मरने से पहले अपने पापा से वो फरयाद करती रही.. अपने ज़ख्म दिखाती रही.. अपना दर्द सुनाती रही.. गिरगिड़ाती रही.. पापा रहम करो.. प्लीज़ मुझे बचा लो.. वरना मैं मर जाऊंगी.. मैं भी तो आपकी बेटी हूं ना.. मगर न जाने वो कैसा पिता था.. न तो वो उसे बचाने आया और न ही मरने के बाद उसके जनाज़े पर आया है.