संसद और राज्यों की विधानसभा की 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने के लिए 2023 में कानून बना दिया था, लेकिन अब उसे 2029 के लोकसभा चुनाव में लागू करने के लिए मोदी सरकार ने संशोधन विधेयक लेकर आई है. गुरुवार को सरकार ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन विधेयक लेकर आई है, जिस पर शुक्रवार चार बजे वोटिंग होनी है. महिला आरक्षण लागू होने के बाद महिला सांसदों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ पुरुष भी पहले से ज्यादा लोकसभा में चुनकर आएंगे?
मोदी सरकार ने अब लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए एक विधेयक संसद में पेश किया है.वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटें हैं, जिसे बढ़ाकर 850 सीटें हो जाएंगी. इसके लिए सरकार संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक भी लाई है.
नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण को 2029 के चुनाव में लागू करने की है. नारी शक्ति अधिनियम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित करता है, जिसके लागू होने से महिलाओं की भागीदारी संसद और विधानसभा में बढ़ेगी. ऐसे में पुरुष सांसदों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि पुरुष सांसदों की संख्या पहले भी ज्यादा बढ़ जाएगी?
महिला सांसदों की संख्या बढ़ जाएगी
मोदी सरकार ने ऐसे संशोधन प्रस्तावित किए हैं, जिनसे 2011 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल करके इस आरक्षण को लागू किया जा सके. इससे 2029 के लोकसभा चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षण को लागू करने की है. इसके चलते लोकसभा और राज्यों की विधानसभा में 33 फीसदी महिलाएं चुनकर आएंगे.
महिला आरक्षण लागू होने के बाद लोकसभा में 33 फीसदी महिला सांसद होंगी, क्योंकि कुल सीटों की 33 फीसदी सीटों पर सिर्फ महिलाएं ही चुनाव लड़ेंगी. इसके लिहाज से कुल सांसदों में से 33 फीसदी सांसद महिला होंगी. इस तरह से सांसद और विधानसभा दोनों जगह महिला प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, लेकिन पुरुषों की संख्या में कोई कमी नहीं आने वाली है. अभी लोकसभा में 74 महिला सांसद हैं, लेकिन आरक्षण के बाद यह संख्या बढ़कर कम से कम 283 हो जाएगी..
पुरुष सांसदों पहले से ज्यादा बढ़ जाएंगे
महिला आरक्षण को लेकर ये भ्रम बन गया है कि पुरुष सांसदों की संख्या कम हो जाएगी और संसद में उनकी संख्या घट जाएगी, लेकिन बता दूं कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला है. सरकार ने जो खाका तैयार किया है, वह 'विन-विन सिचुएशन'वाला है. संसद में महिला सांसदों की संख्या तो ऐतिहासिक रूप से बढ़ेगी ही, साथ ही पुरुष सांसदों की संख्या में भी इजाफा होगा.
'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' 2023 में साफ-साफ है कि यह तब लागू होगा, जब 2027 की जनगणना के आंकड़े आने और सीटों के परिसीमन के बाद. सरकार ने जनगणना की प्रक्रिया शुरू कर दी है और अब परिसीमन के लिए विधेयक लेकर आई है. इतना ही नहीं संसदीय सीटें बढ़ाने की है, मौजूदा वक्त में 543 लोकसभा सीटें है, जिसमें 3 सीटें खाली हैं. 540 लोकसभा सांसद हैं.

लोकसभा में फिलहाल 540 सांसद हैं, जिसमें से महिला सांसदों की संख्या 74 और पुरुष सांसदों की संख्या 466 है. इसे अनुपात के लिहाज से देखें तो 13.6 फीसदी महिला और 86.6 फीसदी पुरुष सांसद हैं. महिला आरक्षण लागू होने के साथ सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 850 हो जाएंगी. इसमें 33 फीसदी महिला आरक्षण के चलते 283 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. इसके अलावा 567 सीटें पुरुष या फिर सामान्य वर्ग के लिए होंगी.
2024 के लोकसभा चुनाव में 469 पुरुष सांसद जीतकर आए थे, जिसमें से तीन सीटें रिक्त हो गई हैं. इस तरह 466 पुरुष सांसद हैं, लेकिन महिला आरक्षण के बाद पुरुष सांसदों की संख्या 567 के आसपास होगी, क्योंकि राजनीतिक पार्टियां महिलाओं को उनकी रिजर्व सीटों ही टिकट देंगे. इसके अलावा सामान्य वर्ग के लिए होने के चलते उन पर ज्यादातर पुरुष ही चुनाव लड़ते नजर आएंगे. इस लिहाज से पुरुष सांसदों की संख्या पहले से ज्यादा हो जाएगी.
महिला आरक्षण न होने से अभी जो 543 सीटें है, उन्हीं पर महिलाएं चुनाव लड़ती नजर आती है. महिला सांसद जिन सीटों से चुनाव जीतती है, वो अभी रिजर्व नहीं है. इसीलिए उन सीटों से कोई भी चुनाव लड़ सकता है. ऐसे में महिला सांसद चुनी जाने से पुरुष सांसद की संख्या कम हो जाती है, लेकिन आरक्षण के बाद महिलाएं अपनी रिजर्व सीटों पर ही ज्यादातर चुनाव लड़ती नजर आएंगी.
पुरुष और महिला लोकसभा सांसदों का आंकड़ा
भारत में 1952 में पहली बार लोकसभा चुनाव हुए थे. पहली लोकसभा में जहां महिला सांसदों का प्रतिनिधित्व पांच फीसदी था, तब 22 महिलाएं सांसद बनी थीं. वहीं 17वीं लोकसभा में 78 महिलाओं के साथ यह बढ़कर 14.36 फीसदी तक पहुंचा. 2024 के आम चुनावों के बाद यह घटकर अब 13.63 फीसदी पर आ गया है.
पिछली लोकसभा के मुकाबले महिला सासंदों की संख्या ऐसे समय में कम हुई है, अब जब भारत में महिला आरक्षण को सरकार अमलीजामा पहनाने के लिए मोदी सरकार कदम लाई है. इस विधेयक के तहत लोकसभा और प्रदेश विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है. हालांकि, यह विधेयक अगली जनगणना के बाद ही लागू हो पाएगा.