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Amazing Facts: बिजली के तारों पर रंग बिरंगी गेंद क्यों लगी होती हैं?

अगर आपने कभी बिजली के बड़े तारों पर लाल, नारंगी या सफेद रंग की गेंदे देखी हैं, तो क्या आपने सोचा है कि इन्हें क्यों लगाया जाता है? जानिए Aerial Marker Ball का असली काम.

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भारत में भी कई जगहों पर इन रंगीन गेंदो का इस्तेमाल किया जाता है. ( Photo: ITG)
भारत में भी कई जगहों पर इन रंगीन गेंदो का इस्तेमाल किया जाता है. ( Photo: ITG)

अगर आपने कभी हाईवे, खेतों, बड़ी नदियों या पहाड़ी इलाकों के ऊपर से गुजरने वाले बिजली के बड़े-बड़े तारों को ध्यान से देखा होगा, तो उन पर लाल, नारंगी, सफेद या पीले रंग की बड़ी-बड़ी गेंदे जरूर नजर आई होंगी. इन्हें देखकर कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर ये गेंदे क्यों लगाई जाती हैं? कुछ लोग इन्हें सजावट समझते हैं, तो कुछ को लगता है कि इनका संबंध बिजली से होगा.

लेकिन सच यह है कि इन रंगीन गेंदो का बिजली के फ्लो से कोई लेना-देना नहीं होता. इन्हें लोगों और फ्लाइट की सुरक्षा के लिए लगाया जाता है. ये छोटी-सी दिखने वाली गेंदें कई बड़े हादसों को टालने में अहम भूमिका निभाती हैं.

क्या होती हैं ये रंगीन गेंदे?
बिजली के तारों पर लगी इन गेंदो को एरियल मार्कर बॉल (Aerial Marker Ball) या एविएशन वॉर्निंग बॉल (Aviation Warning Ball) कहा जाता है. इन्हें खासतौर पर उन हाई-वोल्टेज बिजली के तारों पर लगाया जाता है, जो जमीन से काफी ऊंचाई पर होते हैं और दूर से आसानी से दिखाई नहीं देते. इन गेंदो का साइज आमतौर पर 50 से 90 सेंटीमीटर तक होता है. इन्हें लाल, नारंगी, सफेद या पीले जैसे चमकीले रंगों में बनाया जाता है, ताकि ये दिन के समय दूर से भी आसानी से दिखाई दें.

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इन्हें लगाने की जरूरत क्यों पड़ती है?
हाई-वोल्टेज बिजली के तार काफी पतले होते हैं. जमीन पर खड़े व्यक्ति को तो ये दिख जाते हैं, लेकिन हवा में उड़ रहे विमान, हेलीकॉप्टर या एयर एम्बुलेंस के पायलट को कई बार ये आसानी से नजर नहीं आते. खासकर जब मौसम धुंधला हो या आसपास पहाड़, नदी या खुला मैदान हो.

अगर समय रहते पायलट को बिजली के तार दिखाई न दें, तो फ्लाइट के उनसे टकराने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे हादसे बेहद गंभीर साबित हो सकते हैं. यही वजह है कि बिजली के तारों पर ये बड़ी-बड़ी रंगीन गेंदे लगाई जाती हैं, ताकि पायलट दूर से ही समझ जाए कि आगे बिजली की लाइन है और वह अपनी उड़ान को सुरक्षित दिशा या ऊंचाई पर ले जा सके.

इन रंगीन गेंदों का काम केवल हादसों को रोकना ही नहीं है, बल्कि फ्लाइट और हेलीकॉप्टर की सुरक्षित और आसान उड़ान में भी मदद करना है. जब कोई फ्लाइट, हेलीकॉप्टर या एयर एम्बुलेंस कम ऊंचाई पर उड़ान भरती है, तब ये गेंदें दूर से ही साफ दिखाई देती हैं. इससे पायलट को रास्ते में मौजूद बिजली के तारों का पहले से अंदाजा हो जाता है और वह सुरक्षित तरीके से उड़ान जारी रख सकता है.

