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शीतकालीन सत्र: दो दिनों तक संविधान के प्रति प्रतिबद्धता पर चर्चा करेगी सरकार

लोकतंत्र के मंदिर संसद का शीतकालीन सत्र 26 नवंबर से शुरू होने जा रहा है. विपक्ष के पास इस बार भी कई ऐसे मुद्दे हैं, जिसकी वजह से सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं, वहीं सरकार की कोशि‍श इस बीच जरूरी काम को निपटाना होगा. लेकिन इन सबसे पहले राज्यसभा में सत्र के शुरुआती दो दिनों में भारतीय संविधान के प्रति प्रतिबद्धता पर चर्चा की जाएगी.

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संसद भवन की फाइल फोटो
संसद भवन की फाइल फोटो

लोकतंत्र के मंदिर संसद का शीतकालीन सत्र 26 नवंबर से शुरू होने जा रहा है. विपक्ष के पास इस बार भी कई ऐसे मुद्दे हैं, जिसकी वजह से सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं, वहीं सरकार की कोशि‍श इस बीच जरूरी काम को निपटाना होगा. लेकिन इन सबसे पहले राज्यसभा में सत्र के शुरुआती दो दिनों में भारतीय संविधान के प्रति प्रतिबद्धता पर चर्चा की जाएगी.

जानकारी के मुताबिक, राज्यसभा में 26 और 27 नवंबर को पर चर्चा होनी है. इन दो दिनों में हमारे माननीय सांसदों की टोली सिर्फ और सिर्फ इस विषय पर चर्चा की जाएगी. शीतकालीन सत्र में कुल 20 दिनों तक सदन की कार्यवाही चलेगी. आगामी सत्र 23 दिसंबर को खत्म होगा. समझा जा रहा है कि इसके पीछे सरकार की मंशा विपक्ष के तीखे तेवर को संसद में सहयोग के लिए परिवर्ति‍त करना है.

इससे पहले सोमवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में सत्र बुलाने पर फैसला किया गया. बैठक में संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू भी उपस्थित थे. बिहार चुनाव के नतीजों के बाद हो रहे इस सत्र को राजनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

विपक्ष की लामबंदी, सरकार की परेशानी
केंद्र सरकार का मानना है कि राज्यसभा में होगा. ऐसे में सरकार की कोशि‍श विपक्ष के साथ पहले से ज्यादा संवाद कायम करने की होगी. जबकि विपक्ष राजनीतिक एकजुटता के साथ सरकार के खि‍लाफ आगे बढ़ने का रवैया अपनाएगी. विपक्ष सांप्रदायिक तनाव, असहिष्णुता के साथ ही मंत्रियों की संवेदनहीन और गैर जिम्मेदाराना बयानबाजी को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरेगी. प्रधानमंत्री की चुप्पी भी विपक्ष के निशाने पर रहेगी.

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जरूरी विधेयकों का क्या?
सरकार शीतकालीन सत्र के दौरान वस्तु एवं सेवाकर- जीएसटी विधेयक, अचल संपत्ति विधेयक, भूमि अधिग्रहण विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित करवाना चाहेगी. लेकिन यह भी तय है कि के कारण जीएसटी पारित करवाना सरकार के लिए आसान नहीं होगा. हालांकि, सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह जीएसटी पारित करवाने के लिए विपक्ष से बातचीत करेगी.

 

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