गांधीवादी कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने योगगुरू बाबा रामदेव पर पिछले दिनों रामलीला मैदान में हुई कार्रवाई के विरोध में राजघाट पर अपना एक दिवसीय अनशन शुरू कर दिया.
जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की दिल्ली पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बाद अन्ना ने राजघाट स्थित गांधी दर्शन के द्वार के बाहर बने मंच पर सुबह ठीक 10.20 बजे अपने साथियों के साथ अनशन शुरू किया.
मंच पर अन्ना अकेले हैं जबकि उनका साथ दे रहे समाज के अन्य साथी स्वामी अग्निवेश, शांति भूषण, किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल मंच के समक्ष अन्य समर्थकों के साथ मौजूद हैं.
इससे पहले हजारे साथियों के साथ राजघाट गये और सभी ने राष्ट्रपिता को श्रद्वांजलि अर्पित की.
योगगुरू बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर रामलीला मैदान में हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ अन्ना हजारे ने समाज के अपने साथियों स्वामी अग्निवेश, किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल के साथ अनशन कर रहे हैं.
भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव के आंदोलन को कुचलने के लिए हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में राजघाट पर आज गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के एक दिवसीय अनशन का समर्थन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्र होने लगे हैं. अन्ना के नेतृत्व में होने वाले इस अनशन में एक सर्वधर्म प्रार्थना सभा और लोकपाल विधेयक पर बहस भी होगी.
प्रशासन ने, काले धन के मुद्दे पर बाबा रामदेव के अनशन के दौरान की गई कार्रवाई के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और दिल्ली पुलिस के जवान बड़ी संख्या में यहां तैनात हैं.
भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच, ‘‘इंडिया अगेन्स्ट करप्शन’’ लिखी टीशर्ट पहने बड़ी संख्या में युवा और बुजुर्ग हाथों में तिरंगे लहराते हुए राजघाट स्थित अनशन स्थल पर मौजूद हैं. बहुत से लोग गांधी टोपी लगाए हुए हैं जिस पर ‘मैं अन्ना हूं’ लिखा है.
अनशन स्थल पर महात्मा गांधी की पोशाक पहन कर पहुंचा एक व्यक्ति सबके आकषर्ण का केंद्र बना हुआ है. यह व्यक्ति बापू का पसंदीदा भजन ‘रघुपति राघव राजा राम’ गा रहा था.
सुरक्षा लिए यहां मेटल डिटेक्टर वाले दो गेट लगाए गए हैं और लोगों की दो बार जांच करने के बाद अनशन स्थल पर उन्हें प्रवेश दिया जा रहा है. इसके अलावा, प्रवेश से पहले स्वयं सेवकों के पंजीयन का इंतजाम भी है. ‘इंडिया अगेन्स्ट करप्शन’ के स्वयं सेवक भीड़ को नियंत्रित करने की व्यवस्था कर रहे हैं.
लोकपाल बिल ड्राफ्टिंग कमिटी में शामिल सिविल सोसायटी ने साफ़ किया है कि राजघाट पर सिर्फ अनशन ही नहीं होगा, लोकपाल बिल को लेकर सरकार के संदिग्ध रवैये पर सार्वजनिक बहस भी कराई जाएगी. क्योंकि इस बिल को लेकर सरकार की मंशा साफ़ नहीं लगती.
बाबा रामदेव की तरह सरकार चाहे तो अन्ना की भी आवाज़ दबा दे लेकिन क्या गारंटी है कि देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़ने वाले दूसरे अन्ना या रामदेव पैदा नहीं होंगे. क्या सरकार लोकतंत्र का भी गला घोंट देगी?