सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर ने रविवार को कहा है कि एक संस्था के तौर पर न्यायपालिका विश्वसनीयता के संकट का सामना कर रही है. इसके भीतर से मिलने वाली यह बड़ी चुनौती है. उन्होंने जजों से अपने कर्तव्यों के प्रति सचेत रहने को कहा.
बड़ी तादाद में मामलों के लंबित होने पर चिंता जताए जाने पर ठाकुर ने कहा कि जजों के अतिरिक्त घंटे बैठने के तैयार होने पर भी मामलों के निपटारे में बार असोसिएशन बहुत मददगार नहीं रहा है.
बार मदद करे तो शनिवार को भी बैंठेंगे जज
इलाहाबाद हाई कोर्ट के 150वें स्थापना वर्ष के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ने कहा, 'कभी-कभी जजों को लगता है कि 'बार' के मदद न करने से भी मामलों के निपटारे में देरी होती है.' चीफ जस्टिस ने कहा कि वह वकीलों को आश्वस्त कर सकते हैं कि अगर बार मदद करता है तो जज पुराने मामलों का निपटारा करने के लिए शनिवार को भी बैठने को तैयार हैं, खास तौर पर बरसों से जेल में कैद लोगों के मामलों में.
Judges need to be conscientious in discharge of their duty- CJI TS Thakur at Allahabad HC's 150th anniversary event
— ANI UP (@ANINewsUP)
चुनौतियों के सामने हमेशा आगे बढ़े जज
इलाहाबाद हाई कोर्ट के गौरवपूर्ण इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनके लिए यह बड़े गर्व की बात है कि पंडित मोतीलाल नेहरू, पंडित जवाहरलाल नेहरू, तेज बहादुर सप्रू और कैलाश नाथ काटजू उनके गृह राज्य जम्मू कश्मीर से थे. उन्होंने कहा कि इस अदालत ने मुश्किल वक्त देखे हैं, कई मुश्किल चुनौतियों का भी सामना किया है, लेकिन जज उस वक्त आगे बढ़े हैं.
When I talk about challenges we face from within, I am referring to the crisis of creditability that we face in country today- TS Thakur
— ANI UP (@ANINewsUP)
हमेशा लोक निगरानी में है न्यायपालिका
ठाकुर ने कहा कि अपनी जिम्मेदारी निभाई है, लेकिन सिर्फ अतीत की उपलब्धियों पर खुश नहीं रहा जा सकता. उन्होंने कहा, 'भविष्य में हमारे सामने बड़ी चुनौतियां हैं और हमें उनसे निपटने के लिए तैयार रहने की जरूरत है. जुडिशरी एक संस्था है. जैसा कि हम बखूबी जानते हैं, यह हमेशा ही लोक निगरानी में रही है और चुनौतियां न सिर्फ अंदर से हैं बल्कि बाहर से भी हैं.'
परेशान नहीं करती बाहरी चुनौतियां
उन्होंने कहा, ' हमें परेशान नहीं करती. हम उनका बखूबी सामना करते हैं, लेकिन हमें याद करना होगा और हमें जिन चीजों के बारे में सचेत होने की जरूरत है, वे हमारे ही बीच से आने वाली चुनौतियां हैं.'