70 के जिस दशक में सिनेमा का सितारा समीकरण बदल रहा था, विनोद खन्ना की एंट्री ऐसे नायक के तौर पर हुई, जिसकी पहचान उसकी कद-काठी उसके रूप-रंग और मोहक मुस्कान की बदौलत बनती है. इस दौर में दिलकश अदाओं के सबसे बड़े हीरो राजेश खन्ना बनकर उभरे थे. धर्मेन्द्र तब के ही-मैन थे, तो शशि कपूर उस दौर के सबसे खूबसूरत हीरो. लेकिन विनोद खन्ना की खूबसूरती के साथ उनके अंदाज में बात कोई गजब थी. 1968 में पहली फिल्म मन का मीत आई, तो उसके आगे पीछे निर्माताओं की कतार लग गई. तब एक हफ्ते में ही 15 फिल्में साइन कर ली थी विनोद खन्ना ने.