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जानिए, भारतीय एंटी सैटेलाइट मिसाइल की ABCD, कितना घातक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार दोपहर 12:20 बजे देश को बताया कि भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में उपग्रह मार गिराने का सफल परीक्षण कर लिया है. असल में एंटी-सैटेलाइट मिसाइल है क्या? भारत में कौन सी मिसाइल इसमें उपयोग की जाती है? उसकी क्षमता कितनी है? जानिए इन सवालों के जवाब. 

 पृथ्वी एयर डिफेंस (पैड) सिस्टम.(file) पृथ्वी एयर डिफेंस (पैड) सिस्टम.(file)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार दोपहर 12:20 बजे देश को बताया कि भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में उपग्रह मार गिराने का सफल परीक्षण कर लिया है. असल में एंटी-सैटेलाइट मिसाइल है क्या? भारत में कौन सी मिसाइल इसमें उपयोग की जाती है? उसकी क्षमता कितनी है? जानिए इन सवालों के जवाब.  

भारत के पास एंटी-सैटेलाइट मिसाइल के लिए पृथ्वी एयर डिफेंस (पैड) सिस्टम है. इसे प्रद्युम्न बैलिस्टिक मिसाइइल इंटरसेप्टर भी कहते हैं. यह एक्सो-एटमॉसफियरिक (पृथ्वी के वातावरण से बाहर) और एंडो-एटमॉसफियरिक  (पृथ्वी के वातावरण से अंदर) के टारगेट पर हमला करने में सक्षम हैं. यह दो स्टेज की बैलिस्टिक मिसाइल है.

इंडिया टुडे से बात करते हुए पूर्व डीआरडीओ चीफ वीके सारस्वत ने बताया कि हमारे वैज्ञानिकों ने पुराने मिसाइल सिस्टम को अपग्रेड किया है. उसमें नए एलीमेंट जोड़े हैं. इसका मतलब ये है कि पहले से मौजूद पैड सिस्टम को अपग्रेड कर तीन स्टेज वाला इंटरसेप्टर मिसाइल बनाया गया. फिर इस परीक्षण में उसी मिसाइल का इस्तेमाल किया गया.

पैड सिस्टम की शुरुआती क्षमता

रेंज : 2000 किमी

गति: 1470 से 6126 किमी प्रति घंटा

 (हालांकि, बाद में इसे अपग्रेड कर और भी ताकतवर और घातक बनाया गया है)

कैसे लॉन्च किया एंटी-सैटेलाइट मिसाइल

डीआरडीओ ने बैलिस्टिक इंटरसेप्टर मिसाइल के जरिए 300 किमी की ऊंचाई पर मौजूद उपग्रह को मार गिराया. यह मिसाइल भुवनेश्वर से 150 किमी दूर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम व्हीलर आइलैंड से छोड़ी गई. तीन स्टेज के इस इंटरसेप्टर मिसाइल में दो रॉकेट बूस्टर्स हैं. मिशन कंट्रोल सेंटर को मिसाइल के जरिए जो डाटा मिला है, उसकी बदौलत मिशन के 100 फीसदी सफलता की पुष्टि हुई है.

9 साल पहले सांइस कांग्रेस डीआरडीओ डायरेक्टर ने किया था खुलासा

9 साल पहले तिरुवनंतपुरम में हुए 97वें इंडियन साइंस कांग्रेस में डीआरडीओ के जनरल रुपेश ने पहली बार घोषणा की थी कि भारत दुश्मन के उपग्रहों को उसकी कक्षा में ही गिराने की जरूरी टेक्नोलॉजी विकसित कर रहा है. 10 फरवरी 2010 में डीआरडीओ के डायरेक्टर जनरल और रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. वीके सारस्वत ने कहा था कि भारत के पास लो अर्थ और पोलर ऑर्बिट में मौजूद दुश्मन के उपग्रहों को मार गिराने के जरूरी सामान हैं.

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