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1966 का सर्कुलर वापस लेगी सरकार, RSS और जमात से जुड़े होने पर भी मिलेगी सरकारी नौकरी

सरकार ने यह कदम हाल में गोवा के एक मामले के बाद उठाने का फैसला किया है. जहां केंद्र सरकार के एक विभाग में 1966 के सर्कुलर की वजह से नए नियुक्त किए गए कर्मचारियों से घोषणापत्र मांगा गया था कि वे आरएसएस या जमात से जुड़े तो नहीं हैं?

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1966 में जारी किया गया था सर्कुलर
1966 में जारी किया गया था सर्कुलर

राजस्थान में कस्टम विभाग में RSS से न जुड़े होने के घोषणापत्र देने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. अब सरकार ने फैसला लिया है कि साल 1966 के उस सर्कुलर को वापस लिया जाएगा, जिसमें RSS या किसी अन्य गैरकानूनी संगठन से जुड़े लोगों को सरकारी नौकरी न देने की घोषणा की गई थी.

कहां से शुरू हुआ मामला
सरकार ने यह कदम हाल में गोवा के एक मामले के बाद उठाने का फैसला किया है. जहां केंद्र सरकार के एक विभाग में 1966 के सर्कुलर की वजह से नए नियुक्त किए गए कर्मचारियों से घोषणापत्र मांगा गया था कि वे से जुड़े तो नहीं हैं?

'द टाइम्स ऑफ इंडिया' की खबर के मुताबिक मामले में केंद्रीय कार्मिक मंत्री जितेंद्र सिंह ने बयान दिया है कि सरकार ने ऐसा कोई सर्कुलर जारी नहीं किया है. सिंह ने कहा कि अगर किसी पुराने सर्कुलर की वजह से यह गलतफहमी उपजी है तो उसे दूर किया जाएगा. सिंह के इस बयान से कयास लगाए जा रहे हैं कि अब सरकार इस सर्कुलर को वापस लेने जा रही है.

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क्या है 1966 के सर्कुलर में?
साल 1966 में गृहमंत्रालय ने एक सर्कुलर जारी किया था. इस सर्कुलर के मुताबिक सरकारी नौकरी के लिए नियुक्त लोगों को घोषणापत्र देकर यह बताना होगा कि वे या जमात-ए-इस्लामी से तो नहीं जुड़े. अगर कोई इन संगठनों से जुड़ा है तो उसे नौकरी नहीं दी जाएगी. इस सर्कुलर को 1975 और 1980 में दोबारा जारी किया गया था. हालांकि कई सालों तक इन का पालन नहीं किया गया.

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