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विवादों में रहे IAS अधिकारी को बनाया गया ग्रेटर नोएडा का सीईओ

उत्तर प्रदेश सरकार ने 1996 बैच के आईएएस ऑफिसर अनिल गर्ग को ग्रेटर नोएडा का सीईओ तैनात किया है. अनिल गर्ग की तैनाती सरकार की साख पर सवाल खड़े कर रही हैं.

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आईएएस ऑफिसर अनिल गर्ग (फाइल फोटो)
आईएएस ऑफिसर अनिल गर्ग (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश सरकार ने 1996 बैच के आईएएस ऑफिसर अनिल गर्ग को ग्रेटर नोएडा का सीईओ तैनात किया है. अनिल गर्ग की तैनाती सरकार की साख पर सवाल खड़े कर रही हैं. जिस आईएएस अनिल गर्ग के आबकारी आयुक्त रहते प्रदेश में पचास से ज्यादा लोग जहरीली शराब पीने से मर गए और जहां भी अनिल गर्ग की तैनाती हुई वहां वो विवादों के घेरे में रहे, ऐसे अफसर को रविवार को ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण का सीईओ बना दिया गया.

अनिल गर्ग मायावती के भी बेहद दुलारे अफसरों में से एक माने जाते थे और उनके कार्यकाल में हर जगह तैनाती पाते रहे. हर जगह विवाद के बाद उन्हें हटाया तो गया, मगर उसके बाद उन्हें पहले से भी अच्छी तैनाती दे दी गई. उनके बारे चर्चा है कि वह अपने दफ्तर बेहद कम जाते हैं. आबकारी आयुक्त रहते वह इलाहाबाद से गाड़ी भरकर फाइलें लखनऊ मंगाते थे. उनके ऊपर यूपी सरकार के प्रमुख सचिव राजीव कुमार का हाथ होने की बात कही जाती है.
 
शराब कांड में पद गंवाने में बाल बाल बचे थे
आबकारी आयुक्त रहते अनिल गर्ग शराब के ठेकेदारों पर खासे मेहरबान रहते थे. यही कारण था कि प्रदेश के अधिकतर जिलों में शराब के अवैध धंधे खुले आम चलते थे जिससे प्रदेश के कई जिलों में दर्जनों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था. उनके कार्यकाल में प्रदेश भर में जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत हुई थी. लखनऊ में जहीरीली शराब से 50 से ज्यादा लोग मर गए थे, जिसके बाद प्रदेश सहित पूरे देश में हडकंप मच गया था.

हालांकि उस समय पुलिस विभाग के 7 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया था और अनिल गर्ग के निलंबन की तैयारी कर ली गई थी, लेकिन कहा जाता है कि पोंटी चड्ढा के पुत्र की पैरवी के कारण ये निलंबन रुक गया और अनिल गर्ग को हटाकर प्रतीक्षारत कर दिया. यह बात आम चर्चा का विषय है कि अनिल गर्ग सार्वजनिक रूप से पोंटी चड्ढा के बेटे के पैर छूते हैं. शायद यही चरणवंदना उन्हें एक बार फिर ग्रेटर नोएडा के मलाईदार पद पर ले आई है.

फैजाबाद में करते थे बसपा नेताओं की चरण वंदना
मायावती के शासन काल में फैजाबाद के जिलाधिकारी रहते अनिल गर्ग ने बसपा नेताओं की चरण वंदना करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. वह ऐसे पहले जिलाधिकारी थे जो अपने कार्यालय में अपनी कुर्सी के बराबर में बसपा कोआर्डिनेटर की कुर्सी लगवाते थे. उनकी यह बात पूरी जिले में चर्चा का विषय बनी हुई थी. कहा जाता है कि गर्ग बसपा कोआर्डिनेटर को अपनी सरकारी गाड़ी में घुमाते थे.
 
नोएडा में पिटते-पिटते बचे थे अनिल गर्ग

मायावती की आशीर्वाद के चलते अनिल गर्ग को नोएडा विकास प्राधिकरण में तैनात किया गया था. शायद इसी वजह से वो बार-बार सवालों के घेरे में आने के बावजूद भी बाल-बाल बच जाते थे, उस समय अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने शहीद हुए एक व्यक्ति के परिजनों से शहीदों के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया था. इससे उत्तेजित सैकड़ों ग्रामीणों ने प्राधिकरण भवन को घेर लिया था. ग्रामीण इतने उत्तेजित थे कि वह गर्ग की पिटाई करना चाहते थे. किसी तरह सीईओ ने माफी मांगकर मामले को रफा-दफा किया.
 
सचिव उच्च शिक्षा पद पर रहते किया भारी गोलमाल
सचिव उच्च शिक्षा के पद पर तैनात करते समय अनिल गर्ग को भरोसा दे दिया गया था कि उनके ऊपर कोई प्रमुख सचिव तैनात नहीं किया जाएगा. और जब तक वो रहे बेसिक शिक्षा में उनकी तूती बोलती रही.

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