आईपीसी ऑफिसर अब्दुर रहमान ने नागरिकता संशोधन बिल पास होने के विरोध में नौकरी से इस्तीफा दे दिया है. अब्दुर रहमान महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग में बतौर आईजीपी पोस्टेड थे. अब्दुर रहमान ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया, ‘नागरिकता संशोधन बिल संविधान के मूल ढांचा के खिलाफ है. मैं इस बिल की मुखालफत करता हूं. मैंने सविनय अवज्ञा में कल से ऑफिस नहीं जाने का फैसला किया है. आखिरकार मैं अपनी सेवा से इस्तीफा दे रहा हूं.’
अब्दुर रहमान ने अपने ट्वीट के साथ एक इस्तीफा भी पोस्ट किया है. इसमें उन्होंने वीआरएस की मांग की थी. इस इस्तीफे में उन्होंने लिखा, ‘मैंने वीआरएस के लिए एक अगस्त 2019 को आवेदन किया था. इसके बाद 25 अक्टूबर 2019 को राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को मेरे वीआरएस की सिफारिश भेजी थी, लेकिन गृह मंत्रालय ने स्वीकार नहीं किया.’
The is against the basic feature of the Constitution. I condemn this Bill. In civil disobedience I have decided not attend office from tomorrow. I am finally quitting the service.
— Abdur Rahman (@AbdurRahman_IPS)
अब्दुर रहमान ने यह भी कहा, ‘मेरे खिलाफ कोई विभागीय जांच भी नहीं लंबित है. ने जल्दबाजी में मेरे वीआरएस के आवेदन को रद्द किया है.’ हालांकि सूत्रों का कहना है कि अब्दुर रहमान के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है और वो पहले भी वीआरएस के लिए आवेदन कर चुके हैं. अब्दुर रहमान ने अपने आवेदन में भी अंदर लिखा है कि वो निजी कारणों से इस्तीफा दे रहे हैं.
This Bill is against the religious pluralism of India. I request all justice loving people to oppose the bill in a democratic manner. It runs against the very basic feature of the Constitution.
— Abdur Rahman (@AbdurRahman_IPS)
अब्दुर रहमान ने अपने ट्विटर हैंडल से एक और ट्वीट किया है. इस दूसरे ट्वीट में उन्होंने एक दूसरा लेटर पोस्ट किया है. इसमें उन्होंने कहा है कि नागरिकता संशोधन बिल भारत के धार्मिक बहुलवाद के खिलाफ है. लिहाजा मैं सभी न्यायप्रिय लोगों से इस बिल का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने की अपील करता हूं. यह बिल संविधान ने मूल ढांचे के खिलाफ है. यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 25 का उल्लंघन करता है.
वहीं, बुधवार को संसद से बिल पास हो गया. लोकसभा से पास होने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल को पेश किया था. इसके बाद इस बिल पर लंबी चर्चा हुई और बुधवार को ही राज्यसभा से बिल पास हो गया. अब यह बिल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून बन जाएगा.