scorecardresearch
 

वोडाफोन के नए विज्ञापन पर PETA को आपत्ति, कहा- 'पग' को होती है तकलीफ

आपको बता दें कि करीब 2 साल बाद वोडाफोन एक बार फिर अपने विज्ञापनों में इन 'पग' को वापस लाया है. एक नए विज्ञापन में करीब 30 पग दिख रहे हैं, जिसको लेकर पेटा ने आपत्ति जताई है.

Advertisement
X
विज्ञापन से लिया गया ग्रैब
विज्ञापन से लिया गया ग्रैब

मोबाइल नेटवर्क कंपनी वोडाफोन के विज्ञापनों से मशहूर हुए 'पग' को लेकर PETA ने सवाल उठा दिए हैं. जानवरों के लिए काम करने वाली संस्था पीपल फॉर इथीकल ट्रीटमेंट ऑफ एनीमल्स (PETA) ने वोडाफोन इंडिया के नए विज्ञापन पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इसके जरिए इन कुत्तों को काफी नुकसान हो सकता है.

आपको बता दें कि करीब 2 साल बाद वोडाफोन एक बार फिर अपने विज्ञापनों में इन 'पग' को वापस लाया है. एक नए विज्ञापन में करीब 30 पग दिख रहे हैं, जिसको लेकर पेटा ने आपत्ति जताई है.

पेटा की ओर से वोडाफोन को लिखा गया है कि ये कुत्ते 'आनुवंशिक रूप से समझौता' कर तैयार किए गए हैं. पेटा ने लिखा कि किसी भी जानवर को सिर्फ एक प्रोडक्ट को बेचने के लिए शोर-शराबे, तेज म्यूज़िक, लगातार रीटेक झेलने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए.

Advertisement

पेटा इंडिया के सीईओ मणिलाल ने अपने खत में लिखा कि आपके विज्ञापनों के कारण भारत में ये पग काफी पॉपुलर हुए हैं, लेकिन इसके कारण उन्हें काफी परेशानी भी हो रही है.

उन्होंने लिखा कि आपके विज्ञापनों ने इन्हें मशहूर तो किया लेकिन लोग नहीं जानते हैं कि इन्हें किस तरह प्रताड़ित किया जाता है. भले ही लोगों को ये क्यूट लगता हो लेकिन ये गलत है. दबी हुई नाक, चपटा चेहरा भले ही लोगों को अच्छा लगे, लेकिन इन पग को काफी तकलीफ होती है. जिस तरह से भारत में इनकी डिमांड बढ़ी है, उस कारण इन्हें प्रोड्यूस करने के लिए मादा पग पर दबाव बनाया जाता है. जिससे उनकी बॉडी पर काफी असर पड़ता है जो खतरनाक है.

चिट्ठी में लिखा है कि भारत में काफी गर्मी है, लेकिन ये पग इसे झेल नहीं पाते हैं. और कई पग की मौत हो जाती है. इसलिए अपने विज्ञापनों में दिखाने से पहले जरूर विचार करें.

Advertisement
Advertisement