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बिल पर समयसीमा तय करना सही नहीं: अभिषेक मनु सिंघवी

स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी ने जनलोकपाल बिल को लेकर एक सकारात्मक संकेत दिया है.

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अभिषेक मनु सिंघवी
अभिषेक मनु सिंघवी

स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी ने जनलोकपाल बिल को लेकर एक सकारात्मक संकेत दिया है.
सिंघवी ने सोमवार को दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि लोकपाल बिल को लेकर सरकार का रवैया लचीला है.

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समिति के प्रमुख और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘स्थायी समिति को एक मौका दीजिए. हमें अपना काम करने दीजिए. हम सभी मिलकर उन लोगों को हैरान कर सकते हैं जो उलझन में और उदासीन हैं.’ उन्होंने कहा कि संसदीय समिति भ्रष्टाचार को लेकर लोगों की चिंता को समझती है. वह पहले से कहते रहें है कि समिति एक सख्त कानून बनाने के क्रम में सभी तरह की राय सुनने के लिए तैयार है.

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समिति के सूत्रों ने बताया कि इसकी अगली बैठक सितंबर के पहले सप्ताह में संभव है. दूसरी ओर हजारे की टीम ने संशोधित लोकपाल विधेयक को पारित करने के लिए 31 अगस्त का अल्टीमेटम दिया है. सिंघवी ने कहा कि सर्वश्रेष्ठ और मजबूत विधेयक बनाने के लिए सभी आदर्श तत्वों को शामिल किया जाएगा. उन्होंने कहा कि हजारे का जन लोकपाल भी समिति के सामने विचाराधीन है.

उन्होंने कहा कि वैसे समय सीमा 6 माह व 9 माह तक लगने का प्राविधान है लेकिन फिर भी हम आप लोगों को आशा दिलाते हैं या पूरी तरह से आश्वस्त करते हैं कि यह काम हम 3 माह में अवश्य पूरा कर लेंगे. सिंघवी ने कहा, ‘स्थायी समिति विचारों के आदान प्रदान और संतुलित तरीके से विचार विमर्श के लिए सर्वश्रेष्ठ मंच है तथा प्रत्येक व्यक्ति को इसकी आलोचना करने के बदले इसकी गरिमा का ख्याल रखना चाहिए.’ संसदीय स्थायी समिति को हजारे का विधेयक सौंपा जाना महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार ने हाल में ऐसे संकेत दिए हैं कि वह लोकपाल मुद्दे पर अन्ना पक्ष की कुछ सिफारिशों को शामिल करने पर विचार कर रही है.

कुल मिलाकर लोकपाल बिल को लेकर सरकार के रुख में बदलाव आया है. सरकार की ओर से बिल को लेकर अगर देखा जाय तो शायद यह पहला कदम बढ़ाने जैसा ही है. भाजपा के सांसद वरूण गांधी ने जन लोकपाल विधेयक को लोकसभा में निजी विधेयक के रूप में पेश करने के लिए नोटिस दिया है.

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