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आशा वर्करों का थाली बजाकर जोरदार प्रदर्शन, पंजाब सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप

पंजाब के मोगा में आशा वर्करों ने अपनी मांगों को लेकर बस स्टैंड चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया. थालियां बजाकर सरकार के खिलाफ रोष जताते हुए उन्होंने न्यूनतम 24 हजार रुपये मासिक वेतन, बंद इंसेंटिव की बहाली और एएनएम परीक्षा पास वर्करों को नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग उठाई. मांगें पूरी न होने पर घेराव की चेतावनी दी गई.

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45 डिग्री गर्मी में सेवा, फिर भी मांगें अधूरी!(Photo: Screengrab)
45 डिग्री गर्मी में सेवा, फिर भी मांगें अधूरी!(Photo: Screengrab)

पंजाब के मोगा जिले में शुक्रवार को आशा वर्करों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार रोष प्रदर्शन किया. बस स्टैंड चौक पर बड़ी संख्या में जुटीं आशा वर्करों ने थालियां बजाकर पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और वादाखिलाफी का आरोप लगाया.

प्रदर्शन की अगुवाई आशा वर्कर यूनियन की जिला प्रधान मनदीप कौर दीदारे वाला ने की. उन्होंने कहा कि सरकार बनने से पहले आशा वर्करों से कई बड़े वादे किए गए थे, लेकिन आज तक एक भी वादा पूरा नहीं किया गया. उनके मुताबिक लगातार ज्ञापन और मांगपत्र देने के बावजूद सरकार उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रही है.

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उन्होंने कहा कि आशा वर्कर भीषण गर्मी और 45 डिग्री से अधिक तापमान में भी घर-घर जाकर स्वास्थ्य सेवाएं दे रही हैं. इसके बावजूद उन्हें न तो उचित वेतन मिल रहा है और न ही उनके काम के अनुरूप सुविधाएं दी जा रही हैं.

‘फ्रंटलाइन पर सेवा, फिर भी उपेक्षा’

मनदीप कौर ने कहा कि आशा वर्कर मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कार्ड बनवाने, गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल, 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने, टीबी मरीजों के इलाज और बुजुर्गों की देखभाल जैसे अहम कार्य करती हैं.

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मोगा

उन्होंने याद दिलाया कि कोरोना महामारी, बाढ़ और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में भी आशा वर्करों ने फ्रंटलाइन पर रहकर काम किया. कई बार अपनी सुरक्षा और परिवार की चिंता छोड़कर भी उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारियां निभाईं.

इसके बावजूद सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि आशा वर्करों को कर्मचारी का दर्जा देने और उनके मानदेय में सुधार करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.

ये हैं प्रमुख मांगें

प्रदर्शन के दौरान यूनियन ने अपनी मांगों को विस्तार से रखा. इनमें न्यूनतम वेतन कानून के तहत कम से कम 24 हजार रुपये मासिक वेतन लागू करना सबसे प्रमुख मांग रही.

इसके अलावा बंद किए गए इंसेंटिव को बहाल करने, फैसिलिटेटरों के यात्रा भत्ते में बढ़ोतरी करने, एएनएम परीक्षा पास कर चुकी आशा वर्करों को नियुक्ति पत्र जारी करने और सरकारी सर्वे व योजनाओं में उचित मानदेय के साथ शामिल करने की मांग की गई.

मोगा

यूनियन नेताओं का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में आशा वर्करों पर लगातार अतिरिक्त काम का बोझ बढ़ाया जा रहा है, लेकिन भुगतान और सुविधाएं उसी अनुपात में नहीं बढ़ाई गई हैं.

सरकार को चेतावनी

प्रदर्शन के अंत में आशा वर्करों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री के आवास का घेराव भी किया जा सकता है.

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प्रदर्शन के दौरान बस स्टैंड चौक पर काफी देर तक नारेबाजी होती रही और आशा वर्करों ने कहा कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखेंगी.

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Input: तनमय समांता
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