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तीन बार राज्यपाल ने लौटाया, दो बार कैंसिल हुआ शपथ ग्रहण... तमिलनाडु में विजय की टीवीके के साथ अब तक क्या-क्या हुआ

तमिलनाडु में टीवीके पार्टी को बहुमत के लिए जरूरी 118 विधायकों का समर्थन नहीं मिल पाया है, जिसके कारण थलपति विजय का शपथ ग्रहण दो बार टल चुका है. वहीं अभी भी तमिलनाडु में सरकार गठन पर सस्पेंस बना हुआ है.

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विजय की पार्टी TVK अभी भी बहुमत से दूर है
विजय की पार्टी TVK अभी भी बहुमत से दूर है

तमिलनाडु में राजनीतिक संकट बरकरार है. टीवीके भले ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत से 10 कदम की दूरी उसकी सत्ता बनाने की राह में सबसे बड़ी रोड़ा बन रही है. स्पष्ट बहुमत और अभी तक अन्य दलों के स्पष्ट समर्थन न मिल पाने के कारण सरकार नहीं बन पा रही है.

लिहाजा शनिवार को होने वाला थलपति विजय का संभावित शपथ ग्रहण भी कैंसिल हो गया है. ये दूसरी बार है कि जब विजय का शपथ ग्रहण कैंसिल हुआ है. इससे पहले सात मई को भी उनका शपथ ग्रहण कैंसिल हो गया था. उस दौरान तो उनके की समर्थक भी जुट गए थे, जिन्हें निराश होकर लौटना पड़ा था.

राज्यपाल ने तीन बार खाली हाथ लौटाया
इसके साथ ही थलपति विजय को राज्यपाल भी तीन बार लौटा चुके हैं. विजय उनके पास सरकार बनाने का दावा करते हुए जब पहली बार पहुंचे थे, तब राज्यपाल ने उन्हें लौटा दिया था. असल में चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने की बात कही थी. इससे कांग्रेस की जीती हुई पांच सीटें मिलकर विजय के पास 113 विधायकों का समर्थन हो गया. लेकिन राज्यपाल ने उनसे सभी 118 विधायकों के समर्थन हस्ताक्षर लाने को कहा था. ये सारे वाकये 4 मई से 6 मई तक हुए. 

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Thalapathy Vijay

7 मईः पहली बार टला संभावित शपथ ग्रहण
7 मई को विजय ने राज्यपाल से लगातार दूसरे दिन मुलाकात की. राज्यपाल ने फिर से 118 विधायकों का समर्थन दिखाने को कहा. इसी बीच विजय के शपथ ग्रहण की तैयारियां भी चल रही थीं और सात मई को शपथ की बात कही जा रही थी. लेकिन राज्यपाल के विवेकाधिकार के साथ लिए गए फैसले के कारण विजय की शपथ का कार्यक्रम पहली बार टल गया. वहीं राज्यपाल ने उन्हें दूसरी बार भी लौटा दिया था.

8 मई को भी नहीं मिला राज्यपाल से न्योता
8 मई को भी टीवीके को राज्यपाल से सरकार बनाने का न्योता नहीं मिला. इससे पहले राज्यपाल के '118 हस्ताक्षर' पर अड़े रहने को लेकर भी काफी चर्चाएं शुरू हो गईं. एक्सपर्ट ने कहा कि विजय की पार्टी टीवीके को फ्लोर टेस्ट का मौका मिलना चाहिए. फ्लोर टेस्ट विधानसभा में ही होना चाहिए न कि लोकभवन में. लेकिन 118 हस्ताक्षर वाली बात पर राज्यपाल की ओर से तर्क दिया गया था कि वह नहीं चाहते कि किसी अस्थिर सरकार का गठन किया जाए, ताकि सरकार बनते ही उसके गिरने की नौबत आ जाए.

टीवीके ने किया जरूरी समर्थन हासिल कर लेने का दावा

इधर 8 मई की शाम को खबर आई कि थलपति विजय ने सरकार बनाने के लिए समर्थन जुटा लिया है. उन्हें कांग्रेस के समर्थन से पांच सीटें मिली ही थीं. इसके अलावा सीपीआई के दो विधायक, सीपीएम के दो विधायक और वीसीके का भी दो विधायकों के साथ टीवीके को समर्थन देने की बात सामने आई. इस तरह टीवीके के हवाले से दावा किया गया कि वह बहुमत के आंकड़े से अधिक समर्थन जुटा चुकी है. देर शाम इस लिस्ट में IUML का भी नाम जुड़ा कि वह भी अपने 2 विधायकों के साथ समर्थन दे रही है. इस तरह टीवीके की ओर से दावा किया गया कि अब उसके पास 121 हस्ताक्षर हैं.

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9 मई को आई शपथ की अगली तारीख
इसी दावे के साथ एक बार फिर टीवीके की ओर से सरकार बनाने का ऐलान किया गया और शपथ ग्रहण के लिए 9 मई की तारीख भी सामने आ गई. अभी टीवीके समर्थक इसे सेलिब्रेट कर ही रहे थे कि सारे दावे एक-एक करके बुलबुला साबित होते गए और सामने आया कि वीसीके और IUML की ओर से समर्थन अभी मिला ही नहीं है. इस तरह तमिलनाडु में विजय की सियासी पारी एक बार फिर शुरू होने से पहले ही संकट में आ गई. 

