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महिला दिवस स्पेशलः सीमा पर तैनात हैं BSF की महिला जांबाज

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में आपको सीमा पर तैनात कुछ ऐसी ही बीएसएफ की महिला जवानों से परिचय करा रहे हैं, जो ड्यूटी के समय बॉर्डर पर मां दुर्गा, युद्ध के समय मां काली और घर में लक्ष्मी और मां शारदा का रूप लिए हैं.

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'या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:’ दुष्टों का संहार करने वाली मां दुर्गा के आह्वान के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है. राक्षस महिषासुर का दमन करने के लिए उस समय मां दुर्गा की उत्पत्ति की कथा तो हमने सुनी है, लेकिन वर्तमान में भी मां दुर्गा की कुछ ऐसे ही प्रतिरूप महिलाएं पड़ोसी मुल्क से रक्षा करने के लिए हाड़ कंपा देने वाली सर्दी हो या झुलसा देने वाली गर्मी हर मौसम में सीमा पर खड़ी हुई हैं.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में आपको सीमा पर तैनात कुछ ऐसी ही बीएसएफ की महिला जवानों से परिचय करा रहे हैं, जो ड्यूटी के समय बॉर्डर पर मां दुर्गा, युद्ध के समय मां काली और घर में लक्ष्मी और मां शारदा का रूप लिए हैं.

अलवर निवासी सीमा देवी की शादी होशियारपुर पंजाब निवासी बीएसएफ जवान सुरेश से हुई. सीमा और सुरेश के चार व पांच साल के दो बच्चे हैं. 2011 में देशभक्त सुरेश की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई, लेकिन देश सेवा का जज्बा यहीं समाप्त नहीं हुआ. घर का कामकाज संभालने वाली सीमा ने पति की मौत के बाद देश सेवा का दायित्व अपने कंधों पर लिया और कड़ी ट्रेनिंग के बाद सीमा सुरक्षा बल का अहम हिस्सा बन गईं.

भारत-पाक सीमा की श्री गंगा नगर  सीमा चौकीयों पर बीएसएफ कि महिला जांबाज सिपाहियों की पहली टोली सरहद की रक्षा के लिए बुलंद हौसले के साथ खड़ी है. कड़ाके की ठण्ड हो या लू के थपेड़ो से बदन को झुलसा देने वाली गर्मी. तमाम विषम परिस्‍थितियों को हराते हुए ड्यूटी कर रही यह सिपाही उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो खुद को किसी से कमतर आंकती है.

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श्रीगंगानगर सेक्टर की करीब 80 किमी लम्बी बॉर्डर लाइन पर 35 महिला सिपाही और अधिकारी तैनात हैं. पेट्रोलिंग के दौरान कई ऐसे मौके भी आये जब बॉर्डर पर घुसपैठ कि कोशिश को इन महिला जवानों ने पूरे आत्मविश्वाश के साथ विफल किया है.

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