एक दिन पहले ही मुस्लिम नेताओं का सबसे बड़ा जलसा खत्म हुआ. जमीयत उलेमा के मंच से काशी से लेकर मथुरा तक के लिए आवाजें उठी. देवबंद प्रस्ताव में मस्जिदों और इबादतखाने बचाने के लिए डटे रहने का एलान हुआ. सरकार से अपील की गई कि इतिहास के गड़े मुर्दे ना उखाड़े जाएं. देवबंद में हुई जमीयत का असर वाराणसी में देखा गया. काशी के बुनकरों ने जमीयत और ओवैसी के तीखे बयानों पर अपनी राय रखी. ओवैसी और मदनी के बयानों पर काशी क्या राय रखती है, देखिए इस खास रिपोर्ट में.