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देश में आधे से ज्यादा PNG कनेक्शन गुजरात और महाराष्ट्र में, टॉप-10 में बिहार-आंध्र सबसे नीचे, देखें आंकड़े

ईरान-अमेरिका युद्ध का असर घरेलू गैस पर भी पड़ा है. घरेलू गैस का संकट न हो इसके लिए सरकार ने ज्यादा से ज्यादा PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया है. वहीं LPG के इस्तेमाल को कम करने की बात कही है. ऐसे में जानते हैं कि देश में पीएनजी का इस्तेमाल अभी कहां-कहां हो रहा है और इसका स्टेटस क्या है?

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देशभर में महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा है PNG कवरेज (Photo - Reuters)
देशभर में महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा है PNG कवरेज (Photo - Reuters)

मिडिल ईस्ट में युद्ध के बाद घरेलू गैस को लेकर संकट गहरा जाने के बाद सरकार ने LPG पर लोगों की निर्भरता को कमकर इसे PNG पर शिफ्ट करने का प्रयास कर रही है. क्योंकि, पीएनजी सस्ता है और लंबे समय तक इसकी आपूर्ति की जा सकती है, क्योंकि इसमें परिवहन के झंझट और जोखिम कम होते हैं. बाहर से आने वाले LNG को भी सीधे रीगैसिफाई करके लोगों के रसोई तक अविलंब पहुंचाया जा सकता है. इसलिए देश में अब पाइप लाइन इंफ्रा को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. 

इन सब के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि अभी पीएनजी का स्टेटस किया है. यह देश के कितने घरों को कवर करता है और इसका नेटवर्क कहां तक फैला हुआ है. तभी यह तय किया जा सकता है कि हर घर तक PNG कैसे पहुंचाया जा सकेगा.  

किस राज्य में है सबसे ज्यादा पीएनजी कनेक्शन
पश्चिमी और उत्तरी राज्य भारत में पीएनजी गैस कनेक्शन सबसे ज्यादा है. इसमें भी महाराष्ट्र और गुजरात में सबसे ज्यादा पीएनजी इस्तेमाल होता है.  अकेले महाराष्ट्र में देश में सबसे ज्यादा 1.6 करोड़ कनेक्शन के साथ टोटल के 26 प्रतिशत उपभोक्ता यहीं हैं. महाराष्ट्र में 43.4 प्रतिशत कनेक्शन पीएनजी के हैं.

महाराष्ट्र और गुजरात के बाद सबसे ज्यादा पीएनजी का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीआर में होता है. उत्तर प्रदेश में इस्तेमाल होने वाले घरेलू गैस में 21 प्रतिशत हिस्सा पीएनजी का है. वहीं दिल्ली-एनसीआर में 18 प्रतिशत लोगों के पास पीएनजी कनेक्शन है.

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देश में आंध्र प्रदेश और बिहार में सबसे कम पीएनजी कनेक्शन हैं. इन दोनों जगहों पर सिर्फ 2.9 और 2.7 प्रतिशत लोगों के पास पीएनजी कनेक्शन हैं. वहीं मध्य प्रदेश में 3.2, राजस्थान में 4.7, हरियाणा में 5.6 और कर्नाटक में भी 5.6 प्रतिशत लोगों के पास ही PNG कनेक्शन हैं.

देश में तेल और गैस का घरेलू उत्पादन इतनी तेज़ी से नहीं बढ़ा कि वह इस मांग को पूरा कर सके, जिससे आयात पर निर्भरता बढ़ गई. इसलिए भारत ने और ज़्यादा पाइपलाइनें और मिडस्ट्रीम सुविधाएं बनाने में निवेश करना भी जारी रखा है, जो ऊर्जा को आसानी से लोगों तक पहुंचाने के लिए जरूरी हैं. इसके लिए तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किए जा रहे हैं और मेट्रो सिटीज और टायर टू शहरों में भी पीएनजी पाइप लाइन बिछाने पर जोर दिया जा रहा है.

जरूरत का सिर्फ आधे प्राकृतिक गैस का होता है उत्पादन 
प्राकृतिक गैस को एक महत्वपूर्ण ट्रांज़िशन ईंधन के रूप में देखा जाता रहा है, क्योंकि भारत अपने एनर्जी मिक्स को ज़्यादा साफ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने का लक्ष्य रखता है.  भारत में पिछले वित्तीय वर्ष में घरेलू प्राकृतिक गैस का उत्पादन 36 BCM (बिलियन क्यूबिक मीटर) रहा. ONGC और OIL ने घरेलू गैस का लगभग 60.8% उत्पादन किया. इसमें निजी ऑपरेटरों भी शामिल हैं, इन्होंने 39.2% का योगदान दिया है. कुल प्राकृतिक गैस की खपत 71 BCM तक है.  इसमें कुल जरूरत का लगभग आधा (50.1%) हिस्सा आयात से पूरा होता है. ऐसे में आयातित LNG पर यह भारी निर्भरता, घरेलू आपूर्ति और मांग के बीच के अंतर को दर्शाती है.

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भारत में LNG का आयात ज्यादा बढ़ने के पीछे इसकी किफायती कीमतें और देश में रीगैसिफिकेशन टर्मिनलों की संख्या में बढ़ोतरी मुख्य वजहे हैं. ये टर्मिनल बाहर से आने वाले LNG को वापस गैस में बदलती हैं और इसका इस्तेमाल पीएनजी, सीएनजी और अन्य इंडस्ट्रियल यूज में होता है. 

देश में कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और गैस की सप्लाई चेन को बनाए रखने में पाइपलाइनें अहम भूमिका निभाती हैं. वित्त वर्ष 2024-25 में कच्चे तेल की पाइपलाइनें 10,442 km तक फैली थीं, उत्पादों की पाइपलाइनें 23,391 km तक और प्राकृतिक गैस पाइपलाइन नेटवर्क 23,552 km तक पहुंच गया.

यह भी पढ़ें: LPG से मुक्ति, अब हर घर पहुंचेगी PNG, जानें सरकार का A To Z प्लान

ये नेटवर्क पूरे देश में ऊर्जा के सुरक्षित, भरोसेमंद और किफायती परिवहन के लिए जरूरी हैं. गैस पाइपलाइन का बढ़ता नेटवर्क खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत पूरी तरह से आपस में जुड़े एक राष्ट्रीय गैस ग्रिड को बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इससे आपूर्ति बेहतर होगी, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और अलग-अलग क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता आसान हो जाएगी.

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