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RSS के मंच पर प्रणब के भाषण को अपने पक्ष में बताने की कांग्रेस-BJP में मची होड़

आरएसएस के मंच पर दिया गया पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का भाषण अपने आप में बेहद खास रहा. खास इसलिए क्योंकि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां इसे अपने विचार की जीत और दूसरे को नसीहत बता रही हैं.

RSS प्रमुख मोहन भागवत और प्रणब मुखर्जी RSS प्रमुख मोहन भागवत और प्रणब मुखर्जी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय वर्ष शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का भाषण अपने आप में बेहद खास रहा. खास इसलिए क्योंकि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां इसे अपने विचार की जीत और दूसरे को दी गई नसीहत बता रही हैं.

प्रणब मुखर्जी द्वारा RSS के कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता स्वीकार किए जाने का कांग्रेस नेताओं ने जमकर विरोध किया था. कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने प्रणब मुखर्जी से RSS के कार्यक्रम में नहीं जाने की अपील की, लेकिन वो नहीं माने. हालांकि कांग्रेस पार्टी ने आधिकारिक तौर पर प्रणब मुखर्जी को लेकर कोई बयान नहीं जारी किया था.

आरएसएस के मंच से प्रणब के भाषण के बाद कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति ने आरएसएस को उसके मुख्यालय में ही आईना दिखाने का काम किया है कि विविधता, सहिष्णुता और बहु-सांस्कृतिकवाद ही लोकतंत्र का भारतीय तरीका है.

सुरजेवाला ने कहा कि मुखर्जी ने आरएसएस को भारत का इतिहास याद दिलाया है. उन्होंने बताया है कि भारत की सुंदरता विचारों, धर्मों, भाषाओं की विविधता के प्रति सहिष्णुता में है. क्या आरएसएस सुनने को तैयार है?

वहीं, दूसरी ओर जिस तरह पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी आरएसएस के तृतीय वर्ष शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में पहुंचे और संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के जन्मस्थल पहुंचकर उनको श्रद्धांजलि दी, उससे बीजेपी और आरएसएस गदगद नजर आ रहे हैं.

इस दौरान प्रणब मुखर्जी ने हेडगेवार को भारत माता का महान सपूत करार दिया, जिसको बीजेपी और आरएसएस अपनी सबसे बड़ी जीत बता रहे हैं. बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, 'प्रणब जी ने अपने भाषण की शुरुआत ही भारत को पहला राष्‍ट्र बताते हुए की. यही तो हमारा विचार है.'

जब हेडगेवार को भारत मां का सपूत बताने पर सुरजेवाला से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि मेहमान के तौर पर प्रणब मुखर्जी ने जो बातें कहीं है, उन पर चर्चा होनी चाहिए अनावश्यक औपचारिकताओं पर नहीं.'

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