नैनीताल में बढ़ते यातायात दबाव और जाम की समस्या को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देश पर कुमाऊं परिक्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक रिद्धिम अग्रवाल ने शहर में AI आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने की पहल शुरू की है. यह पहल पर्यटन और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस शहर में यातायात व्यवस्था को आधुनिक और स्मार्ट बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है.
69 लाख रुपये होंगे खर्च
इस परियोजना के तहत पहले चरण में 17 प्रमुख स्थानों और पार्किंग क्षेत्रों में कुल 37 “ट्रैफिक आई” डिवाइस स्थापित किए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है. वहीं, पूरी योजना के अंतर्गत 70 से अधिक डिवाइस लगाने की तैयारी है, जिसके लिए लगभग ₹69 लाख की धनराशि प्रस्तावित की गई है.

यह अत्याधुनिक सिस्टम भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है. इस तकनीक के माध्यम से शहर के प्रमुख मार्गों और पार्किंग स्थलों पर वाहनों की संख्या, पार्किंग की उपलब्धता और ट्रैफिक दबाव की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी. इससे यातायात संचालन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा और जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस सिस्टम का ट्रायल पहले ही मेट्रोपोल पार्किंग, डीएसए पार्किंग, अशोक पार्किंग और सिविल कोर्ट क्षेत्र में किया जा चुका है. जहां इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. ट्रायल के दौरान ट्रैफिक की बेहतर निगरानी और प्रबंधन देखने को मिला.

पहले चरण में इन प्रमुखों स्थानों पर लगाए जाएंगे डिवाइस
पहले चरण में जिन प्रमुख स्थानों पर ये डिवाइस लगाए जाएंगे, उनमें नारिमन तिराहा काठगोदाम, भीमताल मोड़, भवाली चौराहा, बारापत्थर, तल्लीताल और कालाढूंगी तिराहा जैसे संवेदनशील इलाके शामिल हैं. इन स्थानों पर अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है, खासकर पर्यटन सीजन के दौरान.
प्रशासन का मानना है कि इस AI आधारित ट्रैफिक सिस्टम के लागू होने से नैनीताल में यातायात व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और सुगम होगी. इससे न केवल स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी, बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भी बेहतर यातायात अनुभव प्राप्त होगा.