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पीएम मोदी के पास आया सुझाव, नोटों पर छपनी चाहिए अंबेडकर और विवेकानंद की तस्वीरें

सालों से नोटों पर छप रही महात्मा गांधी की तस्वीर के साथ ही अब बीआर अंबेडकर और स्वामी विवेकानंद की तस्वीरें भी नजर आ सकती हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुझाव मिला है कि बाकी देशों की तरह भारत में भी नामचीन लोगों की तस्वीरें नोटों पर छपनी चाहिए.

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सालों से नोटों पर छपती आ रही है गांधी की तस्वीर
सालों से नोटों पर छपती आ रही है गांधी की तस्वीर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास एक अकादमिक और नीति विशेषज्ञ की तरफ से प्रपोजल आया है, जिसमें कहा गया है कि अब नोटो पर महात्मा गांधी के साथ-साथ बीआर अंबेडकर और स्वामी विवेकानंद की तस्वीरें भी छपनी चाहिए. अगर पीएम मोदी इस प्रपोजल को मान लेते हैं तो नोटों पर इन दिवंगत नेताओं की तस्वीरें भी नजर आ सकती हैं.


ये सुझाव नरेन्द्र जाधव ने भेजा है, जो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई वाली नेशनल एडवाजरी काउंसिल के सदस्य रह चुके हैं. इसके अलावा वो कांग्रेस की सत्ता के दौरान योजना आयोग के भी सदस्य थे. फिलहाल वे डॉ. अम्बेडकर की 125वीं जयन्ती समारोह के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय समिति में छह गैर सरकारी सदस्यों में से एक हैं.


नरेंद्र जाधव ने कहा कि किसी भी देश की करंसी पर बड़े और दिग्गज लोगों की तस्वीरें छपती हैं. जाधव ने कहा कि भारत में 1996 से सभी नोटों पर सिर्फ महात्मा गांधी की ही तस्वीर छपती आ रही है और इसमें बदलाव करना एक बड़ा कदम होगा. जाधव ने इस प्रपोजल की पुष्टि करते हुए कहा, 'मैंने कमिटी की पहली मीटिंग में पीएम को ये सुझाव दिया था. मैंने कहा कि यूएस और यूके की करंसियों पर कई बड़ी हस्तियों की तस्वीरें छपती हैं और ऐसा भारत में भी हो सकता है. हम भी बीआर अंबेडकर और स्वामी विवेकानंद की तस्वीरें अपने नोटों पर छपवा सकते हैं.' उन्होंने कहा कि उनके सुझाव पर सहमति बनती है या नहीं, वो तो वक्त ही बताएगा लेकिन हाल ही में सरकार डॉ. अंबेडकर की छवि वाला सिक्का तो जारी कर ही चुकी है.

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जाधव ने की अंबेडकर की तारीफ
नरेंद्र जाधव ने कहा कि डॉ अंबेडकर एक अर्थशास्त्री थे और उन्होंने रिजर्व बैंक की स्थापना में अपना बौद्धिक योगदान भी दिया था. उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द भी राजनीति में काफी सक्रिय रहे है.


1996 से पहले भारत के नोटों पर महात्मा गांधी के अलावा अशोक स्तंभ की तस्वीर भी छपा करती थी. लेकिन पिछले कुछ सालों से सिर्फ गांधी की तस्वीर को ही छापा जा रहा है.

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