Thalapathy Vijay

...लेकिन इससे पहले ही गहरा गया संकट
इस तरह थलपति विजय जिन्हें शनिवार सुबह 11 बजे शपथ लेनी थी, उस पर सस्पेंस गहरा गया. 8 मई की शाम को ही सूत्रों के हवाले से नई जानकारी सामने आई कि अभी दो महत्वपूर्ण पार्टियों का समर्थन पत्र नहीं आया है. VCK ने कहा है कि वो शनिवार को अपना फैसला बताएंगे. उधर, IUML ने साफ कहा है कि वो DMK के साथ हैं विजय के साथ नहीं. इन सब के बीच प्रदेश के कांग्रेस विधायकों के देर रात बेंगलुरु पहुंच जाने की खबरें सामने आईं. 

रात भर जारी रहा है ट्विस्ट एंड टर्न
शुक्रवार रात से लेकर शनिवार दोपहर तक तमिलनाडु की राजनीति में यही ट्विस्ट और टर्न जारी है. टीवीके की ओर से तय शपथग्रहण एक बार फिर कैंसिल हो चुका है. विजय ने राज्यपाल को 116 विधायकों के समर्थन का पत्र दिया है. इसमें TVK के 107 विधायक हैं, कांग्रेस के 5 हैं और CPI-CPM के 4 हैं. लेकिन सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन चाहिए. विजय के पास अभी 116 हैं यानी 2 विधायक अभी भी कम हैं. 9 मई को तीसरी बार भी विजय ने जब राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से मुलाकात की तो उन्होंने फिर से 118 हस्ताक्षरों की मांग की. इस तरह थलपति विजय तीसरी बार भी राज्यपाल के पास से बैरंग लौटे हैं.

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वीसीके का फंसा है पेच

वीसीके ने कहा है कि वह आज TVK को समर्थन देने पर फैसला करेगी. पार्टी चीफ थोल थिरुमावलवन ने कहा कि वह आज शाम 4 बजे पार्टी के आधिकारिक फैसले का ऐलान करेंगे. VCK प्रवक्ता केके. पावलन ने इसकी जानकारी दी है. पार्टी के अनुसार शुक्रवार को VCK की हाईलेवल कमिटी की बैठक हुई है. इसमें पार्टी चीफ को अंतिम फैसला घोषित करने के लिए अधिकृत किया गया था.
तो इस तरह, हालांकि CPI और CPI(M) पहले ही TVK को समर्थन देने का फैसला सार्वजनिक कर चुके हैं, लेकिन VCK की ओर से औपचारिक घोषणा अब तक नहीं हुई है.

IUML ने भी किया समर्थन का खंडन
उधर, IUML ने भी शुक्रवार देर रात एक बयान दिया है जिसमें उन्होंने साफ किया है कि उन्होंने विजय को समर्थन नहीं दिया. कुछ अखबारों में खबरें थीं कि IUML विजय को समर्थन दे रहा है. लेकिन ये गलत है. IUML ने कहा है कि बहुत सारे लोग उनके पास आए. विजय की पार्टी के भी महत्वपूर्ण लोग उनसे मिले. लेकिन IUML का साफ संदेश है कि वो कल भी DMK के साथ हैं, आज भी DMK के साथ हैं और कल भी DMK के साथ रहेंगे. यानी IUML विजय को नहीं बल्कि DMK को समर्थन देता है.

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दिनाकरण ने लगाए फर्जी समर्थन के आरोप
वहीं, शनिवार को AMMK चीफ TTV दिनाकरन ने TVK पर अपने एकमात्र विधायक कामराज के समर्थन का फर्जी पत्र राज्यपाल को सौंपने का आरोप लगाया. चेन्नई में उन्होंने मीडिया बातचीत में कहा कि 'AMMK का एकमात्र विधायक NDA और AIADMK के साथ है और एडप्पडी के. पलानीस्वामी ही मुख्यमंत्री पद के सही दावेदार हैं.उन्होंने आरोप लगाया कि TVK नेताओं को लगा कि पहले फर्जी समर्थन पत्र दे देंगे और बाद में विधायक पर दबाव बनाकर समर्थन हासिल कर लिया जाएगा.

दिनाकरन ने कहा कि उन्होंने इस मामले में राज्यपाल और पुलिस दोनों को शिकायत दी है. हालांकि TVK ने इन आरोपों को खारिज किया. TVK ने वीडियो जारी किया और दावा किया कि AMMK विधायक कामराज ने स्वेच्छा से पार्टी को समर्थन देने वाला पत्र लिखा था.

पार्टी विधायक कामराज ने टीटीवी दिनाकरण के इस आरोप का खंडन किया. उन्होंने इस बात से इनकार किया कि वह लापता थे या विजय की पार्टी ने राज्यपाल को फर्जी दस्तावेज सौंपे थे. कामराज ने कहा कि वह हमेशा संपर्क में थे और पुडुचेरी से आने के बाद उन्होंने खुद राज्यपाल के सचिव से मुलाकात की थी. उन्होंने बताया कि भ्रम इसलिए पैदा हुआ क्योंकि वह कई फोन इस्तेमाल करते हैं और उनमें से एक पर व्हाट्सऐप नहीं चलाते. कामराज ने यह भी कहा कि मीडिया और राजनीतिक गलियारों में फैल रही “झूठी” खबरों को लेकर वह कानूनी सलाह लेंगे और औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे.

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