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यानी ये गेंदे पायलट के लिए एक तरह का विजुअल सिग्नल होती हैं. इसी वजह से इन्हें फ्लाइट की सुविधा, सुरक्षित नेविगेशन और विमानन सुरक्षा के लिए लगाया जाता है.

किन जगहों पर सबसे ज्यादा दिखाई देती हैं?
आपने शायद ध्यान दिया होगा कि ये गेंदे हर बिजली के तार पर नहीं लगी होती. इन्हें केवल उन स्थानों पर लगाया जाता है, जहां विमान या हेलीकॉप्टर के आने-जाने की संभावना अधिक होती है. जैसे- बड़ी नदियों और झीलों के ऊपर, पहाड़ी और घाटी वाले इलाकों में, एयरपोर्ट के आसपास, बड़े हाईवे या एक्सप्रेसवे के पास, जंगलों और खुले मैदानों में, जहां हेलीकॉप्टर अक्सर उड़ान भरते हैं. इन जगहों पर बिजली के तारों को दूर से देख पाना मुश्किल होता है, इसलिए रंगीन गेंदे लगाना जरूरी माना जाता है.

क्या इनका बिजली से कोई संबंध होता है?
बहुत से लोग सोचते हैं कि ये गेंदे बिजली गिरने से बचाने के लिए लगाई जाती हैं या इनमें कोई विशेष मशीन लगी होती है. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. इनका बिजली के फ्लो, वोल्टेज या बिजली की सप्लाई से कोई संबंध नहीं होता. इनका एकमात्र काम बिजली के तारों को दूर से आसानी से दिखाई देने लायक बनाना है.

इन गेंदो को कैसे लगाया जाता है?
इन गेंदो को मजबूत लेकिन हल्के मटेरियल से बनाया जाता है, ताकि तेज धूप, बारिश, हवा और खराब मौसम का उन पर ज्यादा असर न पड़े. इन्हें दो हिस्सों में तैयार किया जाता है और फिर बिजली के तार के चारों तरफ मजबूती से फिट कर दिया जाता है. यह काम खास टेक्निक और ट्रेंड लोगों की मदद से किया जाता है, ताकि बिजली की सप्लाई बाधित न हो.

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क्या भारत में भी इनका इस्तेमाल होता है?
भारत में भी कई जगहों पर इन रंगीन गेंदो का इस्तेमाल किया जाता है. खासकर एयरपोर्ट के आसपास, बड़ी नदियों, पहाड़ी इलाकों और उन स्थानों पर, जहां हेलीकॉप्टर या छोटे विमान नियमित रूप से उड़ान भरते हैं. सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के लगभग सभी देशों में विमानन सुरक्षा के लिए ऐसे मार्कर लगाए जाते हैं. इंटरनेशनल एविएशन सेफ्टी स्टैंडर्ड के तहत कई जगह इनका उपयोग अनिवार्य भी माना जाता है.

बिजली के तारों पर लगी रंगीन गेंदे देखने में भले ही साधारण लगती हों, लेकिन इनका काम बेहद महत्वपूर्ण होता है. ये एरोप्लेन, हेलीकॉप्टर और एयर एम्बुलेंस के पायलटों को दूर से ही बिजली के तारों का संकेत देती हैं. इससे फ्लाइट सुरक्षित रहती है, पायलट को रास्ता पहचानने में आसानी होती है और दुर्घटनाओं का खतरा काफी कम हो जाता है.

इसलिए अगली बार जब आपको बिजली के तारों पर लाल, नारंगी या सफेद रंग की बड़ी-बड़ी गेंदे दिखाई दें, तो समझ जाइए कि ये सिर्फ गेंदे नहीं, बल्कि आसमान में उड़ने वाले विमानों की सुरक्षा और आसान उड़ान सुनिश्चित करने वाला एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण हैं.

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