मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा बजट रविवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया. युवाओं और महिलाओं साथ-साथ देश के अल्पसंख्यकों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए मोदी सरकार बजट में मेहरबान दिखी. केंद्रीय वित्त मंत्री ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के बजट किसी तरह की कोई कटौती नहीं की, बल्कि उसमें इजाफा ही किया है.
मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट में इस बार अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए कुल 3400 करोड़ रुपये के आवंटन किया है जबकि 2025 में 3395.62 करोड़ रुपये मिले थे. इस तरह पिछली बार की तुलनी में 4.38 करोड़ रुपये अधिक इस बार मिला है.
अल्पसंख्यक मंत्रालय का बजट बढ़ा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्तीय साल 2026-27 का बजट पेश किया.. केंद्रीय बजट में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को 3400 करोड़ रुपये मिला है. मोदी सरकार के बाद से ही अल्पसंख्यक मंत्रालय का बजट तेजी से बढ़ा है.
मोदी सरकार ने अल्पसंख्यक मंत्रालय के दिए गए 3400 करोड़ के बजट में केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएं/परियोजनाओं के लिए 184.45 करोड़ रुपये दिए हैं जबकि 2025 में 180.07 करोड़ रुपये दिए गए थे. इस बार उसमें 4.38 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है.
केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय का जो बजट बढ़ा है, उसमें केंद्रीय योजना के लिए जो इजाफा किया गया है, वो है. इसके अलावा बाकी की योजनाओं और स्कीम में पिछली बार की तरह के पैसे आवंटित किए गए हैं.
मोदी सरकार का फोकस शिक्षा पर रहा
प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत स्कूलों, छात्रावासों, स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक भवनों में सुधार किया गया है,जिससे समाज के कमजोर वर्गों को सीधा फायदा मिला है. महिलाओं से जुड़े मंसूबों ने महिलाओं को आगे बढ़ने का हौसला दिया है. इस योजना के जरिए महिलाओं को नेतृत्व क्षमता, आर्थिक साक्षरता और आत्मविश्वास से जुड़ा प्रशिक्षण मिला है, जिससे वे अपने परिवार और समाज में मजबूत भूमिका निभा रही हैं. इनसब योजनाओं से मुस्लिम समाज का भी फायदा हुआ है. महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं.
वित्त मंत्री ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के लिए इस वर्ष बजट में 3400 करोड़ रुपये देने का प्रावधान रखा है, जिसमें मंत्रालय की प्रमुख स्कीम के लिए कुल 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा अल्पसंख्यक मंत्रालय के प्रमुख कार्यक्रमों में से एक ‘प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम’ के लिए इस बार 1197.97 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रावधान किया गया है.
मोदी सरकार में कितना बजट घटा या बढ़ा
केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद साल दल साल बजट बढ़ा है. 2026 में 3400 करोड़, 2025 में 3395.63 करोड़ रुए अल्पसंख्यक मंत्रालय को दिए गए थे. इससे पहले 2024 में मोदी सरकार ने 3183.24 करोड़ रुपये के बजट अल्पसंख्यक समुदाय की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए दिए थे.
मोदी सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में मंत्रालय के लिए 3097.60 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव किया गया था. हालांकि, संशोधित बजट में यह राशि 2608.93 करोड़ रुपये हो गई थी. सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को 3183.24 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया है, जो 574.31 करोड़ रुपये अधिक है.
मनमोहन और मोदी सरकार कौन कितना दिया बजट
मनमोहन सरकार की तुलना में मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मंत्रालय का बजट बढ़ा है, लेकिन जिस तरह से मोदी सरकार 2014 में आने के बाद से अल्पसंख्यक समुदाय पर मेहरबान नजर आ रही थी, उसमें कमी जरूर आई है. यूपीए सरकार से तुलना करेंगे तो उस लिहाज से एक हजार करोड़ की अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में बढ़ोतरी दिखेगी, लेकिन मोदी सरकार के 2014 से लेकर 2026 तक किए गए बजट में बढोतरी रही है.
हालांकि, देश की सत्ता पर नरेंद्र मोदी के काबिज होने के बाद माना जा रहा था कि केंद्र सरकार अल्पसंख्यक मंत्रालय को ही खत्म कर देगी, लेकिन मोदी सरकार ने ऐसा नहीं किया. इतना ही नहीं अल्पसंख्यकों के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा मिलने वाला बजट भी दूसरे कार्यकाल तक हर साल बढ़ता ही रहा.
मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल में यानि 2014 से लेकर 2019 तक अल्पसंख्यकों पर मोदी सरकार खास मेहरबान नजर आई. ऐसे लगा कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार से भी ज्यादा खजाना अल्पसंख्यकों के विकास के लिए खोल दिया था, लेकिन दूसरे और तीसरे कार्यकाल में बहुत खास तवज्जे नहीं दिया. इस बात का सबूत बजट में अल्पसंख्यक मंत्रालय को मिलने वाले बजट से समझा जा सकता है.
मुसमलानों को कब कितना बजट आवंटित
अल्पसंख्यक समुदाय के विकास के लिए अलग से अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का गठन मनमोहन सरकार के पहले कार्यकाल में साल 2006 में हुआ. कांग्रेस नेतृत्व वाली तत्कालीन यूपीए सरकार ने पहली बार 2006 में अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 143 करोड़ रुपये आवंटित किए थे. उसके बाद से केंद्र सरकार बजट में अल्पसंख्यक मंत्रालय पर मेहरबान रही. साल 2009-10 के बजट में अल्पसंख्यक कल्याण के मद में 740 करोड़, 2010-11 में 760 करोड़, 2011-12 में 330 करोड़ और 2012-13 में 305 करोड़ रुपये का इजाफा किया गया था.
