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2जी: मारन भी सुप्रीम कोर्ट की निगाह में

केन्द्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन भी 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की जांच के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय की निगाह में आ गये हैं.

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केन्द्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन भी 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की जांच के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय की निगाह में आ गये हैं.

न्यायालय की निगरानी में मामले की जांच कर रही एजेंसी, केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मारन पर चेन्नई की दूरसंचार कंपनी एयरसेल के मालिक पर 2006 में कंपनी की हिस्सेदारी एक मलेशियाई कंपनी को बेचने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है. माना जा रहा है कि इससे मारन के मंत्री पद पर खतरा पैदा हो गया है.

सीबीआई ने 2जी घोटाले की जांच के संबंध की स्थिति के संबंध में 71 पृष्ठ की एक नयी रिपोर्ट न्यायालय में पेश की है. इसमें कहा गया है कि वर्ष 2004 से 2007 के दौरान जब मारन दूरसंचार मंत्री थे, उस समय एयरसेल के प्रवर्तक सी. शिवशंकरन पर कंपनी में अपनी हिस्सेदारी एक मलेशियाई फर्म मैक्सिस समूह को बेचने के लिये दबाव डाला गया.

वरिष्ठ अधिवक्ता के.के. वेणुगोपाल ने न्यायालय में जी.एस. सिंघवी और ए.के. गांगुली की पीठ के समक्ष स्थिति रिपोर्ट को पढ़ा. हालांकि, उन्होंने मारन का नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि चेन्नई के इस व्यावसायी को दो साल तक मोबाइल सेवा शुरू करने का लाइसेंस नहीं दिया गया.

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रिपोर्ट में कहा गया है कि मारन ने मलेशियाई कंपनी का पक्ष लिया. दिसंबर 2006 में जब मलेशियाई कंपनी ने एयरसेल का अधिग्रहण कर लिया उसके बाद मलेशियाई कंपनी को मात्र छह महीने के भीतर 2जी सेवा लाइसेंस दे दिये गए. उल्लेखनीय है कि फरवरी 2004 से लेकर मई 2007 तक मारन दूरसंचार मंत्री के पद पर थे.

सीबीआई के वकील वेणुगोपाल ने स्थिति रिपोर्ट को पढ़ते हुये कहा, ‘एयरसेल का प्रवर्तक लाइसेंस के लिये दर दर भटकता रहा लेकिन उसे अपने शेयर मलेशियाई कंपनी को बेचने पर मजबूर कर दिया गया.’ न्यायालय में रिपोर्ट पेश करने के बाद एजेंसी के सूत्रों ने संकेत दिया कि इस मामले में उनसे पूछताछ हो सकती है.

इसके बाद विपक्षी दलों ने भी मारन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की है. भाजपा और सीपीआई ने कहा कि मारन को इस्तीफा दे देना चाहिए, वहीं तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने उनको मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की. इससे पहले एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशन, ने शीर्ष अदालत के समक्ष ऐसे दस्तावेज पेश किये थे जिनमें मारन पर मलेशिया की दूरसंचार कंपनी मैक्सिस समूह का पक्ष लेने के आरोपों को साबित किया गया था.

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इसी मलेशियाई कंपनी ने चेन्नई स्थिति एयरसेल को खरीदा था. एनजीओ के अनुसार मारन ने एयरसेल को यूनिफाइड एक्सेस सर्विसेज (यूएएस) लाइसेंस जारी करने में लगातार देरी की. कंपनी वर्ष 2004 से ही दूरसंचार विभाग में इसके लिये लगातार आवेदन कर रही थी, लेकिन समय समय पर बेवजह तरह तरह के मुद्दे उठाकर लाइसेंस जारी करने से इनकार किया जाता रहा. इसके बाद कंपनी के मालिक सी. शिवशंकर को आखिरकार एयरसेल को मलेशिया की मैक्सिस समूह को बेचना पड़ा.

मैक्सिस समूह के मालिक प्रमुख कारोबारी टी. आनंद कृष्णन हैं. द्रमुक में मारन के सहयोगी पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा तथा सांसद कनिमोई इस मामले में पहले से जेल में हैं. शीर्ष अदालत की पीठ के समक्ष सुनवाई में सीबीआई के वकील वेणुगोपाल ने न्यायालय से कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में धन प्रवाह और स्रोत के मामले में सीबीआई अपनी जांच 31 अगस्त तक पूरी कर लेगी.

उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2001 से लेकर 2008 के बीच स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में बरती गई तमाम अनियमितताओं की जांच भी सीबीआई तीन महीने के भीतर सितंबर 2011 तक पूरी कर लेगी. न्यायालय ने 11 जुलाई को अगले सुनवाई तय की है.

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