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कंफर्म टिकट थी, TTE ने इस वजह से नहीं दी सीट! अब कोर्ट ने लगाया जुर्माना

मामले की शिकायत जब उपभोक्ता आयोग तक पहुंची, तो आयोग ने माना कि रेलवे यात्रियों को सही सुविधा देने में असफल रहा. इसके बाद भारतीय रेलवे पर जुर्माना लगाया गया और यात्री को मुआवजा देने का आदेश दिया गया. अब यह फैसला यात्रियों के अधिकारों को लेकर काफी चर्चा में है.

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बिहार के भोजपुर में एक यात्री को कन्फर्म टिकट होने के बावजूद ट्रेन में सीट नहीं मिली. ( Photo: ITG)
बिहार के भोजपुर में एक यात्री को कन्फर्म टिकट होने के बावजूद ट्रेन में सीट नहीं मिली. ( Photo: ITG)

भारत में हर दिन करोड़ों लोग ट्रेन से सफर करते हैं. ज्यादातर यात्री पहले से टिकट बुक कराते हैं ताकि यात्रा आरामदायक हो सके और उन्हें सीट की परेशानी न झेलनी पड़े. खासकर जब किसी यात्री के पास कन्फर्म टिकट हो, तो उसे भरोसा रहता है कि ट्रेन में उसकी सीट सुरक्षित होगी. लेकिन बिहार के भोजपुर जिले से सामने आया एक मामला रेलवे की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. यहां एक यात्री और उसके दोस्तों को कन्फर्म टिकट होने के बावजूद सीट नहीं मिली और उन्हें पूरा सफर खड़े होकर करना पड़ा. आखिरकार मामला कंज्यूमर कोर्ट पहुंचा, जहां चार साल बाद यात्रियों को न्याय मिला.

यह मामला भोजपुर जिले के रहने वाले रविशंकर पांडेय और उनके तीन साथियों से जुड़ा है. घटना 2 अक्टूबर 2022 की बताई जा रही है. चारों दोस्त विंध्याचल से आरा आने के लिए एलटीटी-पटना एक्सप्रेस ट्रेन में सफर कर रहे थे. उन्होंने ट्रेन के थर्ड एसी कोच बी-4 में चार कन्फर्म टिकट बुक कराए थे. टिकट बुकिंग के लिए उन्होंने करीब 1,876 रुपये ऑनलाइन भुगतान भी किया था. यात्रियों को उम्मीद थी कि यात्रा आराम से पूरी हो जाएगी, लेकिन ट्रेन में चढ़ते ही उनके साथ कुछ ऐसा हुआ जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी.

विंध्याचल से आरा आ रहे थे यात्री
जब चारों यात्री अपने कोच में पहुंचे तो देखा कि उनकी सीटों पर पहले से कुछ लोग बैठे हुए हैं. रविशंकर पांडेय और उनके दोस्तों ने उनसे सीट खाली करने को कहा. लेकिन आरोप है कि उन लोगों ने खुद को रेलवे कर्मचारी बताया और सीट छोड़ने से साफ इनकार कर दिया. इतना ही नहीं, यात्रियों के साथ बदतमीजी भी की गई. इसके बाद यात्रियों ने टीटीई और दूसरे रेलवे अधिकारियों से मदद मांगी. उन्हें भरोसा था कि कन्फर्म टिकट होने की वजह से रेलवे अधिकारी तुरंत कार्रवाई करेंगे और उनकी सीट वापस दिलाएंगे. लेकिन काफी देर तक शिकायत करने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला. हालत ऐसी हो गई कि चारों यात्रियों को मजबूरी में पूरा सफर खड़े होकर करना पड़ा. एसी कोच का टिकट होने के बावजूद उन्हें यात्रा के दौरान भारी परेशानी झेलनी पड़ी.

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टीटीई और रेलवे अधिकारियों से भी नहीं मिली मदद
यात्रा खत्म होने के बाद भी मामला यहीं नहीं रुका. रविशंकर पांडेय और उनके साथियों ने रेलवे सेवा और रेल मंत्रालय के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज कराई. लेकिन वहां से भी उन्हें कोई खास मदद नहीं मिली. जब लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, तो आखिरकार उन्होंने उपभोक्ता आयोग यानी कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मामले की सुनवाई बिहार के भोजपुर जिला उपभोक्ता आयोग में हुई. आयोग ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद माना कि रेलवे यात्रियों को सही सुविधा देने में असफल रहा है. आयोग ने साफ कहा कि अगर किसी यात्री को कन्फर्म टिकट दिया गया है, तो उसे सीट उपलब्ध कराना रेलवे की जिम्मेदारी है. अगर सीट नहीं मिलती, तो इसे रेलवे की सेवा में कमी माना जाएगा.

रेलवे को देना होगा मुआवजा
उपभोक्ता आयोग ने उत्तर मध्य रेलवे और रेलवे बोर्ड को इस मामले में जिम्मेदार ठहराया. कोर्ट ने आदेश दिया कि यात्रियों को टिकट के पूरे 1,876 रुपये 8 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ वापस किए जाएं. इसके अलावा मानसिक परेशानी और शारीरिक दिक्कत के लिए 20 हजार रुपये मुआवजा और 15 हजार रुपये मुकदमे का खर्च देने का भी आदेश दिया गया. यह मामला अब सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में है. लोग इसे यात्रियों के अधिकारों से जुड़ा बड़ा फैसला बता रहे हैं. कई यूजर्स का कहना है कि अगर किसी यात्री के पास कन्फर्म टिकट है, तो उसे उसकी सीट जरूर मिलनी चाहिए. वहीं कुछ लोगों ने रेलवे व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यात्रियों की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई होनी चाहिए.

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यात्रियों के लिए बड़ा संदेश
यह मामला उन लोगों के लिए भी एक बड़ा मैसेज है जो यात्रा के दौरान परेशानियां झेलते हैं लेकिन शिकायत नहीं करते. अगर किसी यात्री के साथ गलत होता है, तो वह अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा सकता है. जरूरत पड़ने पर रेलवे हेल्पलाइन, रेल मंत्रालय और कंज्यूमर कोर्ट की मदद ली जा सकती है.

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