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'विकास का मतलब विनाश नहीं...', गांधी सरोवर परियोजना के विरोध में तेलंगाना के 450 परिवार

गांधी सरोवर परियोजना के तहत तेलंगाना में मूसी नदी के किनारे बड़े पैमाने पर पुनर्विकास किया जाना है. हैदराबाद के बंदलागुडा जागीर में मधु पार्क रिज कॉलोनी के लगभग 450 परिवारों को घर खाली करने का नोटिस मिला है. सरकार नकद मुआवजे की बजाय टीडीआर बांड दे रही है, जिसका निवासी विरोध कर रहे हैं.

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(Photo: ITG)
(Photo: ITG)

प्रस्तावित महात्मा गांधी सरोवर परियोजना तेलंगाना सरकार के तहत मूसी नदी पुनरुद्धार पहल का एक अहम हिस्सा है. तेलंगाना के हैदराबाद स्थित बंदलागुडा जागीर में 'मधु पार्क रिज' अपार्टमेंट के निवासी इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं.

दरअसल, इस परियोजना के तहत मूसी नदी के किनारे बड़े पैमाने पर पुनर्विकास किया जाना है. इसके तहत भारत में महात्मा गांधी की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाए जाने का प्रस्ताव है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए भारत सरकार ने एशियाई विकास बैंक से 4,100 करोड़ रुपये से ज़्यादा का उधार लिया है. इसके अलावा, जिन लोगों की जमीन ली जा रही है, उन्हें सरकार नकद पैसा देने के बजाय 500 करोड़ रुपये के TDR बॉन्ड दे रही है.

क्या है पूरा मामला?

रंगारेड्डी जिले के गंडिपेट मंडल में 'मधु पार्क रिज' नाम की एक 15 साल पुरानी कॉलोनी (गेटेड कम्युनिटी) है. यहां लगभग 450 परिवार रहते हैं. इस प्रोजेक्ट के तहत नदी के किनारे 50 मीटर तक की जमीन ली जा रही है, जिससे इस कॉलोनी पर सीधा असर पड़ा है. यहां रहने वाले लोगों को घर खाली करने का नोटिस थमा दिया गया है. 

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मुआवजे के तौर पर TDR बॉन्ड दे रही सरकार

सरकार उन्हें मुआवजे के तौर पर नकद पैसा नहीं दे रही है, बल्कि उसकी जगह TDR बॉन्ड दे रही है. ऐसे में निवासियों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया है. उनका कहना है कि वो महात्मा गांधी या स्वयं प्रतिमा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वो अपने घरों को ढहाए जाने का कड़ा विरोध करते हैं.

'विकास का मतलब विनाश नहीं होना चाहिए'

विरोध प्रदर्शन के दौरान निवासियों ने एक सामूहिक बयान में कहा, 'ये आज सिर्फ हमारे समुदाय के बारे में नहीं है. आज मधु पार्क रिज है, कल आप में से कोई भी हो सकता है. गांधी सरोवर परियोजना के लिए 450 से ज्यादा परिवारों को उजाड़ना विकास कैसे कहलाता है? प्रभाव आकलन कहां है? पब्लिक रिपोर्ट कहां है?' 

निवासियों ने कहा, 'विकास का मतलब विनाश नहीं होना चाहिए. हम इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हैं. हम मुआवजे के लिए तैयार नहीं हैं. ये हमारा घर है. ये हमारा मौलिक अधिकार है.' कई निवासियों का तर्क है कि हैदराबाद में कई जगहों पर खाली जमीन मौजूद है और बसे-बसाए परिवारों को विस्थापित करना गैर-जरूरी है.

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निवासियों को वित्तीय मुश्किलें झेलने का डर

प्रस्तावित मुआवजे के मॉडल के तहत, निवासियों को आधार भूमि दर के 300% मूल्य के TDR बॉन्ड हासिल होंगे. हालांकि, कई निवासियों का दावा है कि अभी TDR बाजार सुस्त है और बॉन्ड काफी छूट पर बेचे जा रहे हैं, जिससे वित्तीय मुश्किलें पैदा हो रही हैं.

एक निवासी ने कहा, 'सरकार अपार्टमेंट गिराने की योजना बना रही है, जिससे हमें TDR बॉन्ड पर निर्भर रहते हुए किराया देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. मेरा बेटा जम्मू-कश्मीर में सेना में सेवा दे रहा है, जहां परिवार का साथ रहना प्रतिबंधित है. अगर ऐसा होता है तो हमारे पास किराए के घर की व्यवस्था करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं है. पेंशनभोगी किराए और गुजारा, दोनों का इंतजाम कैसे करेंगे?'

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'अपना घर खोने के बजाय मरना पसंद करेंगे'

एक बुजुर्ग महिला ने प्रदर्शन के दौरान कहा, 'आप हमारे अपार्टमेंट को ढहाने के लिए अपना बुलडोजर भेजना चाहते हैं? 450 परिवार आपके बुलडोजर के नीचे सोएंगे. कृपया इसे हमारे ऊपर से चला दें और आप पूरे भारत में मशहूर हो जाएंगे. हम अपना घर खोने के बजाय मरना पसंद करेंगे.'

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निवासियों ने अपने अपार्टमेंट को इमारतों से कहीं बढ़कर बताया है. वो इन्हें जिंदगी भर का निवेश, पारिवारिक यादों से भरी जगह और सालों में बनी सुरक्षा मानते हैं.

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