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जावड़ेकर ने बताया- 4 साल में शिक्षा के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने मेल टुडे से कहा कि पिछले तीन-चार साल में मौजूदा सरकार ने शिक्षा के स्तर में बड़ा सुधार लाने का काम किया है.

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केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडेकर
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडेकर

इंडिया टुडे समूह के अखबार मेल टुडे ने दिल्ली में एजुकेशन एंड स्किल समिट का सातवां संस्करण संस्करण आयोजित किया. इस समिट के पहले सत्र शिक्षा और रोजगार में केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने शिरकत की. सत्र का संचालन इंडिया टुडे समूह के एडिटोरियल डायरेक्टर (पब्लिशिंग) राज चेन्गप्पा ने किया.   

केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने मेल टुडे के वार्षिक एजुकेशन समिट पर कहा कि बीते 3-4 साल के दौरान देश में शिक्षा के स्तर में बड़ा सुधार लाने का  काम किया गया है. जावडेकर के मुताबिक देश में 100 करोड़ लोग शिक्षा से सीधे तौर पर जुड़े हैं. इसके बावजूद देश में शिक्षा चुनावी मुद्दा नहीं है. जावडेकर के मुताबिक शिक्षा के मुद्दे पर देश में वोट नहीं डाला जाता है. इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान शिक्षा को सबसे अधिक प्राथमिकता दी है.

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जावडेकर ने दावा किया कि मोदी सरकार के कार्यकाल से पहले 10-15 साल के दौरान शिक्षा का स्तर देश में बेहद खराब हुआ. इस दौर में खराब नीति के चलते सच्चाई यह थी कि 8वीं क्लास का बच्चा 6वीं क्लास की गणित के सवाल को हल करने में समर्थ नहीं था. इस सच्चाई से अलग बीते तीन साल के दौरान मोदी सरकार ने सभी क्लास का लर्निंग आउटकम तय कर दिया है. इसके तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि किस स्तर पर बच्चों को क्या आना चाहिए.

जावडेकर ने बताया कि केन्द्र सरकार ने हाल में नेशनल एसेसमेंट सर्वे कराया. इसके तहत सरकार ने पिछले साल तक जहां जिला वार क्लास 3, 5 और 8 के बच्चों का प्रोफाइल तैयार किया था अब वह स्कूल वार स्कूली बच्चों का प्रोफाइल तैयार कर रही है. इस प्रोफाइलिंग से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि  हर वर्ग में आने वाले बच्चे कम से कम अपने वर्ग के समानांतर ज्ञान में सक्षम हैं और पूरे देश में बच्चों की छमता में एकरूपता लाई जा सकेगी.

जावडेकर ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल से पहले देश में 1.5 मिलियन टीचर सिर्फ 12 वीं पास थे. उनके पास न तो एजुकेशन का कोई डिप्लोमा था और न ही पूर्व की सरकारों ने उन्हें किसी तरह की ट्रेनिंग देने का काम किया. जावडेकर ने दावा किया कि बीते 4 साल के दौरान मोदी सरकार ने प्राथमिकता के साथ 14 लाख टीचर को ट्रेनिंग के लिए रजिस्टर किया और उनकी ट्रेनिंग की व्यवस्था की. अब इस कदम का अच्छा असर देखने को मिल रहा है. शिक्षा का स्तर बेहतर हो रहा है.

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इसके अलावा जावडेकर ने कहा कि उनकी सरकार नो डिटेंशन पॉलिसी (फेल न करने की नीति) पर काम कर रही है. जावडेकर ने बताया कि केन्द्र सरकार ने राज्यों के लिए इस नीति को विकल्प के  तौर पर रखा है और वह स्वेच्छा से इस नीति में शामिल हो सकते हैं या पूरी तरह से बाहर रहते हुए अपनी नीति तैयार कर सकते हैं. इस कदम के साथ-साथ टेक्नोलजीका विस्तार करते हुए देश में शिक्षा के स्तर को सुधारने का काम किया जा रहा है.

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