कोरोना संकट काल, चीन के साथ जारी विवाद और अन्य मसलों के बीच आज एक अहम बैठक होने जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन आज पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय बैठक का हिस्सा बनेंगे, जिसपर पूरी दुनिया की निगाहें हैं. भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के QUAD ग्रुप की आज बैठक है, जिसमें कोरोना, आर्थिक और सामरिक जैसे विषयों पर मंथन होना है.
पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और और जापानी पीएम योशिहिडे सुगा को अपने ट्विटर हैंडल पर टैग करते हुए लिखा है कि आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुलाकात होने जा रही है.
This evening, will be taking part in the First Quad Leaders’ Virtual Summit with , PM and PM . The Summit will provide an opportunity to discuss a wide range of regional and global issues of shared interest.
— Narendra Modi (@narendramodi)
पहली बार एक मंच पर मोदी और बाइडेन...
अमेरिका की कमान संभालने के बाद जो बाइडेन पहली बार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ किसी साझा मंच पर होंगे. हालांकि, दोनों नेता पहले भी फोन पर बात कर चुके हैं जब पीएम मोदी ने जो बाइडेन को राष्ट्रपति बनने की बधाई दी थी. यही कारण है कि ना सिर्फ भारत-अमेरिका बल्कि दुनिया की नज़र इस मीटिंग पर हैं.
QUAD मीटिंग में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन, जापानी प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा शामिल होंगे. भारतीय समयानुसार आज शाम सात बजे ये बैठक शुरू होगी.
किन मुद्दों पर रहेगा इस बार फोकस?
कोरोना वायरस संकट से उबर रही दुनिया के सामने अब चुनौती है कि कैसे आर्थिक व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाया जाए और चीन के संकट से जूझा जाए. इन्हीं विषयों को लेकर इस मीटिंग में बातचीत होनी है. कोरोना संकट, चीन के बढ़ते जुल्म के अलावा क्लाइमेट चेंज जैसे विषयों पर भी मंथन किया जाएगा.
बता दें कि भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के चीन के साथ सीधे तौर पर अच्छे संबंध नहीं रहे हैं. अमेरिका और चीन की लंबे वक्त से कोल्ड वॉर चल रही है, तो भारत के साथ चीन का सीमा विवाद अभी भी जारी है. बीते दो वर्षों में ऑस्ट्रेलिया के साथ भी चीन के संबंध बिगड़े हैं.
इस बैठक से पहले चीन की ओर से भी बयान दिया गया था कि भारत को किसी भी तरह का द्विपक्षीय मुद्दा सिर्फ चीन के साथ सीधे बातचीत में उठाना चाहिए. किसी अंतरराष्ट्रीय मंच या किसी तीसरे देश को इसमें शामिल नहीं किया जाना चाहिए. बता दें कि लद्दाख विवाद के दौरान अमेरिका ने खुले तौर पर भारत का समर्थन किया था जिससे चीन चिढ़ा हुआ था.