरीके और टूल्स क्या-क्या हैं.
प्राकृतिक रत्न
ये लाखों वर्षों में प्राकृतिक भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं द्वारा निर्मित होते हैं. इन्हें अक्सर धरती से निकाला जाता है और इनमें कुछ अपूर्णता या अशुद्धियां हो सकती हैं, जो इनकी प्रामाणिकता का संकेत देती हैं. प्राकृतिक रत्न दुर्लभ होते हैं और अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण अत्यधिक मूल्यवान होते हैं.
सिंथेटिक जेमस्टोन
इन्हें लैब में उन्नत तकनीक का इस्तेमाल करके प्राकृतिक रत्नों के रासायनिक, भौतिक और प्रकाशीय गुणों की नकल करके बनाया जाता है. हालांकि, ये प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते, कृत्रिम रत्न बनावट में असली रत्नों के समान होते हैं और पेशेवर उपकरणों के बिना इन्हें पहचानना मुश्किल हो सकता है.
नकली रत्न
कांच, प्लास्टिक या मिश्रित पदार्थों जैसी सस्ती सामग्रियों से बने ये रत्न प्राकृतिक रत्नों की तरह दिखने के लिए डिजाइन किए जाते हैं. इनमें असली रत्नों के रासायनिक और संरचनात्मक गुण नहीं होते, जिससे ये कम मूल्यवान और कम टिकाऊ होते हैं.
मेग्नीफाइंग लेंस से जांच- पत्थर की जांच करने के लिए मेग्नीफाइंग लेंस या लूप का इस्तेमाल किया जाता है. इससे प्राकृतिक रत्नों में अक्सर जो छोटी-छोटी खामियां या अशुद्धियां होती हैं, पकड़ में आ जाती हैं. वहीं कृत्रिम और नकली पत्थर देखने में दोषरहित और परफेक्ट लग सकते हैं.
वजन का आकलन - रत्न को अपने हाथ में पकड़ें. असली रत्न कांच या प्लास्टिक से बने नकली रत्नों की तुलना में अधिक भारी होते हैं.
चमक की जांच - असली पत्थरों में उनके रिफ्रेक्टिव इंडेक्स के कारण एक अनोखी चमक होती है. नकली पत्थरों की चमक में अक्सर गहराई की कमी होती है और वे फीके या अत्यधिक चमकदार दिखाई दे सकते हैं.
स्क्रेच टेस्ट - जब किसी असली रत्न को खंरोचा जाता है तो उस पर आसानी से स्क्रेच नहीं बनता. वहीं कांच या नकली रत्नों की सतह पर साधारण खरोंच भी आसानी से दिख जाते हैं. इस टेस्ट से रत्न की कठोरता का पता चलता है. उदाहरण के लिए, एक हीरा कांच को आसानी से खरोंच देगा, जबकि नरम नकली हीरे ऐसा नहीं कर पाएंगे.
टेम्प्रेचर टेस्ट - असली रत्न छूने पर ठंडे लगते हैं और हाथ में रखने पर धीरे-धीरे गर्म होते हैं. कांच और प्लास्टिक से बने नकली रत्न जल्दी गर्म हो जाते हैं.
यूवी लाइट टेस्ट - हीरे जैसे कुछ रत्न अल्ट्रा वायलेट रेज में चमकते हैं. यह प्रतिक्रिया असली और नकली रत्नों में अंतर करने में काफी सहायक हो सकती है, हालांकि यह पूरी तरह से सटीक नहीं है.
मैग्नीफाइंग ग्लास या ज्वैलर का लूप - 10 गुना मैग्निफिकेशन लूप खामियों और सतह की बारीकियों को पहचानने में मदद करता है, जिससे यह पता चल सकता है कि कोई रत्न प्राकृतिक है या नकली?
रिफ्रेक्टोमीटर - यह रत्न के रिफ्रेक्टिव इंडेक्स को मापता है, जो प्रत्येक प्रकार के रत्न के लिए अलग-अलग होता है. यह असली और कृत्रिम रत्नों में अंतर करने में सहायक होता है.
हार्डनेस टेस्ट किट - इसमें मोह्स स्केल पर रत्न की कठोरता का परीक्षण करने के लिए उपकरण होते हैं, जो इसकी पहचान सत्यापित करने और नकली रत्नों को खारिज करने में मदद करते हैं.
यूवी लाइट - एक यूवी लाइट रत्न के असली प्रकाश को उजागर करता है. यह एक ऐसा गुण जो कुछ असली रत्नों, जैसे हीरे में पाया जाता है, लेकिन अधिकांश नकली रत्नों में नहीं होता है.
जेम्सस्टोन आइडेंटिफिकेशन चार्ट - यह एक रेफरेंस गाइड है, जो विभिन्न रत्नों के लिए रिफ्रेक्टिव इंडिक्स, स्पेसिफिक ग्रेविटी और सामान्य अशुद्धियों जैसी प्रमुख विशेषताओं की जानकारी प्रदान करती है.
डिजिटल स्केल - यह रत्न के वजन को मापता है, जिससे घनत्व वाले असली रत्नों और प्लास्टिक या कांच से बने हल्के नकली रत्नों के बीच अंतर करने में मदद मिल सकती है.
पोलराइजिंग फिल्टर - इसका इस्तेमाल रत्न के ऑप्टिकल प्रोपर्टीज का विश्लेषण करने के लिए किया जाता है, जो कुछ प्राकृतिक रत्नों की अनूठी विशेषता है.
माइक्रोस्कोप - यह रत्न की आंतरिक विशेषताओं का विस्तृत दृश्य प्रदान करता है, जिससे उसमें मौजूद चीजों या प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले संरचनात्मक पैटर्न की पहचान करने में मदद मिलती है.
स्पेक्ट्रोस्कोप - यह विश्लेषण करता है कि कोई रत्न प्रकाश को कैसे अवशोषित करता है, जिससे एक स्पेक्ट्रम उत्पन्न होता है जो उसकी पहचान की पुष्टि करने में मदद कर सकता है.
थर्मल कंडक्टिविटी टेस्टर - इसका उपयोग हीरे जैसे रत्नों की ऊष्मा चालकता का परीक्षण करने के लिए
रत्न पहचान के लिए हमेशा पेशेवर की मदद लें
प्रमाणित रत्नविज्ञानी, जिसने इस विषय में विशेषज्ञता प्राप्त की हो और जो उन्नत उपकरणों और तकनीकों का उपयोग करके रत्नों की सटीक पहचान करने के लिए प्रशिक्षित हों. वही असली और नकली रत्नों में अंतर स्पष्ट कर सकते हैं.