दिल्ली की एक अदालत ने लोकसभा में वर्ष 2008 में कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के विश्वास प्रस्ताव पर मतदान से पहले (नोट के बदले वोट को लेकर) हुए कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़ी सभी छह सीडी को सोमवार को देखने का निर्णय किया.
विशेष न्यायाधीश संगीता धींगरा सहगल ने दिल्ली पुलिस से कहा कि उसके पास नोट के बदले वोट से जो भी सीडी हैं वह उन सभी को पेश करे. एक टीवी चैनल ने यह स्टिंग ऑपरेशन किया था. अदालत ने अभियोजन पक्ष को अदालत में सीडी दिखाने के लिए एक विशेषज्ञ की भी सेवा लेने का निर्देश दिया क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के पूर्व सहयोगी सुधींद्र कुलकर्णी के वकील ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस द्वारा सौंपी गयी सीडी अपूर्ण हैं.
न्यायाधीश ने कहा, ‘यदि आपने सभी छह सीडी फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी को भेजी हैं तो इसका मतलब है कि आपके दिमाग में जरूर कुछ था, अन्यथा आपने उन्हें कूड़ेदान में फेंक दिया होता. हम बिल्कुल ही निष्पक्ष हों. आपके पास जो भी (सीडी) हैं आप उसे अदालत के समक्ष पेश करें और उन्हें सभी को दिखाएं.’
सरकारी अभियोजक राजीव मोहन ने अदालत से कहा कि दिल्ली पुलिस को संसदीय जांच समिति से छह सीडी मिलीं जिनमें एक खाली है. दिल्ली पुलिस ने कहा कि निजी टीवी चैनल से प्राप्त ये सभी सीडियां रिकार्ड में रख दी गयी हैं. इसपर अदालत ने कहा, ‘पहली बात यह है कि आप सभी छह सीडी की प्रमाणित प्रतियां दीजिए.’ इसी बीच अदालत ने कुलकर्णी के जमानत आवेदन पर मौजूदा दलील को तीन अक्तूबर तक टालते हुए उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि तबतक के लिए बढ़ा दी.
आरोपी भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और महाबीर सिंह भगोड़ा ने भी कल दिल्ली पुलिस पर स्टिंग के वीडियो टेप के कुछ अंश जानबूझकर हटाने का आरोप लगाया था. उनके वकील सिद्धार्थ लुथरा ने अदालत में कहा, ‘सर्वप्रमुख पदार्थ और उनका (अभियोजन का) ब्रह्मास्त्र टेप हैं. अभियोजन की ओर से जानबूझकर (कुछ अंशों) को हटाया गया. धनराशि टेबल पर रखने के बाद मीडिया द्वारा साक्षात्कार है जिसे हटा दिया गया है.’
लुथरा ने कहा, ‘स्टिंग ऑपरेशन करने वाले व्यक्ति ने (अपने बयान में) कहा कि टेबल पर धनराशि है और उसके बाद उसने कुछ साक्षात्कार किया. वह फुटेज कहा है?’ उन्होंने कहा, ‘हम डिजीटल प्रारूप के युग में रह रहे हैं. संपादन की प्रक्रिया में यह (अंतिम परिणाम) निर्बाध रिकार्डिंग के रूप में हो सकता है.’ उन्होंने अपने मुवक्किल कुलस्ते और भगोड़ा की जमानत की मांग करते हुए कहा, ‘क्या उनके पास मूल टेप हैं और यदि हैं तो उन्होंने उन्हें अदालत के समक्ष क्यों नहीं रखा.’