लोकसभा चुनाव में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) की ओर से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सिस्ट (सीपीएम) और गोनगू नाडु डेमोक्रेटिक पार्टी (केएनडीपी) को चंदे के रूप में करोड़ों रुपये देने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है.
डीएमके की ओर से चुनाव आयोग को दिए ब्यौरे के मुताबिक, पार्टी ने सीपीआई को 15 करोड़, सीपीएम को 10 करोड़ रुपये चुनाव लड़ने के लिए दिए थे. इसके अलावा डीएमके ने गोनगू नाडु डेमोक्रेटिक पार्टी को 15 करोड़ रुपये चंदे के रूप में दिए थे.
चुनाव आयोग को 14 अगस्त को दाखिल किए गए अपने हलफनामे में डीएके ने खुलासा किया है कि उनकी पार्टी ने 3 पार्टियों को कुल 40 करोड़ का चंदा दिया है.
In an election expenditure affidavit filed by Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) before the Election Commission on August 14, DMK had stated to have donated Rs 40 crore to CPI&its allies during Lok Sabha Elections & by-elections to Legislative Assemblies in Tamil Nadu& Puducherry. pic.twitter.com/bhJ0dEqoc2
— ANI (@ANI) September 26, 2019
इन दोनों पार्टी के नेताओं ने आर्थिक मदद मिलने की बात दबी जुबान में मान ली है. हालांकि, चुनाव आयोग की निगाह में बड़ी पार्टियों का अपनी गठबंधन में सहयोगी छोटी पार्टियों को चुनावी मदद के लिए चंदा देना कोई अजूबा नहीं है.
वामपंथी पार्टियों के लिए ये उनके कथित साम्यवादी उसूलों के खिलाफ जरूर है, जिसमें ये पूंजीवाद की मुखालफत करते हुए चुनाव खर्च घटाने की वकालत करते रहे हैं. संसद में ये पार्टियां अपनी सीटों का दो अंकों का आंकड़ा भले ना हासिल कर पाई, लेकिन करोड़ों का चंदा लेने में तो आगे आगे रहीं.