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सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं मेधा पाटकर, प्रवासी मजदूरों का उठाया मुद्दा

याचिका में ट्रेनों के प्रावधान के लिए राज्य की सहमति पर निर्भर नहीं रहने का भी अनुरोध किया गया है. याचिका में पैदल वापस लौट रहे प्रवासियों के लिए आश्रय गृहों और भोजन के इंतजाम की मांग की गई है. साथ ही प्रवासी श्रमिकों को वित्तीय सहायता और लॉकडाउन के बाद रोजगार की योजना के लिए भी कहा गया है.

प्रवासी मजदूरों का मुद्दा लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची मेघा पाटकर प्रवासी मजदूरों का मुद्दा लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची मेघा पाटकर

  • ट्रेनों के प्रावधान के लिए राज्य की मंजूरी न हो
  • प्रवासियों के लिए भोजन की हो व्यवस्था

लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों को ढेर सारी मुसीबतों का सामना करना पड़ा है. वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने प्रवासी संकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जनहित याचिका दाखिल की है. उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि एक समान मंच बनाया जाए, जिसका उपयोग सभी प्रवासियों द्वारा टिकटिंग प्रणाली के लिए किया जा सकता है.

याचिका में ट्रेनों के प्रावधान के लिए राज्य की सहमति के अधीन नहीं होने का भी अनुरोध किया गया है. याचिका में पैदल वापस लौट रहे प्रवासियों के लिए आश्रय गृहों और भोजन के इंतजाम की मांग की गई है. साथ ही प्रवासी श्रमिकों को वित्तीय सहायता और लॉकडाउन के बाद रोजगार की योजना के लिए भी कहा गया है.

इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से फंसे प्रवासी कामगारों की परेशानियों का स्वत: संज्ञान लिया था. जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कामगारों की परेशानियों का संज्ञान लेते हुए केंद्र, राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों से 28 मई तक जवाब मांगा है.

28 मई को इन्हें न्यायालय को बताना है कि इस स्थिति पर काबू पाने के लिए उन्होंने अभी तक क्या कदम उठाए हैं.

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कोरोना इलाज को लेकर जनहित याचिका

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच सुप्रीम कोर्ट में इलाज को लेकर एक जनहित याचिका दाखिल की गई है. इस जनहित याचिका में मांग की गई है कि देश भर में निजी अस्पताल में कोरोना उपचार की लागत न्यूनतम हो और धर्मार्थ ट्रस्ट इसे बिना किसी लाभ के आधार पर करें.

इस पर सु्प्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि केंद्र यह पता लगाने की कोशिश करें कि क्या ये अस्पताल न्यूनतम लागत वसूल सकते हैं या मुफ्त भी दे सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप उन सभी अस्पताल की पहचान करें और पता करें. कोर्ट ने एक हफ्ते का वक्त दिया है.

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गौरतलब है कि देश में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 1.51 लाख के पार पहुंच गया है. अब तक 4 हजार 337 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि ठीक होने वालों का आंकड़ा 64 हजार से अधिक है. देश में 83 हजार से अधिक एक्टिव केस हैं. महाराष्ट्र में कोरोना का आंकड़ा 54 हजार को पार कर गया है.

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