आज मिडिल ईस्ट युद्ध की आग में झुलस रहा है. इसका असर समुद्र पर भी दिखाई दे रहा है. एक तरफ दुनिया का एक प्रमुख वाणिज्यिक समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद हो चुका है, जहां से पूरी दुनिया का 40 प्रतिशत तेल प्रवाह गुजरता है. वहीं दूसरी तरफ श्रीलंका के पास एक ईरानी युद्धपोत को अमेरिकी टॉरपीडो ने निशाना बनाया है. इस घटना ने भारत से जुड़ी एक ऐसी कहानी की याद ताजा कर दी है, जिसने समंदर में पाकिस्तान का घमंड चूर-चूर कर दिया था.
1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान सिर्फ जमीन पर लड़ाई नहीं लड़ी गई थी. भारतीय सेना के साथ इंडियन नेवी ने भी पाकिस्तानी के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई की थी. इसी दौरान भारत ने पाकिस्तान के पीएनएस गाजी नाम के पनडुब्बी को डुबाकर उसे इस युद्ध का सबसे तगड़ा झटका दिया था.
जब शिकारी खुद शिकार बन गया
अमेरिका से लीज पर ली गई गाजी पनडुब्बी पाकिस्तान की इकलौती लंबी दूरी की हमलावर पनडुब्बी थी. इसे भारत के विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का शिकार करके उसे नष्ट करने का काम सौंपा गया था. फिर इंडियन नेवी ने ऐसा कारनामा किया कि शिकारी खुद शिकार बन गया. क्योंकि, भारत की नौसैनिक जीतों में एक पीएनएस गाजी की तबाही में आईएनएस राजपूत ने गजब की भूमिका निभाई और पाकिस्तान की दुर्जेय पनडुब्बी पीएनएस गाजी को डुबो दिया. इस घटना में पाकिस्तान ने 10 नौसेना अधिकारियों सहित 93 कर्मियों को खो दिया. यह नौसैनिक कार्रवाई 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में निर्णायक साबित हुई थी.
1971 के युद्ध की सबसे ऐतिहासिक नौसैनिक विजयों में से एक पाकिस्तान की सबसे खतरनाक सबमरीन (पनडुब्बी) पीएनएस गाजी को डुबोना था. पाकिस्तान ने इसे अमेरिका से लीज पर लिया था. गाजी पनडुब्बी पाकिस्तान की एकमात्र लंबी दूरी की हमलावर पनडुब्बी थी. इसे विशाखापत्तनम में तैनात भारत के विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का पता लगाकर उसे नष्ट करने का कार्य सौंपा गया था.
आईएनएस विक्रांत था पाकिस्तानी पनडुब्बी का लक्ष्य
उस समय भारत का एकमात्र विमानवाहक पोत, आईएनएस विक्रांत देश को समुद्र में एक तैरती हुई हवाई पट्टी की सुविधा मुहैया करता था. 14 नवंबर, 1971 को, पीएनएस गाजी कराची से रवाना हुई और अपने लक्ष्य तक 4,800 किलोमीटर की गुप्त यात्रा पर निकल पड़ी. जब भारतीय नौसेना इस मिशन की जानकारी मिली तो इसका मुकाबला करने के लिए एक योजना तैयार की थी.
इंडियन नेवी ने दूसरे विश्वयुद्ध के विध्वंसक पोत आईएनएस राजपूत को एक छलावे के रूप में इस्तेमाल कर पीएनएस गाजी का इसकी तरफ ध्यान मोड़ने की योजना बनाई. आईएनएस राजपूत ने पीएनएस गाजी का सफलतापूर्वक पीछा किया और उसे एक जाल में फंसा लिया.
दूसरे विश्वयुद्ध के विध्वंसक आईएनएस राजपूत ने किया शिकार
आईएनएस राजपूत पर नकली संचार उपकरण लगाए गए थे. इसके मैसेज इंटरसेप्ट होने पर पाकिस्तानी पनडुब्बी को ऐसा प्रतीत होता था कि यह आईएनएस विक्रांत है. इस चाल के चलते, पीएनएस गाजी को धीरे-धीरे यह यकीन हो गया कि आईएनएस विक्रांत आसपास ही मौजूद है. जबकि, भारतीय युद्धपोत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास एक सुरक्षित स्थान पर तैनात था.
पाकिस्तानी नेवी ने पीएनएस गाजी को लक्ष्य की पुष्टि करते हुए बताया कि आईएनएस विक्रांत बंदरगाह पर खड़ा है. फिर आईएनएस राजपूत और उसके सिग्नल पीएनएस गाजी से भिड़े, तो आईएनएस राजपूत ने पीएनएस गाजी पर दो डेप्थ चार्ज दागे. कुछ ही क्षणों बाद, पानी के भीतर कई शक्तिशाली विस्फोट हुए, जिससे पाकिस्तानी पनडुब्बी के नष्ट होने का संकेत मिला, जिसमें सवार 93 लोग भी मारे गए.
3-4 दिसंबर, 1971 को, विशाखापत्तनम के तट पर, गाजी नाम की पनडुब्बी का अंत हो गया, पाकिस्तानी कमान ने कई दिनों तक जवाब का इंतजार किया था. पीएनएस गाजी के डूबने के कारण पर 50 से अधिक वर्षों बाद भारतीय नौसेना के डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल (डीएसआरवी) ने फरवरी 2024 में विशाखापत्तनम के तट पर इसके मलबे का पता लगाया.