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गलवान विवाद पर बोले कमल हासन- सवाल पूछना राष्ट्र विरोधी नहीं, सामने आए सच

कमल हासन का कहना है कि अगर महाबलीपुरम समिट के 8 महीने बाद यह घटना घटित होती है, तो या तो रणनीति बुरी तरह से विफल हो गई या सरकार चीन के इरादों को पढ़ने में असफल रही.

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कमल हासन (फाइल फोटो- PTI)
कमल हासन (फाइल फोटो- PTI)

  • कमल हासन ने मोदी सरकार पर साधा निशाना
  • चीन ने हमारी पीठ पर छुरा घोंपा: कमल हासन

LAC पर भारत और चीन के बीच जारी तनाव पर अभिनेता से राजनेता बने कमल हासन ने रविवार को बयान दिया है. गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों की हुई हिंसक झड़प पर कमल हासन ने मोदी सरकार से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करने वाला बयान दिया है. उन्होंने सरकार से तथ्यों को सामने लाने का अनुरोध किया है, जिससे अफवाहों को रोका जा सके. कमल हासन ने ये भी कहा कि चीन ने हमारे निहत्थे सैनिकों को मारकर हमारे पीठ में छुरा घोंपा है.

कमल हासन ने अपने बयान में कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने चीन का सबसे ज्यादा बार दौरा किया. महाबलीपुरम समिट को भी एक राजनयिक सफलता माना गया था. कमल हासन ने कहा कि अगर समिट के 8 महीने बाद यह घटना घटित होती है, तो या तो रणनीति बुरी तरह से विफल हो गई या सरकार चीन के इरादों को पढ़ने में असफल रही.

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सरकार पर साधा निशाना

मकक्ल नीधि माईम पार्टी (एमएनएम) के संस्थापक का यह भी कहना है गलवान घाटी में जारी तनाव पूरे देश में गूंज रहा है. चीन ने दावा किया है कि पूरी गलवान घाटी उसकी है और भारत का उसपर कोई अधिकार नहीं है.

कमल हासन ने सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणियों पर सवाल उठाने वालों की आलोचना के लिए केंद्र सरकार की खिंचाई की है. बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि लद्दाख में भारत की सीमा में न तो कोई घुसा हुआ है और न ही हमारी कोई चौकी किसी दूसरे के कब्जे में है.

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एमएनएम प्रमुख ने कहा कि इस तरह के बयान देकर लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. मैं पीएम मोदी और उनके समर्थकों से अनुरोध करता हूं कि वे ऐसा करना बंद करें. कमल हासन ने कहा कि सवाल पूछना राष्ट्र-विरोधी नहीं है. हम तब तक सवाल पूछना जारी रखेंगे, जब तक कि सच्चाई नहीं बताई जाती है. क्योंकि प्रधानमंत्री का बयान सेना और विदेश मंत्रालय के बयान से विरोधाभासी है.

'चीन ने पीठ में छुरा घोंपा'

कमल हासन ने कहा कि कुछ सूचनाओं को गोपनीय रखा जा सकता है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का कर्तव्य था कि इस संवेदनशील समय में सरकार को देश को बेहतर तरीके से सूचित करना चाहिए था. उन्होंने यह भी सवाल किया कि हिंसक झड़प का मतलब यह था कि प्रधानमंत्री और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पिछले साल अक्टूबर में हुई बैठक के बाद सरकार द्वारा दावा की गई राजनयिक सफलता खोखली थी.

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मकक्ल नीधि माईम पार्टी (एमएनएम) के संस्थापक ने कहा कि आठ महीने बाद चीन ने हमारे निहत्थे सैनिकों को मारकर हमारी पीठ में छुरा घोंपा. अगर यह सरकार की कूटनीति का नतीजा है, तो या तो उनकी रणनीति बुरी तरह विफल रही या वे चीन के इरादों को सही ढंग से भांपने में विफल रहे.

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