लॉकडाउन के दौरान से यानी करीब 110 दिनों से चल रहे वर्चुअल कोर्ट में अब भी ऑडियो डिस्टरबेंस जारी है. कई बार वकील अपना माइक बंद करना भूल जाते हैं, तो सुनवाई के दौरान बिना वजह शोर शराबा होता है. इसके चलते जरूरी बात लोग सुन नहीं पाते हैं.
इसकी वजह से दलील दे रहे वकील का भी ध्यान भंग होता है, क्योंकि अगर बाकी वकीलों के माइक ऑन हैं, तो बेंच सहित सबको अनावश्यक वार्तालाप भी सुनना पड़ता है. वर्चुअल कोर्ट की सुनवाई के दौरान कई बार तो घर के पालतू कुत्तों के भौंकने और बर्तन पटकने या फिर गाड़ियों के आने-जाने तक की आवाजें भी सुनाई पड़ती हैं.
कई बार तो वकीलों को कोर्ट और जजों के बारे में भी टिप्पणियां करते सुना गया है. कोर्ट ने उनकी आपसी बातों का जवाब देकर सबको हैरान और टिप्पणीकार वकीलों को शर्मिंदा भी किया है. इस बारे में कोर्ट पिछले तीन महीनों में सैकड़ों बार वकीलों को आगाह कर चुका है कि माइक ऑफ करके रखें और ऑन करके बोलें.
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हालांकि, बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट का धैर्य भी खो गया. चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े ने ऐसी ही घटना से आजिज आकर अपने स्टाफ से कहा, 'आप लोग बोर्ड क्यों नहीं बनाते हो? बोर्ड बनाओ. बड़ा बोर्ड जो दिखे सबको. कलर से भरो उसको. उस पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखो. आज ही बनाओ बोर्ड.'
चीफ जस्टिस बोबड़े के इस फरमान के बाद उम्मीद है कि गुरुवार से बोर्डनुमा प्लेकार्ड के ज़रिए ही म्यूट और अनम्यूट पर ध्यान न देने वाले वकीलों को चेताया जाएगा, क्योंकि इसकी उम्मीद बहुत कम है कि वकील इस बारे में सतर्कता बरतें. लिहाजा अब वकील बिना म्यूट किए आपसी बातचीत करेंगे, तो उनको रोकने का सटीक उपाय कोर्ट स्टाफ ने कर लिया है.
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