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पहला मैच सबसे यादगार लम्हा: तेंदुलकर

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20 वर्ष पूरा करने से मात्र कुछ दिन दूर सचिन तेंदुलकर ने कहा कि 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में भारत के लिए पहला मैच उनके सुनहरे कैरियर का सबसे यादगार लम्हा है.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20 वर्ष पूरा करने से मात्र कुछ दिन दूर सचिन तेंदुलकर ने कहा कि 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में भारत के लिए पहला मैच उनके सुनहरे कैरियर का सबसे यादगार लम्हा है.

अंतिम एकादश में शामिल होना सबसे बड़ा लम्‍हा
पाकिस्तान के खिलाफ कराची में 15 नवंबर 1989 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले तेंदुलकर ने कहा कि बीस वर्ष लम्बा समय है और मेरे जीवन में कई विशेष लम्हें हैं और इनकी गिनती करना मुश्किल है. लेकिन पहला (टेस्ट) लम्हा, पाकिस्तान में अंतिम एकादश में शामिल होकर पहले दिन मैदान पर उतरना शायद सबसे बड़ा लम्हा है.

देश के प्रति मेरा योगदान
उन्होंने कहा कि यह लंबी यात्रा थी और इसके बाद मैंने जो किया वह देश में इस खेल के प्रति मेरा योगदान है. देश के लिए खेलना मेरे बचपन का सपना था और मैंने अपना सपना पूरा कर लिया. मैं भाग्यशाली हूं कि अपने देश के लिए इतने समय तक खेल पाया. यह पूछने पर कि 20 साल के उनके कैरियर में खेल में क्या बदलाव आये तो तेंदुलकर ने ट्वेंटी20 की शुरूआत, अंपायरों की मदद के लिए टीवी रीप्ले का प्रयोग और बल्लेबाजी में किये गये प्रयोगों को चुना.

उन्होंने कहा कि 1989 के बाद तीसरे अंपायर का उपयोग से लेकर ट्वेंटी20 में हाट स्पाट और कई अन्य चीजों जैसे खेल में काफी बदलाव हुए.

क्रिकेट अब जोखिम भरे शॉट लिए जा रहे हैं
तेंदुलकर ने कहा कि सबसे अहम बात यह है कि कई नये शाट पहले बल्लेबाज कभी कभार खेलते थे लेकिन अब खेले जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब खिलाड़ी अधिक जोखिम ले रहे हैं. इसी वजह से वनडे क्रिकेट में बड़े स्कोर बन रहे हैं. अब अच्छी पिच पर 275 का स्कोर आदर्श नहीं कहा जाता.

हर मैच के साथ बेहतर करने की कोशिश
उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में भी ऐसा ही है. अब पहले से ज्यादा नतीजे निकल रहे हैं. पहले लोग टेस्ट क्रिकेट से उब जाते थे क्योंकि नतीजे कम निकलते थे लेकिन अब अधिक परिणामोन्मुखी मैच हो रहे हैं. यह पूछने पर कि पिछले 20 साल में उनका खेल कितना बदला है, तेंदुलकर ने कहा कि मैं बहुत बदल गया हूं. मैं हर मैच के साथ बेहतर होने की कोशिश करता हूं. यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और दिन एक नयी चुनौती है.

उन्होंने कहा कि मेरे माता पिता, भाई, बहन और पत्नी ने हमेशा मेरा साथ दिया. मेरी मां क्रिकेट नहीं समझती लेकिन मेरी और देश की कामयाबी के लिये प्रार्थना करती है. मैंने अपने बड़े भाई से क्रिकेट पर बहुत बात की. दूसरे भाई और बहन ने भी मेरा साथ दिया. मैं अपनी पत्नी से भी क्रिकेट के बारे में बात करता हूं और यही वजह है कि मैं इतने समय तक टिक सका.

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