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मिडिल ईस्ट युद्ध का असर भारतीय रसोई पर, LPG सिलेंडर 913 पहुंचा, 60 रुपये महंगा हुआ

मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध का असर भारत की रसोई तक पहुंच सकता है. एलपीजी सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़कर दिल्ली में 913 रुपये हो गई है. भारत अपनी जरूरत का 65-70 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के कारण सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है.

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ईरान युद्ध के बीच बढ़े LPG के दाम (Photo: Representational)
ईरान युद्ध के बीच बढ़े LPG के दाम (Photo: Representational)

मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का असर अब भारत की रसोई तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. एलपीजी की सप्लाई और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ने लगी है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. हाल ही में एलपीजी सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है. शनिवार को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई. इसके बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गई है.

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सरकार भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि मौजूदा संकट के बीच भारतीय उपभोक्ताओं के हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बने रहेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि यह संकट वैश्विक सप्लाई चेन में गंभीर बाधा पैदा कर सकता है. भारत की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए एलपीजी आयात पर निर्भरता एक बड़ी चुनौती मानी जाती है. आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच देश की करीब 65 से 70 प्रतिशत एलपीजी जरूरत आयात के जरिए पूरी की गई.

यह भी पढ़ें: 1500 रुपये ब्लैक में बिक रहा गैस सिलेंडर, ईरान युद्ध के बीच बढ़ी घबराहट, कई शहरों में लंबी कतारें

मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच एलपीजी कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी

इस अवधि के दौरान भारत ने लगभग 28.03 मिलियन टन एलपीजी का उपभोग किया. वहीं घरेलू उत्पादन करीब 10.6 मिलियन टन रहा। इसका मतलब है कि देश की बड़ी ऊर्जा जरूरत विदेशी सप्लाई पर निर्भर है. भारत जिन देशों से एलपीजी आयात करता है उनमें मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत शामिल हैं. ये सभी देश मिडिल ईस्ट क्षेत्र में स्थित हैं.

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भारत में भी बढ़ सकता है गैस का दाम
भारत में भी बढ़ सकता है गैस का दाम

इन देशों से आने वाली गैस का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से भारत पहुंचता है. इसके लिए होरमुज जलडमरूमध्य एक महत्वपूर्ण मार्ग है. यह एक संकीर्ण समुद्री रास्ता है जहां से बड़ी मात्रा में तेोल और गैस की आपूर्ति दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचती है. मौजूदा युद्ध के कारण ईरान ने इस मार्ग पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी हैं. इससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.

भारत अपनी जरूरत का 65 से 70 प्रतिशत एलपीजी करता है आयात

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित होती है तो इसका असर एलपीजी की आपूर्ति पर भी पड़ सकता है. इससे पहले भी वैश्विक संघर्ष के दौरान ऊर्जा कीमतों में तेजी देखी जा चुकी है. वर्ष 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के दौरान भी भारत में एलपीजी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई थी. उस समय अक्टूबर 2021 में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत करीब 900 रुपये थी जो जुलाई 2022 तक बढ़कर 1053 रुपये तक पहुंच गई थी. यह करीब 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी थी. हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि फिलहाल भारत की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर स्थिति नियंत्रण में है और देश पर्याप्त भंडार के साथ तैयार है.

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इसके बावजूद ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध का असर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है. उनका कहना है कि यदि युद्ध जल्दी समाप्त भी हो जाए तो भी बुनियादी ढांचे को नुकसान, समुद्री परिवहन में बाधा और सुरक्षा जोखिमों के कारण ईंधन की कीमतें कई सप्ताह या महीनों तक ऊंची बनी रह सकती हैं.

यूएई, सऊदी अरब, कतर और कुवैत से आती है बड़ी गैस सप्लाई

अगर वैश्विक बाजार में गैस और तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं तो इसका असर भारत में घरेलू एलपीजी कीमतों पर भी पड़ सकता है. ऐसे में आने वाले महीनों में सिलेंडर की कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इस तरह मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध सिर्फ वैश्विक राजनीति तक सीमित नहीं है बल्कि इसका असर आम लोगों की रसोई तक भी पहुंच सकता है.

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रिपोर्ट- प्रतीक सचान
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