
ईरान युद्ध के बीच भारत में एलपीजी सिलेंडर को लेकर लोगों के बीच अचानक घबराहट देखने को मिल रही है. कई शहरों और कस्बों में गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं. लोग खाली सिलेंडर लेकर एजेंसियों के बाहर खड़े हैं और जल्दी से जल्दी गैस भरवाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि सरकार और ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि देश में एलपीजी की कोई वास्तविक कमी नहीं है. उनके मुताबिक यह स्थिति मुख्य रूप से घबराहट में की जा रही बुकिंग और कुछ स्थानीय स्तर की आपूर्ति संबंधी समस्याओं की वजह से बनी है.
सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी ऐसे ही दृश्य देखने को मिले. नोएडा के सेक्टर 22 में स्थित एक भारत गैस एजेंसी के बाहर सुबह से ही लोगों की लंबी कतार लग गई. कई लोग अपने खाली सिलेंडर लेकर एजेंसी के बाहर खड़े थे और गैस मिलने का इंतजार कर रहे थे.
इसी तरह उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के बर्डपुर गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इस वीडियो में सैकड़ों लोग अपने खाली सिलेंडर लेकर गैस एजेंसी के बाहर बैठे दिखाई दे रहे हैं. बताया जा रहा है कि यह वीडियो 7 मार्च का है और उस दिन बड़ी संख्या में लोग गैस लेने पहुंचे थे.
ईरान युद्ध के बीच देश में LPG को लेकर बढ़ी घबराहट
हालांकि कई उपभोक्ताओं का कहना है कि जमीन पर एलपीजी की वास्तविक कमी नहीं है. कई लोगों ने बताया कि उन्हें नियमित तरीके से सिलेंडर मिल रहे हैं और सप्लाई जारी है. फिर भी कुछ जगहों पर हालात अलग दिखाई दे रहे हैं. उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की एक महिला ने दावा किया कि उसे घरेलू गैस सिलेंडर 1500 रुपये में ब्लैक मार्केट से खरीदना पड़ा. महिला ने कहा कि रमजान का महीना चल रहा है और गैस की जरूरत बहुत ज्यादा है इसलिए मजबूरी में महंगा सिलेंडर लेना पड़ा.
दिल्ली के दक्षिणी इलाके में काम करने वाले इंडेन गैस के एक डिलीवरी पार्टनर ने भी बताया कि पिछले चार से पांच दिनों में गैस सिलेंडर की बुकिंग अचानक बढ़ गई है. उन्होंने कहा कि लोगों में घबराहट के कारण बुकिंग बढ़ी है लेकिन सप्लाई में कोई खास कमी नहीं है. दरअसल ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध ने ऊर्जा बाजार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. इस युद्ध का आज दसवां दिन है और इसी बीच ईरान द्वारा होरमुज जलडमरूमध्य को प्रभावित करने की खबरों ने लोगों में डर पैदा कर दिया है.

नोएडा और यूपी के कई इलाकों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें
होरमुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है जहां से तेल और गैस की बड़ी मात्रा में आपूर्ति होती है. भारत भी अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इनमें से लगभग 80 प्रतिशत आपूर्ति इसी मार्ग से होकर आती है. भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब दो तिहाई हिस्सा आयात करता है. यह गैस मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से आती है.
यही कारण है कि युद्ध की खबरों के बाद लोगों में यह डर फैल गया कि कहीं गैस की सप्लाई प्रभावित न हो जाए. इस आशंका के कारण लोगों ने बड़ी संख्या में सिलेंडर बुक करना शुरू कर दिया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में पिछले पांच से छह दिनों के दौरान एलपीजी बुकिंग में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कोलकाता और आसपास के जिलों में यह बढ़ोतरी ज्यादा देखी गई.
कुछ जगहों पर 1500 रुपये में ब्लैक मार्केट में बिक रहा सिलेंडर
बुकिंग में अचानक बढ़ोतरी को देखते हुए तेल विपणन कंपनियों ने भी कुछ नियमों में बदलाव किया है. पहले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की दो बुकिंग के बीच 15 दिन का अंतर होता था जिसे बढ़ाकर 21 दिन कर दिया गया है।. जिन उपभोक्ताओं के पास दो सिलेंडर हैं उनके लिए दो बुकिंग के बीच का अंतर 30 दिन कर दिया गया है. यह कदम मुख्य रूप से जमाखोरी को रोकने के लिए उठाया गया है.
इसी बीच 7 मार्च को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भी 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई. इसके बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले गैर सब्सिडी सिलेंडर की कीमत 913 रुपये हो गई. वहीं 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई. हालांकि सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य सप्लाई को संतुलित रखना और जमाखोरी को रोकना है.
