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क्या आपने सोचा है? अमेरिका के घरों में भारत जैसी छतें क्यों नहीं होतीं

अमेरिका में ज्यादातर घरों की छतें ढलानदार होती हैं, जबकि भारत में फ्लैट छत फ्लैट होती हैं. इसके पीछे मुख्य कारण अमेरिका का मौसम, भारी बर्फबारी और तेज बारिश है. ढलानदार छतों से बर्फ और पानी आसानी से नीचे गिर जाते हैं, जिससे घर सुरक्षित रहता है.

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अमेरिका में फ्लैट रूफ की तुलना में स्लोप रूफ ज्यादा लोकप्रिय हैं. ( Photo: Pexels)
अमेरिका में फ्लैट रूफ की तुलना में स्लोप रूफ ज्यादा लोकप्रिय हैं. ( Photo: Pexels)

 

जब भारतीय लोग अमेरिका के घरों की तस्वीरें या वीडियो देखते हैं, तो उनके मन में अक्सर एक सवाल आता है कि वहां ज्यादातर घरों की छतें भारत की तरह फ्लैट क्यों नहीं होतीं. अमेरिका में अधिकतर घरों पर ढलानदार छत यानी स्लोप रूफ दिखाई देती है. यह सिर्फ डिजाइन या सुंदरता के लिए नहीं होता, बल्कि इसके पीछे मौसम, निर्माण सामग्री और लोगों की जरूरतों से जुड़े कई कारण हैं.

सबसे बड़ी वजह वहां का मौसम है. अमेरिका के कई राज्यों में साल के कई महीनों तक भारी बर्फबारी होती है. इसके अलावा कई इलाकों में तेज बारिश भी होती है. अगर घर की छत सपाट हो, तो उस पर बर्फ और बारिश का पानी जमा होने लगता है. इससे छत पर बहुत ज्यादा वजन पड़ सकता है, जिससे नुकसान होने या छत कमजोर पड़ने का खतरा बढ़ जाता है. ढलानदार छत होने पर बर्फ और पानी अपने आप नीचे फिसल जाते हैं. इससे छत पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ता और घर ज्यादा सुरक्षित रहता है.

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दूसरा कारण निर्माण सामग्री है. भारत में ज्यादातर मकान ईंट, सीमेंट और कंक्रीट से बनाए जाते हैं. इन पर फ्लैट छत बनाना आसान होता है. वहीं अमेरिका में बड़ी संख्या में घर लकड़ी से बनाए जाते हैं. लकड़ी के घर हल्के होते हैं और उनमें फ्लैट छत बनाना ज्यादा आसान और किफायती माना जाता है. कंक्रीट की छत बनाने में अधिक समय और पैसा लगता है, इसलिए वहां स्लोप रूफ का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है.

मौसम है सबसे बड़ी वजह
अमेरिका के कई इलाकों में तेज हवाएं, बर्फीले तूफान और खराब मौसम आम बात हैं. ऐसे हालात में ढलानदार छतें ज्यादा मजबूत और टिकाऊ मानी जाती हैं. इनका आकार ऐसा होता है कि तेज हवा का दबाव कम पड़ता है और बारिश या बर्फ का असर भी कम होता है. यही वजह है कि वहां के घरों का डिजाइन मौसम को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है.

फ्लैट छत का एक और फायदा यह है कि इसके नीचे अतिरिक्त जगह बन जाती है, जिसे अटारी (Attic) कहा जाता है. लोग इस जगह का इस्तेमाल सामान रखने के लिए करते हैं. इसके अलावा यह घर को प्राकृतिक इंसुलेशन भी देती है. सर्दियों में अटारी घर की गर्मी को बाहर निकलने से रोकती है, जबकि गर्मियों में घर के अंदर का तापमान संतुलित रखने में मदद करती है. इससे ऊर्जा की बचत भी होती है.

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भारत और अमेरिका की जीवनशैली में भी काफी अंतर है. भारत में लोग अक्सर घर की छत का उपयोग कई कामों के लिए करते हैं. छत पर कपड़े सुखाए जाते हैं, पानी की टंकियां रखी जाती हैं, कई लोग गर्मियों में छत पर सोते हैं और त्योहारों के दौरान भी छत का इस्तेमाल होता है. वहीं अमेरिका में लोग आमतौर पर छत पर नहीं जाते. वहां ज्यादातर गतिविधियां घर के अंदर या घर के पीछे बने बैकयार्ड में होती हैं. इसलिए फ्लैट छत की जरूरत उतनी महसूस नहीं होती.

क्या अमेरिका में फ्लैट छत वाले घर नहीं होते?
हालांकि अमेरिका में कुछ आधुनिक इमारतों और व्यावसायिक भवनों में फ्लैट रूफ भी देखने को मिलती हैं, लेकिन सामान्य रिहायशी घरों में ढलानदार छतें ही ज्यादा लोकप्रिय हैं. यह डिजाइन वहां के मौसम और जीवनशैली के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है. कुल मिलाकर, अमेरिका के घरों में ढलानदार छतें सिर्फ दिखावे के लिए नहीं बनाई जातीं. भारी बर्फबारी, तेज बारिश, लकड़ी से होने वाला निर्माण, ऊर्जा की बचत और अलग जीवनशैली जैसे कई कारणों से वहां स्लोप रूफ ज्यादा बनाए जाते हैं. यही वजह है कि अमेरिका में भारत जैसी सपाट छत वाले घर बहुत कम दिखाई देते हैं.

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