भारत में हवाई यात्रा जल्द महंगी हो सकती है. देश की प्रमुख एयरलाइन IndiGo ने घोषणा की है कि वह 14 मार्च से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज लगाएगी. कंपनी के बयान के अनुसार यह शुल्क 425 रुपये से लेकर 2300 रुपये तक हो सकता है.
सूत्रों के अनुसार भारत की अन्य बड़ी एयरलाइंस जैसे स्पाइसजेट और अकासा एयर भी टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज लगाने पर विचार कर रही हैं. यह कदम एअर इंडिया द्वारा टिकट कीमतों में बढ़ोतरी के बाद उठाया जा रहा है.
एयरलाइंस का कहना है कि जेट फ्यूल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी के कारण संचालन लागत बढ़ गई है. एविएशन टरबाइन फ्यूल, जिसे एटीएफ कहा जाता है, किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होता है. मार्च 2026 की शुरुआत से इसकी कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है.
मिडिल ईस्ट में जंग युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मूज ने बढ़ाई तेल की कीमतें
मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ा है. इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. सूत्रों के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने की आशंका के कारण भी तेल बाजार में दबाव बढ़ गया है.
एयरलाइंस के सामने एक और चुनौती भारतीय रुपये की डॉलर के मुकाबले कमजोरी भी है. उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि महंगे कच्चे तेल और कमजोर रुपये का असर एयरलाइन कंपनियों पर दोहरी मार की तरह पड़ रहा है. एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने पहले ही टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज लागू कर दिया है. यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है.
स्पाइसजेट और अकासा एयर भी फ्यूल चार्ज पर विचार कर रही हैं
पहला चरण 12 मार्च से लागू हो चुका है, जिसमें घरेलू उड़ानों और सार्क देशों के लिए यात्रा पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है. दूसरा चरण 18 मार्च से लागू होगा, जिसमें यूरोप, उत्तर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जाने वाली उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया जाएगा. तीसरे चरण की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है. इस चरण में हांगकांग, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे फार ईस्ट बाजारों की उड़ानों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा.