द्विपक्षीय रिश्तों में नए युग का सूत्रपात करते हुए भारत और फ्रांस ने मंगलवार को भारत को 34 साल के वनवास से वापस परमाणु मुख्यधारा में लाने वाले पहले ठोस कदम के तहत ऐतिहासिक असैनिक परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसमें रिएक्टरों और परमाणु ईधन की आपूर्ति शामिल है.
एलिसी पैलेस में यहां राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी के साथ बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि हम अन्य यूरोपीय साझेदारों के साथ भी समझौते को अंतिम रूप देने की उम्मीद करते हैं.
45 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) से परमाणु व्यापार की छूट मिलने के बाद फ्रांस पहला देश है जिसने भारत के साथ परमाणु व्यापार का दरवाजा खोला है. भारत-अमेरिका परमाणु करार को कांग्रेस की मंजूरी का इंतजार है और इस बारे में दोनों देशों के बीच जल्द समझौते की उम्मीद है.
परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोदकर और फ्रांस के विदेश मंत्री बर्नार्ड कोचनर द्वारा दोनों नेताओं की मौजूदगी में भारत फ्रांस असैनिक परमाणु सहयोग समझौते के बाद सिंह ने कहा कि आज हमने असैनिक परमाणु सहयोग पर अंतर सरकार समझौते पर हस्ताक्षर कर हमारी सामरिक साझेदारी में नया आयाम जोड़ा है.
समझौता मूल और अनुप्रायोगिक अनुसंधान से लेकर पूर्ण असैनिक परमाणु सहयोग तक में व्यापक द्विपक्षीय सहयोग का आधार बनेगा जिसमें रिएक्टर ईधन आपूर्ति, परमाणु सुरक्षा विकिरण और पर्यावरण संरक्षण तथा परमाणु ईधन चक्र प्रबंधन शामिल होगा.
परमाणु समझौता उन तीन समझौते में एक है जिन पर सिंह की दो दिन की पेरिस यात्रा के दौरान दस्तखत किया गया। दो अन्य सामाजिक सुरक्षा मामलों और भारतीय धु्रवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (पीएसएलवी) प्रक्षेपण सेवाओं के बारे में हैं. सामाजिक सुरक्षा समझौते से एक-दूसरे के देशों में पांच साल तक की अल्पकालिक अवधि तक रहने वाले भारतीय और फ्रांसीसी नागरिकों को लाभ होगा, जबकि धु्रवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन समझौता दीर्घकालिक उपयोग से जुड़ा है.