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लोकसभा के बाद क्या राज्यसभा में विपक्ष के नेता पद की हैसियत खो देगी कांग्रेस?

केंद्र की सत्ता पर नरेंद्र मोदी के विराजमान होने के बाद से कांग्रेस का सियासी ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी गंवाने के बाद कांग्रेस एक के बाद एक राज्य में सरकार गंवाती जा रही है. ऐसे में इसका सियासी असर राज्यसभा में भी कांग्रेस के सदस्यों की संख्या पर पड़ रहा है.

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सोनिया गांधी और राहुल गांधी
सोनिया गांधी और राहुल गांधी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • लोकसभा में कांग्रेस के पास नेता प्रतिपक्ष का पद नहीं
  • कांग्रेस एक के बाद एक राज्य में मिल रही हार से नुकसान
  • कांग्रेस के राज्यसभा सदस्यों की संख्या लगातार घट रही

नरेंद्र मोदी के अगुवाई में बीजेपी गठबंधन पिछले दो लोकसभा चुनाव से प्रचंड बहुमत के साथ जीत दर्ज कर सत्ता में वापसी की है, जिसके चलते विपक्ष के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया. लोकसभा में कांग्रेस के पास इतनी भी संख्या नहीं है कि वो प्रतिपक्ष का पद रख सके. वहीं, अभी हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस को एक और झटका लगने वाला है. साल 2022 में अलग-अलग समय पर राज्यसभा की करीब 75 सीटों पर चुनाव होने हैं, जिसमें कांग्रेस को बहुत जल्द नुकसान होने वाला है. ऐसे में सवाल उठता है कि लोकसभा के बाद क्या राज्यसभा में भी कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष के पद की हैसियत खो देगी? 

बता दें कि सदन में सरकार के सामने कई विपक्षी पार्टियां होती हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर उस पार्टी को विपक्ष का नेता बनाने क मौका मिलता है जिसके पास कम से कम 10 फीसदी सीटें हासिल हों. पिछले दो चुनाव से कांग्रेस की इतनी सीटों नहीं आ पा रही है कि वो आधिकारिक तौर पर विपक्ष का नेता अपना बना सके. वहीं, इस साल के आखिर तक देश के 75 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है और कांग्रेस के पास अभी फिलहाल 34 सदस्य हैं. राज्यसभा में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या घटकर 25 की नीचे आ गई तो विपक्ष का पद गंवा देगी.  

भारतीय संविधान के तहत राज्यसभा के कुल 250 सदस्य निर्धारित हैं. इसमें 238 सदस्यों के लिए चुनाव होता है जबकि 12 सदस्यों को राष्ट्रपति के द्वारा मनोनीत किया जाता है. राज्यसभा चुनाव में मतदाता सीधे सांसदों को नहीं चुनते हैं बल्कि राज्य के विधायक राज्यसभा सदस्यों का चुनाव करते हैं. ऐसे में पांच राज्यों के चुनाव का असर राज्यसभा के चुनाव पर पड़ना लाजमी है.  

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देश के पांच राज्यों के चुनाव नतीजे के बाद अब राज्यसभा की 13 सीटों पर 31 मार्च को चुनाव है. इन 13 सीटों में 5 सीटें पंजाब की हैं, जबकि बाकी 8 सीटों में असम की दो, हिमाचल प्रदेश की एक, केरल की तीन, नागालैंड और त्रिपुरा एक-एक सीट है, जिनका कार्यकाल दो अप्रैल को खत्म हो रहा है. वहीं, साल के अंत तक उत्तर प्रदेश के 11, बिहार के पांच, राजस्थान के चार, मध्य प्रदेश के तीन और उत्तराखंड के एक सीट पर भी राज्यसभा चुनाव होने हैं. इसके अलावा ओडिशा, गुजरात, तमिलनाडू, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सीटों पर राज्यभा चुनाव होने हैं. 

कांग्रेस पांच राज्य के विधानसभा चुनाव में बड़ी उम्मीद लगाए बैठी थी, लेकिन जब नतीजे आए तो सारे अरमानों पर पानी फिर गया. पंजाब में कुल सीट 117 विधानसभा, कांग्रेस को मिली सिर्फ 18 ही मिली जबकि आम आदमी पार्टी को 92 सीटें आई है. ऐसे में पंजाब के पांच राज्यसभा सीटों पर इसका असर पड़ना लाजमी है. आम आदमी पार्टी के खाते में सभी पांच राज्यसभा सीटें जाती दिख रही हैं. 

आम आदमी पार्टी ने पांचों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं जबकि विपक्षी की ओर से कोई प्रत्याशी नहीं दिया. ऐसे में पांच सीटें आम आदमी पार्टी को मिलना तय है. इस तरह आम आदमी पार्टी राज्यसभा में तीन से बढ़कर 8 सदस्यों पर पहुंच जाएगी. वहीं, केरल से एक सीट कांग्रेस को मिल सकती है जबकि असम में भी एक सीट मिलने का अनुमान है. चुनाव के नतीजों के बाद बीजेपी के राज्यसभा सदस्यों की संख्या 100 के पार हो जाएगी. एनडीए पहली बार बहुमत का आंकड़ा पार करेगी. 

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मौजूदा समय में राज्यसभा में भाजपा सदस्यों की संख्या 97 है. इन चुनाव के नतीजों के बाद और साल के अंत तक ये संख्या बढ़कर 104 हो जाएगी. वहीं, एनडीए सदस्यों के आंकड़ों पर नजर डालें तो ये भी बढ़कर 122 तक हो सकती है. इस तरह मतलब 243 सदस्यों वाली राज्यसभा में बीजेपी अपने गठबंधन दलों के साथ बहुमत में आ जाएगी. बीजेपी राज्यसभा में अभी तक अल्पमत में थी. 

पंजाब के राज्यसभा से सेवानिवृत होने वाले सदस्यों में कांग्रेस से प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह डुलो, अकाली दल से सुखदेव सिंह ढींढसा एवं नरेश गुजराल जबकि भाजपा से एस मलिक शामिल हैं. इन सारे सदस्यों की वापसी नहीं हो पाएगी जबकि दो अन्य सदस्य अकाली दल से बलविंदर सिंह भुंडर और कांग्रेस की अंबिका सोनी का कार्यकाल जुलाई में पूरा होगा और ये दोनों सीटें AAP के खाते में जा सकती हैं. 


विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को होने जा रहा है.  राज्यसभा में अभी कांग्रेस के 34 सांसद हैं, जो कि साल के अंत तक घटकर महज 27 हो जाएंगे. ऐसे में कांग्रेस के कुछ राज्यसभा सदस्य अगर पार्टी छोड़ देते हैं और यह आंकड़ा 25 के नीचे चला जाता है तो आधिकारिक तौर पर विपक्ष की कुर्सी गंवा देगी. कांग्रेस को मध्य प्रदेश से लेकर यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, केरल में राज्यसभा चुनाव के लिए नुकसान उठाना पड़ेगा तो तमिलनाडु से एक सीट का लाभ हो सकता है. 

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