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत के साथ बीजेपी 2014 में सत्ता में आई थी. मोदी सरकार ने अपना पहला बजट 2014-15 में पेश किया. बीजेपी और मुस्लिमों के बीच जिस तरह विरोधाभास रहा है, उससे लग रहा था कि मोदी सरकार अल्पसंख्यक मंत्रालय को कोई खास तवज्जो नहीं देगी. पीएम मोदी ने इन कयासों को तोड़ते हुए अपने मूल मंत्र ‘सबका-साथ, सबका-विकास’ के तहत अल्पसंख्यकों पर दिल खोलकर खजाना लुटाया.
मोदी सरकार ने अपने पहले बजट में यानि 2014-15 में 3711 करोड़ रुपये का धन अल्पसंख्यक मंत्रालय को आवंटित किया था. वहीं, 2013-14 में मनमोहन सिंह की सरकार ने 3511 करोड़ रुपये दिए थे. इस तरह मोदी सरकार ने मनमोहन सरकार के आखिरी बजट की तुलना में 200 करोड़ रुपये अल्पसंख्यकों को ज्यादा दिया. इसके बाद मोदी सरकार ने दूसरा बजट 2015-16 में पेश किया. इस बार अल्पसंख्यक कल्याण के लिए मोदी सरकार ने बजट में 3712.78 करोड़ रुपये आवंटित किए. इस तरह मोदी सरकार ने अपने पहले बजट की तुलना में पौने दो करोड़ रुपये का मामूली इजाफा किया.
केंद्र की मोदी सरकार ने अपना तीसरा बजट 2016 में पेश किया था. सरकार ने साल 2016-2017 के बजट में भी अल्पसंख्यकों पर मेहरबानी दिखाई और अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 3800 करोड़ रुपये आवंटित किए थे. इस तरह पिछले बजट की तुलना में करीब 88 करोड़ की बढ़त दर्ज की गई.
मोदी सरकार ने चौथे बजट में 395 करोड़ बढ़ाया, अपने चौथे बजट में मोदी सरकार अल्पसंख्यकों पर खूब मेहरबान नजर आई. 2017-18 के बजट में मोदी सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 4194 करोड़ रुपये आवंटित किया, जो पिछले बजट की तुलना में 395 करोड़ का ज्यादा था. मुख्तार अब्बास नकवी ने इसे अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी बताया था. ये अल्पसंख्यक मंत्रालय के इतिहास में सबसे ज्यादा था. बीजेपी के सत्ता में आने के बाद चार बजट को देखें तो करीब 500 करोड़ रुपये का इजाफा था.
केंद्र की मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम साल में यानि 2018-19 के आम बजट में अल्पसंख्यक मंत्रालय के लिए 4700 करोड़ रुपए का आवंटन किया था. इस तरह 505 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. इसके बाद वर्ष 2019-20 के बजट में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए सरकार ने 4700 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा था. मोदी सरकार सत्ता में दूसरी बार आने के बाद अल्पसंख्यक मंत्रालय का बजट में 329 करोड़ की इजाफा करते हुए 5029 करोड़ रुपये कर दिया है. केंद्रीय वित्त मंत्री ने साल 2020-21 के लिए पेश बजट में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को 5029 करोड़ रुपये देने का प्रावधान था.
अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में कटौती
देश में मोदी सरकार बनने के बाद अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में जो इजाफा हो रहा था, उसमें कटौती का सिलसिला 2022 से शुरू हुआ. साल 2022-2023 के बजट में अल्पसंख्यक मंत्रालय के लिए 5020 करोड़ रुपये आवंटित किया था, जो इसके पिछले साल की तुलना में 9 करोड़ कम था. हालांकि, मोदी सरकार ने अल्पसंख्यकों के विकास के लिए वित्त वर्ष 2022-2023 में आवंटित किए गए 5020 करोड़ में से सिर्फ 2612 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाया था.
मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के आखिरी पूर्ण बजट में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के बजट में भारी कटौती की थी. साल 2023-24 के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय को वित्त मंत्री ने 3097 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था, जो पिछले बजट की तुलना में 1923 करोड़ कम था. इसके बाद 2024-24 के मंगलवार को पेश किए बजट में 3183.24 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रावधान रखा गया है, जो पिछले वर्ष के बजट की तुलना में 574.31 करोड़ भले अधिक हो, लेकिन मोदी सरकार के 2014 से 2022 तक दिए गए अल्पसंख्यक मंत्रालय से कम है.
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के लिए केंद्र सरकार द्वारा आवंटित बजट में अक्सर संशोधन होता रहता है और कई बार इसमें कटौती भी की जाती है. यह आमतौर पर मंत्रालय की ज़रूरतों के हिसाब से कम होता है. अंततः व्यय के मामले में यह देखा गया है कि दी गई राशि का सही तरीके से उपयोग नहीं किया जाता है.
ऐसे में देखा गया है कि 2023-2024 में सरकार ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के लिए 3,097.60 करोड़ रुपये का बजट तय किया था, लेकिन बजट में संशोधन के बाद इसे घटाकर 2,608.93 करोड़ रुपये कर दिया गया था. इसके बाद 2024 में मोदी सरकार ने 3,097.60 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3183.24 करोड़ रुपये कर दिया था. इसके बाद 2025 में मोदी सरकार ने अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट को 3395.62 करोड़ किया और अब उसमें इजाफा करते हुए 3400 करोड़ रुपये कर दिए हैं.