धर्मनगरी हरिद्वार में यूं तो मांस और शराब की बिक्री नगर निगम क्षेत्र में बैन है, मगर अब खाद्य पदार्थों के नाम को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है. शनिवार को अखंड परशुराम अखाड़े के नेतृत्व में साधु-संतों ने एक विशेष अभियान चलाकर 'वेज बिरयानी' के नाम से चल रहे ठेलों पर लगे बोर्डों और होर्डिंग्स पर 'वेज पुलाव' के पोस्टर लगाए.
संगठन के पदाधिकारियों और संतों ने कई ठेलियों-दुकानों पर जाकर उनसे 'हैदराबादी बिरयानी' नाम हटाने का आग्रह किया और ‘वेज बिरयानी’ के बोर्डों पर 'वेज पुलाव' के स्टिकर चस्पाए. साथ ही दुकानदारों से अपने प्रतिष्ठानों के नाम परिवर्तन करने की अपील की.
उन्होंने कहा कि उनका मकसद किसी व्यक्ति विशेष या व्यापार का विरोध करना नहीं है, बल्कि तीर्थनगरी की धार्मिक और सांस्कृतिक मर्यादाओं को बनाए रखना है.
'वेज बिरयानी' का नाम बदलने की मुहिम
अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक का कहना है कि यह पावन भूमि देवभूमि है, यहां गंगा जी हैं और सभी सनातनी रहते हैं. यह धर्म की नगरी है. बहुत दिनों से हम देख रहे हैं कि 'वेज बिरयानी' लिखा जा रहा था. बिरयानी हटाए और 'वेज पुलाव' लिखें. आगे क्योंकि सावन का मेला आने वाला है, शिव भक्त आने वाले हैं और कुंभ का पर्व भी आने वाला है, इसलिए शासन-प्रशासन से भी निवेदन करते हैं कि इस मुहिम में आप भी भागीदारी करिए. जिस ठेले या दुकान पर यह चीज लिखी है, उसका चालान करिए और उसे हटाकर ‘वेज पुलाव’ का फ्लेक्सी लगाइए.
संत समाज की नगरी में मांस, मदिरा, नशा और बिरयानी नहीं चलेगी, यहां धर्म की बात चलेगी, गीता का ज्ञान चलेगा. हमने सौगंध खाई है कि मायापुर क्षेत्र से जब तक नशा, नॉनवेज और बिरयानी शब्द नहीं हटेगा, हम चैन से नहीं बैठेंगे.
6 किमी के दायरे में 'बिरयानी' शब्द का विरोध
स्वामी कार्तिक गिरी का कहना है कि अखंड परशुराम अखाड़े ने यह मुहिम चलाई है. जहां 'वेज बिरयानी' लिखा गया है, हमने सभी बिरयानी बनाने वालों को समझाया कि यह बिरयानी शब्द हमारा नहीं है, इसे हटाकर 'वेज पुलाव' लिखिए. सभी ने हमारी अपील मान ली है. हमने उन्हें प्यार से समझाया है और वे हमारी बात समझ गए हैं. हम बार-बार इस मुहिम को चलाएंगे. 6 किलोमीटर के क्षेत्र में जहां भी 'बिरयानी' शब्द लिखा मिलेगा, हम उसका विरोध करेंगे और इसे बार-बार देखते रहेंगे. माया नगरी क्षेत्र में हम 'बिरयानी' शब्द नहीं रहने देंगे. हमारी सनातन धर्म नगरी है, इसके अंदर ऐसा कोई शब्द हम इस्तेमाल नहीं करने देंगे जो हमारी संस्कृति से बाहर हो. देखें VIDEO:-
समाज में गलत संदेश जाने का डर
पंडित पवन कृष्ण शास्त्री का कहना है कि यह देवभूमि है, उत्तराखंड है, जहां केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री, गंगोत्री हरिद्वार से होकर जाते हैं. हरिद्वार तीर्थ नगरी है. यहां एक नई मुहिम चलाई गई है. जहां भी जाकर देखो, वहां 'वेज बिरयानी' लिखा हुआ है. क्योंकि बिरयानी शब्द हैदराबाद से आया हुआ है, जिसमें मांस मिला होता है चावल में, उसे बिरयानी कहते हैं. यह मुसलमानों का भोजन माना जाता है. हम सभी हिंदू और सनातनी हैं. आगे माघ मेला आ रहा है, कुंभ मेला आ रहा है, सावन मेला आ रहा है, बहुत सारे त्योहार आ रहे हैं. बड़ी संख्या में हिंदू सनातनी हरिद्वार आएंगे, गंगा स्नान करेंगे और यहां 'वेज बिरयानी' देखेंगे तो समाज को गलत संदेश मिलेगा. इसलिए इसके बदलाव के लिए यह मुहिम चलाई गई है. जहां भी 'वेज बिरयानी' लिखा है, वहां 'वेज पुलाव' लिखिए, जिससे एक अच्छा संदेश जाए.