
नैनीताल के बेतालघाट क्षेत्र में युवक बालम सिंह बिष्ट की आत्महत्या के मामले में आखिरकार खैरना पुलिस चौकी के सभी पुलिसकर्मियों को लाइन हाज़िर कर दिया गया है. मृतक के पास मिले सुसाइड नोट में चौकी के दारोगा और पुलिसकर्मियों को मौत का जिम्मेदार बताते हुए लिखा गया था कि “ये पुलिसकर्मी पैसे के लिए गरीबों को चूसते हैं.”
परिजनों का आरोप है कि बालम सिंह केवल प्राकृतिक सुंदरता का वीडियो बना रहा था, लेकिन पुलिस उसे चौकी ले गई. वहां उसका मोबाइल तोड़ा गया, सिम कार्ड नष्ट किया गया, जेब से पैसे निकाल लिए गए और चालान भी किया गया. चौकी से लौटने के बाद युवक मानसिक रूप से टूट चुका था और कुछ घंटों बाद उसने आत्महत्या कर ली.

मामले में एसपी सिटी ने क्या कहा?
मामले के अगले ही दिन एसपी सिटी जगदीश चंद्रा पुलिसकर्मियों के बचाव में उतर आए थे. उन्होंने कहा था कि पुलिस सिर्फ रूटीन गश्त पर थी और युवक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई थी. एसपी सिटी ने साफ कहा था कि "यह कहना गलत है कि पुलिस उत्पीड़न की वजह से युवक ने आत्महत्या की."
लेकिन जैसे-जैसे प्रदेशभर में आक्रोश बढ़ा, प्रदर्शन हुए, और ज्ञापन भेजे गए, वैसे-वैसे पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे. आखिर घटना के आठ दिन बाद एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने पूरी चौकी को लाइन हाज़िर कर दिया और जांच बैठा दी.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मामला इतना गंभीर था तो कार्रवाई में आठ दिन क्यों लगे? अगर पुलिसकर्मी निर्दोष थे तो पूरी चौकी क्यों हटाई गई? और अगर आरोप गंभीर थे तो शुरुआत में ही पुलिस को क्लीन चिट देने की इतनी जल्दबाज़ी क्यों दिखाई गई?