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7 हजार करोड़ लेकर फरार हैं अडाणी के रिश्तेदार, मोदी सरकार ने कराई एफआईआर

रिपोर्ट के मुताबिक एफआईआर में जतिन मेहता के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और सरकारी कर्मचारियों के दुरुपयोग का मामला दर्ज किया गया है.

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जतिन मेहता
जतिन मेहता

देश के बड़े डिफाल्टरों के खिलाफ केंद्र सरकार ने नकेल कसनी शुरू कर दी है. विजय माल्या के प्रत्यर्पण के लिए सीबीआई और ईडी की एक संयुक्त टीम इन दिनों लंदन में है, तो दूसरी ओर सरकार ने दूसरे सबसे बड़े डिफाल्टर जतिन मेहता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है.

जतिन मेहता विनसम डायमंड्स एंड ज्वैलरी लिमिटेड के चीफ प्रमोटर हैं. टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के मुताबिक एफआईआर में उनके खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और सरकारी कर्मचारियों के दुरुपयोग का मामला दर्ज किया गया है.

मेहता का संबंध देश के बड़े कारोबारियों में से एक अडाणी परिवार से भी है. रिश्ते में जतिन मेहता उनके समधी लगते हैं. जतिन मेहता पर 7 हजार करोड़ लेकर फरार होने का आरोप है और 2012 से उनकी कोई खबर नहीं है.

बता दें कि जतिन मेहता ने यूपीए शासन के दौरान प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के 13 बैंकों से 7 हजार करोड़ रुपये कर्ज के रूप में लिये, जबकि इसके एवज में उन्होंने कोई भी ठोस संपत्ति एक्सचेंज के रूप में ऑफर नहीं की.

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क्या है पूरा मामला
1. बैंकों ने इंटरनेशनल बुलियन बैंक के नाम पर कर्ज किया.

2. इंटरनेशनल बुलियन बैंक विनसम ग्रुप को गोल्ड की सप्लाई करते हैं.

3. मेहता का दावा है कि यूएई में चलने वाली 13 कंपनियां उनकी ग्राहक हैं.

4. इनमें से 12 कंपनियां अबू अबेदा के पास हैं और 1 कंपनी को सुनील मेहता चलाते हैं.

5. जतिन मेहता का दावा है कि यूएई के ग्राहक पैसा लौटा पाने में असमर्थ हैं.

6. जांच एजेंसियों के मुताबिक विनसम के यूएई ग्राहकों में बेनामी कंपनियां हैं.

7. पनामा पेपर्स के मुताबिक जतिन मेहता ने बैंकों से कर्ज ली गई राशि को बहामास में निवेश किया है.

8. मेहता ने 2012 में भारत छोड़ दिया और 2016 में सेंट किट्स एंड नेविस की नागरिकता ले ली.

9. बता दें कि सेंट किट्स और नेविस के साथ भारत का कोई प्रत्यर्पण समझौता नहीं है.

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