लोकसभा चुनावों में खर्च के मामले में कांग्रेस सहित अन्य दलों की तुलना में बीजेपी काफी आगे है. चुनाव आयोग को दलों की तरफ से सौंपे गए चुनावी खर्च के ब्यौरे के मुताबिक बीजेपी पिछले आम चुनावों में 448.66 करोड़ रुपये खर्च करके भी चुनाव हार गई.
सत्तारूढ़ कांग्रेस ने 380.04 करोड़ रुपये खर्च किए जो विपक्षी दल की तरफ से खर्च की गई राशि से 68.62 करोड़ रुपये कम है.
बीजेपी के कुल चुनावी खर्च में से पार्टी के केंद्रीय कार्यालय की तरफ से 162.69 करोड़ रुपये खर्च किए गए जबकि 285.98 करोड़ रुपये राज्य स्तर पर खर्च किए गए.
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों की तरफ से दिए गए खर्च के ब्यौरे में विभिन्न स्रोतों से उन्हें प्राप्त धन के बारे में भी दिलचस्प जानकारी है. दान में मिली ज्यादातर राशियां नकद हैं न कि पारदर्शी तरीके से हासिल की गई है.
आंकड़ों की तह तक जानें पर पता चलता है कि कांग्रेस को मिले कुल धन में से केवल 24 फीसदी ही चेक और डिमांड ड्राफ्ट से मिला है जबकि शेष नकद में हासिल हुआ. बीजेपी को करीब आधा धन (49 फीसदी) चेक और डिमांड ड्राफ्ट से मिला. लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को 313. 74 करोड़ रुपये दान में मिले.
इसमें से पार्टी को 237.36 करोड़ रुपये नकद मिले और केवल 76.38 करोड़ रुपये चेक और डिमांड ड्राफ्ट से मिले.
बीजेपी को 478.61 करोड़ रुपये चेक और डिमांड ड्राफ्ट से मिले. शेष 239.73 करोड़ रुपये बीजेपी को केंद्र और राज्य स्तर पर नकद में हासिल हुए.
बीजेपी की तरफ से चुनाव आयोग को दिए गए ब्यौरे के मुताबिक वर्ष 2009 के लोकसभा प्रचार अभियान के दौरान बीजेपी द्वारा जुटाए गए कुल धन में 163.03 करोड़ रुपये पार्टी के केंद्रीय कार्यालय को प्राप्त हुए जबकि 315.58 करोड़ रुपये राज्य कार्यालयों के माध्यम से आए. अन्य राष्ट्रीय दलों में बीएसपी ने पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान 21.23 करोड रुपये खर्च किए.
मायावती के नेतृत्व वाली पार्टी को 2009 के लोकसभा चुनावों के दौरान दो मार्च से 28 मई 2009 को चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक 33.16 करोड़ रुपये हासिल हुए थे.
बीएसपी को चेक और डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से 20 हजार रुपये हासिल हुए जबकि शेष राशि नकदी में हासिल हुई.
यूपीए की सहयोगी शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने कुल 26.17 करोड़ रुपये खर्च किए जिसमें राज्य स्तर पर 18.26 करोड़ रुपये खर्च किए गए और राष्ट्रीय, केंद्रीय मुख्यालय स्तर पर 7.91 करोड़ रुपये खर्च किए गए. पार्टी को केंद्रीय स्तर पर 8.38 करोड़ रुपये हासिल हुए थे.
समाजवादी पार्टी ने पिछले आम चुनावों में 21.49 करोड़ रुपये खर्च किए जबकि टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) ने केवल 89.97 लाख रुपये खर्च किए.
अन्नाद्रमुक का खर्च 12.17 करोड़ रुपये रहा जिसमें पार्टी के मुताबिक 8.07 करोड़ रुपये ‘चुनाव से संबंधित नहीं’ थे. पार्टी को 17.98 करोड़ रुपये का कोष हासिल हुआ. तमिलनाडु की द्रमुक ने पिछले चुनावों में 7.77 करोड़ रुपये खर्च किए.