उत्तर प्रदेश के शामली जिले के भैंसानी इस्लामपुर गांव में मार्च के महीने में तबलीगी जमात के लोग आए थे, जिनमें से तीन लोग कोरोना पॉजिटिव आए थे और सजा गांव वाले भुगत रहे हैं. कोरोना मरीज मिलने के बाद तीन किलोमीटर तक क्षेत्र सील होने के बाद गांव वाले एक महीन से घरों में कैद हैं.
गांव को हॉटस्पाट बना दिया गया है, जिससे ग्रामीणों की सब्जी और फसलें खेतों में बर्बाद हो रही हैं. गन्ना मिल मालिक ने किसानों का गन्ना लेने से मना कर दिया है तो बैंक ने भी भैंसानी के लोगों के लिए पैसा निकालने और जमा करने पर रोक लगा रखी है. इसके चलते भैंसानी गांव वालों को जिंदगी जीने के लाले पड़े हैं.
भैंसानी इस्लामपुर गांव के रहने वाले किसान यूनियन के नेता हाजी अफसार ने aajtak.in को बताया, "31 मार्च को तबलीगी जमात के तीन लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे, लेकिन उनमें से गांव का एक भी आदमी नहीं था. इसमें एक झारखंड और दो बंगालदेश के थे, जिन्हें जलालाबाद में क्वारनटीन किया गया. जमात के लोगों की वजह से प्रशासन ने गांव के दस लोगों को एहतियात के तौर क्वारनटीन किया गया जबकि जांच में निगेटिव आए थे. इसके बाद भी गांव को 5 अप्रैल को हॉटस्पाट घोषित कर दिया गया, यहीं से दिक्कतें बढ़ गई हैं. पुलिस दुश्मनों जैसा सलूक कर रही है."
हाजी अफसार कहते हैं कि गांव में खेती किसानी ही जिंदगी का एक जरिया है, लेकिन अब तो वो भी बर्बाद हो गई है. कोरोना के मरीज मिलने के बाद हिंदुस्तान बजाज चीनी मिल थाना भवन ने गांव वालों का गन्ना लेने पर रोक लगा दी है. इस समय 1.50 करोड़ कुंटल के करीब गन्ना खेतों में पड़ा है. ऐसे ही गेंहू की फसल काटने नहीं दी जा रही है और न ही थ्रेसर चलाने की अनुमति है. ऊपर से लगातार बारिश हो रही है, जिसकी वजह से गेहूं की फसल बर्बाद हो रही है. गांव के लोग रात को जब पुलिस और प्रशासन के लोग सो जाते हैं तो चोरी छिपे जाकर अपने खेतों में गेहूं की फसल काट रहे हैं.
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वहीं, भैंसानी इस्लामपुर गांव के रहने वाले वीर सिंह कहते हैं कि पिछले एक महीने से किसी को भी गांव से बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है और पुलिस वाले न ही खेतों में जाने देते हैं. गन्ना की कटाई न होने के कारण जानवर भूखे मर रहे हैं. वो कहते हैं कि लॉकडाउन की वजह से करेला, भिंडी, खीरा, झींगा आदि फसल खेतों में बर्बाद होने लगी है. हमें घर के अंदर ही रहना पड़ रहा है, जिसकी वजह से हम अपनी सब्जियों को भी बेच नहीं पा रहे हैं. इसके चलते परिवार के सामने भूखमरी की नौबत आ खड़ी हुई है.
भैंसाली गांव के मुर्सलीन कहते हैं कि हॉटस्पाट घोषित होने से गांव का बैंक बंद कर दिया गया है. इसके अलावा थाना भवन के बैंक में जिन गांव वालों के खाते हैं वहां पर उन्हें पैसे निकालने नहीं दिया जा रहा है. बैंक मैनेजर साफ कहते हैं कि भैंसाली गांव वाले न तो पैसा जमा करें और न ही उन्हें पैसा निकालने की इजाजत है. इस तरह से न तो हम अपना पैसा और न ही सरकार द्वारा मिलने वाली पेंशन का पैसा निकाल पा रहे हैं. इस तरह से घर चलाना पूरे गांव वाल के लिए मुश्किल हो रहा है.
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मुर्सलीन ने बताया कि गांव में पुलिस ने ऐसा दहशत बना रखा है कि जैसे हर एक शख्स के पीछे एक आदमी लगा दिया है. गांव के लोगों को पुलिस बेरहमी से मार रही है जबकि कानून का पालन डराकर और धमकाकर भी कराया जा सकता है. पुलिस अगर कोई कहीं जा रहा है तो पूछने के बजाय मारना शुरू कर देती है. पुलिस की मार से गांव के मोहम्मद इसरार, शोएब और गयूर को इस तरह से मारा गया है कि उनकी हड्डियां टूट गई हैं. इस तरह तो कोई दुश्मन से भी व्यवहार नहीं करता है, जैसा प्रशासन गांव वालों से कर रहा है.
किसान की जिंदगी गुजर करने वाले गुलजार कहते हैं कि सरकार कहती है कि लॉकडाउन में किसानों को उसकी खेती करने की छूट है, लेकिन यहां तो खेत जाना दूर की बात है घर के बाहर भी अकेले बैठने नहीं दिया जा रहा है. वो कहते हैं कि हमारी गेहूं की फसल खेत में पड़ी है और हर रोज बारिश हो रही है. प्रशासन के चलते न तो हम थ्रेसर से कटाई कर सकते हैं और न ही उन्हें उठाकर घर ला सकते हैं. वो बताते हैं कि दूध को बेचकर घर के हर रोज का खर्चा चलाते थे, लेकिन अब तो हम दूध बेचने भी नहीं जा सकते हैं. इस तरह तो हम सबका जीना मुश्किल हो गया है. इधर-उधर से लेकर अपना घर चला रहे हैं.