होरमुज जलडमरूमध्य से जुड़ी सप्लाई को लेकर लोगों में चिंता
केंद्र सरकार और उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार भारत के पास एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है. रणनीतिक भंडार और मौजूदा स्टॉक के जरिए देश की मांग को आराम से पूरा किया जा सकता है. सरकार ने इस स्थिति की निगरानी के लिए एक अंतर मंत्रालयी समूह भी बनाया है जो लगातार घरेलू सप्लाई की समीक्षा कर रहा है.
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास इतना भंडार है कि किसी भी अस्थायी आपूर्ति बाधा की स्थिति में भी मांग को पूरा किया जा सकता है. एक ऊर्जा विश्लेषक के अनुसार भारत के रणनीतिक भंडार 15 से 20 दिनों तक एलपीजी की मांग को संभाल सकते हैं जबकि कच्चे तेल का भंडार लगभग 40 से 45 दिनों तक चल सकता है.
सरकार का दावा, देश में LPG की कोई वास्तविक कमी नहीं
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी हाल ही में कहा था कि भारत में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को चिंता करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार का प्राथमिक लक्ष्य देश के नागरिकों को सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा उपलब्ध कराना है और इसके लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं.
सरकार ने सभी एलपीजी रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं ताकि देश भर में गैस की उपलब्धता बनी रहे. इसी बीच कुछ जगहों पर स्थानीय स्तर पर सप्लाई में अस्थायी रुकावट भी देखी गई है. कई एजेंसियों में अचानक बढ़ी बुकिंग के कारण वितरण व्यवस्था पर दबाव पड़ गया है.
सरकार ने उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई बनाए रखने के दिए निर्देश
कुछ एजेंसियों में एक साथ बड़ी संख्या में लोग पहुंचने से स्थिति और तनावपूर्ण दिखाई दे रही है. हालांकि डिलीवरी एजेंटों का कहना है कि एजेंसियों तक गैस की आपूर्ति लगातार हो रही है. उदाहरण के तौर पर दक्षिण दिल्ली की एक एजेंसी में सोमवार को 350 सिलेंडरों से भरा ट्रक पहुंचा.
इससे साफ है कि सप्लाई पूरी तरह बंद नहीं हुई है और गैस की उपलब्धता बनी हुई है. इसके बावजूद देश के कई हिस्सों में कतारों के दृश्य सामने आए हैं. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में भी पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें लग गईं.
निघासन, पलिया और भीरा जैसे कस्बों में अफवाह फैल गई कि जल्द ही ईंधन की राशनिंग हो सकती है. इसके बाद लोगों ने बड़ी संख्या में सिलेंडर और पेट्रोल जमा करना शुरू कर दिया. हैदराबाद, रांची, कोलकाता और गोवा के कुछ इलाकों में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली.
विशेषज्ञ बोले, कतारें दिख रही हैं पर देश में गैस का बड़ा संकट नहीं
इसका असर औद्योगिक क्षेत्र में भी दिखाई दे रहा है. उत्तर प्रदेश के खुर्जा में स्थित एक सिरेमिक फैक्ट्री के मालिक ने बताया कि उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले गैस सिलेंडर की कीमत में भी तेजी आई है. उन्होंने बताया कि युद्ध से पहले गैस की कीमत करीब 69 रुपये प्रति किलोग्राम थी जो अब बढ़कर करीब 94 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है.
इसके कारण उद्योगों को पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है और ऑर्डर भी पहले से देना पड़ रहा है. महाराष्ट्र के पुणे में स्थित वैकुंठ धाम श्मशान घाट में भी गैस आधारित अंतिम संस्कार कुछ समय के लिए रोक दिए गए. अधिकारियों ने इसकी वजह एलपीजी की कमी और घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता देना बताया.
घबराहट में लोग जल्दी-जल्दी करा रहे सिलेंडर की बुकिंग
इन सभी घटनाओं के बावजूद सरकारी अधिकारियों का कहना है कि देश में एलपीजी की कोई व्यापक कमी नहीं है. उनके अनुसार वर्तमान स्थिति मुख्य रूप से घबराहट में की जा रही बुकिंग, स्थानीय स्तर की बाधाओं और कुछ लोगों द्वारा ब्लैक मार्केट में मुनाफा कमाने की कोशिशों का परिणाम है.
विशेषज्ञों का मानना है कि जब बड़ी संख्या में लोग एक साथ सिलेंडर बुक करने लगते हैं तो वितरण व्यवस्था पर अचानक दबाव बढ़ जाता है और इससे कमी का आभास होने लगता है. इसलिए फिलहाल जो लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं वो वास्तविक कमी से ज्यादा लोगों की चिंता और घबराहट का परिणाम हैं. सरकार और ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि देश में एलपीजी की उपलब्धता स्थिर है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है.
(इनपुट- कुबूल अहमद और मीनल शर्मा)